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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 16, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

डीएम-एसएसपी से लेकर हर व्यक्ति तक पहुंचेगा जंगल अलर्ट

By Skand ShuklaEdited By:
Updated: Sat, 16 Feb 2019 08:44 PM (IST)

देश के किसी भी कोने में रहने वाले पहाड़ के बाशिंदे को अब उनके मोबाइल पर जंगलों का हाल पता चलेगा। वन विभाग एसएमएस भेजकर बताएगा कि किस एरिया का जंगल धधक रहा है।

डीएम-एसएसपी से लेकर हर व्यक्ति तक पहुंचेगा जंगल अलर्ट
डीएम-एसएसपी से लेकर हर व्यक्ति तक पहुंचेगा जंगल अलर्ट

गोविंद बिष्ट, हल्द्वानी। देश के किसी भी कोने में रहने वाले पहाड़ के बाशिंदे को अब उनके मोबाइल पर जंगलों का हाल पता चलेगा। वन विभाग एसएमएस भेजकर बताएगा कि किस एरिया का जंगल धधक रहा है। इस अलर्ट से आग पर काबू पाने में भी मदद मिलेगी। डीएम और एसएसपी से लेकर आम तक यह संदेश पहुंचेगा। उत्तराखंड में पहली बार यह सिस्टम तैयार किया गया है। जिसका मकसद लोगों में जंगलों के प्रति जुड़ाव पैदा करना है। शुक्रवार से फायर सीजन शुरू हो चुका है। यह 15 जून तक चलेगा। पिछले साल 4480.03 हेक्टेयर जंगल आग से प्रभावित हुआ था। इसमें रिजर्व फॉरेस्ट व वन पंचायत एरिया शामिल था। महकमे के सामने इस साल वनाग्नि पर काबू पाना बड़ी चुनौती है। संसाधन व बजट का अभाव भी इसमें रुकावट पैदा करेगा। हालंाकि फायर लाइन काटने व क्रू स्टेशन स्थापित करने का काम लगभग पूरा हो चुका है। वहीं, वन विभाग ने इस बार वेबसाइट के जरिये एक लिंक तैयार किया है। जिसमें क्लिक कर कोई भी व्यक्ति जुड़ सकता है। फिर सीधा उसके नंबर पर आग लगने की जानकारी पहुंच जाएगी। विभागीय वेबसाइट पर शनिवार को लिंक जारी हो जाएगा। कर्मचारियों से लेकर डीएफओ व प्रमुख वन संरक्षक तक हर मैसेज जाएगा।

एक वन पंचायत में नौ लोग

वन पंचायतों का सहयोग लेकर जंगल की आग पर काबू पाने के लिए विभाग इस बार पूरी कोशिश करेगा। प्रदेश में 12 हजार से अधिक वन पंचायतें है। हर वन पंचायत में नौ लोग होते हैं। इनकी संख्या करीब सवा लाख है। अभी तक पंचायतें अपने अधीन आने वाले जंगल की सुरक्षा करती थी।

पौने चार लाख हेक्टेयर एरिया संवेदनशील

उत्तराखंड में पिछले नौ साल में जंगल की आग से प्रभावित एरिया लगातार बढऩा चिंता का विषय बन चुका है। सूबे में करीब पौने लाख हेक्टेयर एरिया दावानल की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है।

फॉरेस्ट सर्वे की साइट से जुड़ सकते हैं

भारतीय वन सर्वेक्षण (फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया) की वेबसाइट पर जाकर लोग अपना नंबर रजिस्टर्ड करवा सकते हैं। यहां नाम, नंबर, मेल समेत अन्य जानकारी भरनी होगी। जिसके बाद मोबाइल में आए ओटीपी को डालते ही तुंरत नंबर रजिस्टर्ड होने की सूचना मोबाइल पर मिल जाएगी। वन सरक्षक पश्चिमी वृत्त, डॉ. पराग मधुकर धकाते मैसेज के जरिये बड़े स्तर तक आग की जानकारी पहुंचेगी। सामान्य व्यक्ति तुंरत महकमे से संपर्क कर स्थिति के बारे में अपडेट ले सकेगा। बीट अफसर से लेकर उच्चाधिकारी तक यह मैसेज पहुंचेगा।

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