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    चीन-नेपाल सीमा पर 12 साल बाद काटा गया जुमली राजा का 'सिर', चली सैकड़ाें तलवारें; मना जीत का जश्न

    Updated: Sun, 09 Aug 2026 03:04 PM (IST)

    चीन-नेपाल सीमा पर स्थित गुंजी गांव में 12 साल बाद जुल्मी जुमली राजा के पुतले का सिर काटकर ग्रामीणों ने विजय उत्सव मनाया। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. गुंजी गांव में 12 साल बाद जुमली राजा का पुतला काटा गया

    2. पुतले के रक्त से विजय तिलक लगाकर ग्रामीणों ने जश्न मनाया

    3. आईटीबीपी, एसएसबी सहित स्थानीय लोगों ने उत्सव में भाग लिया

    संवाद सूत्र , गुंजी (पिथौरागढ़)। चीन और नेपाल सीमा पर साढ़े दस हजार फीट की ऊचाई पर स्थित कैलास मानसरोवर यात्रा का प्रमुख पड़ाव और भारत चीन सीमात व्यापार की भारतीय मंडी गुंजी में शनिवार को महाकुंभ की तरह बारह वर्षों बाद सदियों पुराने क्षेत्र के जुल्मी जुमली राजा के प्रतिशोध का प्रतिकार देखा गया। जुमली राजा के बुत के सिर का धड़ से अलग कर उसके शरीर पर सैकड़ों तलवारें चलीं।

    बुत के अंदर रखे काली बकरी के रक्त और अंतड़ियों से निकले खून का मस्तक पर विजय तिलक लगाकर जुमली हया सामो का जश्न मनाया गया। गुंजी गांव जश्न में डूबा है और क्षेत्र सहित बाहर से पहुंचे लोगाें ने इस विजय उत्सव का नजारा देखा।

    देश-विदेश से लौटे लोग

    बारह वर्षों बाद मनाए जाने वाले जुम्ली हया सामो के लिए गुंजी गांव के देश-विदेश में कार्य करने वाले सभी लाेग गांव पहुंचे हैं। शनिवार सुबह से ही गांव में इस विजय उत्सव को मनाने की तैयारी होने लगी। गांव के मुखिया विशन सिंह बूड़ाथौकी के आंगन में ग्रामीण एकत्रित हुए। जहां पर स्थानीय फसल पलथी के आटे से जुल्मी जुमली राजा का बुत बनाया गया।

    बुत के अंदर काली बकरी मार कर उसकी अंतड़ियां, रक्त डाला गया। दोपहर के बाद तक यह सब हुआ । बुत डोली में बनाया गया। इसके बाद गांव युवा वालंटियर बुत को डाेली सहित फासगंज मैदान की तरफ ले गए और बुत को झाड़ियों के बीच छुपा दिया।

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    वालंटियर गांव लौटे उसके बाद गांव के बच्चों सहित युवा, बुर्जुग सभी अपने स्थानीय वेषभुषा में डंगरियों और मुखिया के नेतृत्व में हाथों में तलवार लेकर फासगंज की तरह चले । फासगंज मैदान के पास झाड़ियों में छिपाए गए बुत को देवडांगरों ने ढूंढा। बुत को देखते ही गांव के मुखिया ने अपनी तलवार से बुत का सिर तलवार के एक ही वार में काटा डाला। मुखिया के सिर काटते ही गांव के सभी की तलवारे बुत पर चली और बुत के अंदर से बहने वाले रक्त को जुमली राजा का रक्त मानते हुए सभी ने उस रक्त से मस्तक पर विजय तिलक लगाया।

    इसके पश्चात ग्रामीण विजय मनाते विजयी मुद्रा में गांव को लौटे तो गांव के प्रवेश द्वार पर अपनी रंग परंपरागत वशेभूषा में गांव की महिलाओं ने पारंपरिक ढंग से उनका स्वागत किया और मंगलगीत गाए। इसी के साथ जश्न आरंभ हुआ जो देर रात तक चलेगा।

    इस अवसर गांव सहित व्यास घाटी के सभी गांवों के ग्रामीण, आइटीबीपी ,एसएसबी, बीआरओ , दारमा, चौदास घाटियों के अलावा गुंजी गांव के ग्रामीणों के सभी नाते ,रिश्तेदार उपस्थित रहे। इस आयोजन में आइटीबीपी द्वारा व्यवस्था में भरपूर सहयोग दिया गया। रविवार को भी गांव में दिन , रात सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामूहिक भोज होगा।

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