नेपाल में भूस्खलन से चमेलिया नदी का बहाव रुका, भारत तक मंडराया तबाही का खतरा; कई इलाकों में अलर्ट जारी
नेपाल के दार्चुला जिले में भूस्खलन से चमेलिया नदी का बहाव आंशिक रूप से रुक गया है, जिससे भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
HighLights
नेपाल में भूस्खलन से चमेलिया नदी का बहाव रुका।
भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का गंभीर खतरा।
जलविद्युत परियोजनाओं और काली नदी के लिए अलर्ट जारी।
जागरण संवाददाता, झूलाघाट। सीमांत क्षेत्र से लगे नेपाल के दार्चुला जिले में भारी बारिश के बीच एक बड़ी प्राकृतिक आपदा ने दस्तक दी है। अपि हिमाल गांव पालिका के वार्ड नंबर-1 स्थित भट्टाड़ गांव के ऊपर पहाड़ी दरकने से भारी भूस्खलन हुआ है। पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा सीधे चमेलिया नदी में जा गिरा, जिससे नदी का आधा बहाव रुक गया है और पानी ठहरने लगा है।
चमेलिया नदी आगे जाकर काली नदी में मिलती है, इसलिए भारत और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ और भारी तबाही का खतरा मंडराने लगा है। अपि हिमाल के वार्ड अध्यक्ष भगत सिंह ठेकरे बोहरा ने बताया कि दोपहर बाद पहाड़ी दरकने से यह घटना हुई। एहतियात के तौर पर भट्टाड़ गांव के 15 परिवारों को तत्काल गांव पालिका की मदद से सुरक्षित ऊंचाई वाले घूरसाड़ गांव में शिफ्ट कर दिया गया है।
पालतू पशुओं को भी वहीं रखने की व्यवस्था की जा रही है। इलाके में अभी भी भारी बारिश हो रही है, जिससे और भूस्खलन का खौफ बना हुआ है। दुर्गम क्षेत्र होने के कारण नेपाली सेना, पुलिस और एपीएफ को मौके पर पहुंचने में करीब एक दिन का समय लगता है।
हालिया आपदा के जख्मों के बीच नया खौफ
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब नेपाल हाल ही में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन की विभीषिका से उबर भी नहीं पाया है। बीते दिनों नेपाल में आई उस प्रलयंकारी आपदा ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली थी और भारी बुनियादी ढांचा नष्ट कर दिया था। उस खौफनाक मंजर की यादों के बीच अब चमेलिया नदी में कृत्रिम झील बनने के खतरे ने दोनों देशों के सीमावर्ती लोगों को बुरी तरह खौफजदा कर दिया है।
तीन बांधों का पानी ला सकता है प्रलय
इस भूस्खलन का सबसे बड़ा खतरा चमेलिया नदी पर बने जलविद्युत प्रोजेक्ट्स को लेकर है। घटना स्थल से करीब 40 किमी नीचे गेठीगाड़ा,सिमपानी, भारत और सेरा,नेपाल के पास चमेलिया नदी काली नदी में मिलती है।
इसी 40 किमी के दायरे में चीन की मदद से बलांच में 30 मेगावाट का चमेलिया और 40 मेगावाट का अपर चमेलिया पावर प्रोजेक्ट बन चुका है, जबकि 28 मेगावाट का मध्य चमेलिया प्रोजेक्ट निर्माणाधीन है। यदि भूस्खलन से बनी झील टूटती है, तो इन तीनों बांधों का भारी पानी एक साथ काली नदी में आ जाएगा, जिससे झूलाघाट, पंचेश्वर से लेकर टनकपुर तक भारी तबाही मच सकती है।
प्रशासन ने जारी किया अलर्ट
दार्चुला के मुख्य जिला अधिकारी वर्त राज पौडेल ने बताया कि नदी का बहाव आंशिक रूप से रुका है, लेकिन आधे हिस्से से पानी निकल रहा है। अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। जिला प्रशासन ने चमेलिया नदी के किनारे रहने वाले सभी निवासियों और तीनों बांधों के कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर चले जाने का अलर्ट जारी कर दिया है। लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की गई है।
