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हल्द्वानी शुद्धिकरण मामला: हाईकोर्ट ने याचिका निस्तारित की, सरकार ने दिया जांच का आश्वासन

Published: Mon, 07 Sep 2026 03:08 PM (IST)Updated: Mon, 07 Sep 2026 04:01 PM (IST)

हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद हुए 'शुद्धिकरण' मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई की।

HighLights

  1. हाईकोर्ट ने हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले में याचिका को निस्तारित किया।

  2. सरकार ने पुलिस जांच और साक्ष्य सुरक्षित रखने का आश्वासन दिया।

  3. खरगे की जनसभा के बाद रामलीला मैदान का शुद्धिकरण हुआ था।

जागरण संवाददाता, नैनीताल। रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद सभा स्थल का ‘शुद्धिकरण’ के चर्चित मामले में सुनवाई की।

सोमवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया कि मामले में दो प्राथमिकी दर्ज हैं, एक हल्द्वानी में और दूसरी अखबारों में छपी खबर के आधार पर जीरो एफआईआर कर्नाटक के बंगलुरु में दर्ज हुई है, जिसे जांच के लिए हल्द्वानी में ट्रांसफर किया जाना है।

सरकार ने कोर्ट को आश्वस्त किया है कि पुलिस मामले में जांच करेंगी। सरकार ने सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी सुरक्षित रखने की बात कही है।

वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने सरकार के आश्वासन के बाद याचिका को निस्तारित कर दिया है।

देहरादून निवासी सामाजिक कार्यकर्ता बैजनाथ की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि जनसभा के उपरांत सार्वजनिक रूप से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गंगाजल छिड़ककर शुद्धिकरण किए जाने से समाज में वैमनस्यता फैलने की आशंका बढ़ गई है।

इस घटनाक्रम को लेकर विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग स्पष्टीकरण और धार्मिक बयानबाजी सामने आई थी, जिसके बाद कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा था।

याचिका में कहा गया है कि हल्द्वानी में शुद्धिकरण करने वालों की एफआईआर करने वालो एफआईआर तो दर्ज कर ली गई लेकिन कांग्रेसियों की एफआईआर दर्ज नही की गई।

याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्यों, जैसे कि वीडियो रिकॉर्डिंग और क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज को तत्काल प्रभाव से संरक्षित एवं सुरक्षित रखने के निर्देश जारी किए जाएं।

याचिका में प्रदेश सरकार को इस मामले का संज्ञान लेते हुए प्रभावी और निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के आदेश देने का भी अनुरोध किया गया है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि सूचना के अधिकार के तहत भी इस घटना से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी गई हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके।

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