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राहतभरी खबर: केदारनाथ-बासुकीताल ट्रेक पर गए पांच ट्रेकरों से हुआ संपर्क, सभी सेफ

Published: Wed, 30 Sep 2026 12:15 PM (IST)Updated: Wed, 30 Sep 2026 11:54 PM (IST)

रुद्रप्रयाग के केदारनाथ-बासुकीताल-आडिन कोल ट्रेक पर 25 सितंबर को लापता हुए पांच सदस्यीय ट्रेकिंग दल की तलाश में हवाई खोज अभियान जारी है।

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संवाद सहयोगी जागरण, रुद्रप्रयाग। केदारनाथ- बासुकीताल ट्रैक होते हुए गंगोत्री के लिए निकले पांच ट्रैकरों से पांच दिन बाद संपर्क हो गया है। सभी ट्रैकर सुरक्षित हैं और गंगी-घुत्तू होते हुए जनपद टिहरी गढ़वाल की ओर निकल गए हैं।

ट्रैकरों से संपर्क नहीं होने पर प्रशासन की ओर से बुधवार को हेलीकॉप्टर और आठ सदस्यीय पैदल दल के माध्यम से सर्च अभियान शुरू किया गया था।

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, प्रवेश चौहान अपने चार साथियों अमित फर्सवाण, नवीन रावत, विवेक और संदीप के साथ 25 सितंबर को केदारनाथ से गंगोत्री के लिए रवाना हुए थे।

दल को बासुकीताल होते हुए ऑडिन कॉल ट्रैक के रास्ते गंगोत्री जाना था। कई दिनों तक परिजनों का संपर्क नहीं होने पर प्रवेश चौहान के भाई यशवंत सिंह चौहान ने केदारनाथ पुलिस चौकी को इसकी सूचना दी थी।

सूचना मिलने पर जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (डीईओसी) ने पुलिस नियंत्रण कक्ष रुद्रप्रयाग और प्रभागीय वनाधिकारी, वन्यजीव प्रभाग गोपेश्वर को मामले से अवगत कराया। साथ ही 40वीं वाहिनी पीएसी हरिद्वार और संबंधित विभागों से समन्वय कर ट्रैकरों की जानकारी जुटाई गई।

29 सितंबर को बासुकीताल ट्रैक क्षेत्र से मासर ताल तक हेलीकॉप्टर से सर्च अभियान चलाया गया, लेकिन उच्च हिमालयी क्षेत्र में अत्यधिक कम दृश्यता के कारण अभियान स्थगित करना पड़ा।

बुधवार 30 सितंबर को मौसम अनुकूल होने पर यूकाडा के सहयोग से केदारनाथ/बासुकीताल से ऑडिन कॉल ट्रैक की ओर हेलीकॉप्टर से दोबारा सर्च अभियान शुरू किया गया।

वहीं, सुबह पांच बजे एसडीआरएफ के चार, वन विभाग के दो और पुलिस के दो जवानों समेत आठ सदस्यीय दल पैदल रवाना किया गया। इसी दौरान यशवंत सिंह चौहान ने प्रशासन को बताया कि उनका भाई प्रवेश चौहान से संपर्क हो गया है और सभी ट्रैकर सुरक्षित हैं।

इसके बाद दोपहर 1:57 बजे जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने अमित फर्सवाण से फोन पर बात की। अमित ने भी सभी ट्रैकरों के सुरक्षित होने तथा घुट्टू होते हुए आगे निकल जाने की पुष्टि की। इसके बाद खोज एवं बचाव के लिए रवाना किए गए आठ सदस्यीय दल को वापस बुला लिया गया।

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