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    पिथौरागढ़ में बेटी ने पिता को मुखाग्नि देकर तोड़ी सामाजिक रूढ़ियां, निभाया संतान का दायित्व

    Updated: Thu, 05 Feb 2026 11:16 PM (IST)

    पिथौरागढ़ में बेटी पुष्पा ने अपने दिवंगत पिता, सेवानिवृत्त सिपाही खड़क सिंह को मुखाग्नि देकर सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती दी। पुत्र न होने पर गांव के बु ...और पढ़ें

    तेजम तहसील के बांसबगड़ क्षेत्र के खेतभराड़ गांव में पिता खड़क सिंह को मुखाग्नि देती पुत्री पुष्पा।

    तेजम तहसील के बांसबगड़ क्षेत्र के खेतभराड़ गांव में पिता खड़क सिंह को मुखाग्नि देती पुत्री पुष्पा।

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    संवाद सूत्र, जागरण, नाचनी (पिथौरागढ़)। पहाड़ की बेटियां लगातार सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ते हुए आगे आकर समानता का संदेश दे रही हैं। पंचायतों में प्रतिनिधित्व की बात हो या सामाजिक कार्यों में सहभागिता, सभी जगह महिलाएं आगे बढ़ रही हैं।

    इतना ही नहीं जहां अब तक माता-पिता की चिता को मुखाग्नि देने के दायित्व को केवल पुत्रों से ही जोड़ा देखा जाता था, वहां भी बेटियां भी इस जिम्मेदारी को निभाकर समाज की सोच बदल रही हैं।

    जनवरी में गंगोलीहाट में एक पूर्व सैनिक के निधन पर उनकी सात बेटियों ने न केवल पिता को कंधा दिया बल्कि मुखाग्नि भी दी। इनमें से सीआइएसएफ में कार्यरत एक बेटी ने तो धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए मुंडन भी कराया।

    इसी तरह का मामला गुरुवार को तेजम तहसील के बांसबगड़ क्षेत्र के खेतभराड़ गांव में सामने आया। पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त सिपाही खड़क सिंह का निधन हो गया था। उनका पुत्र नहीं था और पुत्री पुष्पा का भी विवाह हो गया है।

    सूचना मिलते ही पुष्पा ससुराल से दौड़ी चली आई। गांव के बुजुर्गों ने मुखाग्नि दिए जाने को लेकर व्यवस्था दी कि चचेरे-तहेरे भाइयों में से कोई पुरुष सदस्य यह कार्य कर सकता है। गांवों में अब तक इसी तरह क्रियाकर्म होते रहे हैं।

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    इस पर पुष्पा आगे आईं और निर्णय लिया कि अपने पिता को वह स्वयं मुखाग्नि देंगी। अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी करते हुए वह श्मशान घाट तक पहुंचीं और वहां चिता को मुखाग्नि दी। स्थानीय लोगों ने इस कदम को समाज में बदलती सोच का प्रतीक बताते हुए इसकी सराहना की।

    कहा कि ऐसे उदाहरण न केवल सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देते हैं बल्कि यह भी साबित करते हैं कि जिम्मेदारियों के निर्वहन में बेटा-बेटी का कोई भेद नहीं होना चाहिए।

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