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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 04, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

चरमरा गई है उत्‍तराखंड की वित्‍तीय व्‍यवस्‍था: विजय बहुगुणा

By gaurav kalaEdited By:
Updated: Sun, 04 Sep 2016 05:08 PM (IST)

उत्‍तराखंड के पूर्व मुख्‍यमंत्री विजय बहुगुणा का कहना है कि उत्‍तराखंड की वित्‍तीय व्‍यवस्‍था चरमरा गई है।

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सितारगंज, [जेएनएन]: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का कहना है कि राज्य की वित्तीय स्थिति चरमरा गई है। हरीश रावत सरकार इस पर श्वेत पत्र जारी करें। देश में उत्तराखंड ऐसा अकेला राज्य है जहां वित्त सचिव की नियुक्ति नहीं की गई है। जिला योजना 2016-17 का प्लान ही नहीं बना है।
उन्होंने कहा कि बिना योजना व नीति के राज्य सरकार अनर्गल बजट खर्च कर रही है। उन्होंने कहा कि हरीश रावत केंद्र सरकार पर आरोप लगाते है कि पैसा नहीं मिल रहा है। नीति आयोग और वित्त आयोग ने जो मानक तय किए हैं, उसके अनुसार उत्तराखंड के साथ ही सभी राज्यों को उसके हिस्से का पैसा मिलता है।

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मोदी सरकार पूर्व की यूपीए सरकार से ज्यादा अनुपात में केंद्रीय आर्थिक सहायता दे रही है। कहा कि केंद्र से तालमेल बनाकर ही राज्य का विकास संभव है। हरीश रावत केंद्र पर निराधार आरोप लगाकर अपने सम्बन्ध खराब कर चुके है।
केंद्र से सहायता इसलिए नहीं ले रहे कि कहीं भाजपा को इसका श्रेय न मिल जाय। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में आई आपदा के बाद विश्व बैंक और एडीबी ने 25 हजार करोड़ रूपये स्वीकृत किये थे।
लेकिन, अब तक रावत सरकार 20 प्रतिशत पैसा खर्च नहीं कर सकी है। हरीश रावत और उनके मंत्रियों की दिलचस्पी ठेका, अवैध खनन, और भू प्रयोग बदलने में है। कोई भी मंत्री अपनी विधानसभा से बाहर नहीं जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि हरीश रावत विकास नहीं चाहते हैं। वह असंतोस फैलाना चाहते हैं। ताकि इसका ठीकरा केंद्र के सर फोड़ सकें। कहा कि हरीश रावत अपनी नाकामी छिपाने के लिए चुनाव टालना चाहते है।
उन्होंने कहा कि भाजपा जल्द ही हिसाब दो, जवाब दो के जरिये बड़े स्तर पर कांग्रेस के भ्रष्टाचार और नाकामियों को उजागर करेगी। सितारगंज में विकास के नाम पर नाटक हो रहा है। नगर पालिका को जो धनराशि स्वभाविक रूप से मिलनी चाहिये, उसको रोका जा रहा है।
बाद में कांग्रेस के लोग सीएम के पास जाकर वही पैसा देकर श्रेय लिया जा रहा है। कहा कि कांग्रेस छोड़ने वाले दस विधायकों को परेशान किया जा रहा है।

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