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सुशीला तिवारी अस्पताल के हाल: सुबह आठ बजे आए मरीज, चार-चार घंटे बाद भी नहीं आया नंबर

Published: Sat, 04 Jul 2026 03:38 PM (GMT+05:30)

डाक्टरों के स्थानांतरण से हल्द्वानी के डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं।

डा. सुशीला तिवारी अस्पताल में डाक्टरों के स्थानांतरण से ओपीडी के बाहर परेशान रहे मरीज। जागरण

डा. सुशीला तिवारी अस्पताल में डाक्टरों के स्थानांतरण से ओपीडी के बाहर परेशान रहे मरीज। जागरण

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जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। चिकित्सा शिक्षा विभाग में डाक्टरों के स्थानांतरण से स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गई हैं। राजकीय मेडिकल कालेज हल्द्वानी के एसटीएच में शुक्रवार को मरीज ओपीडी के बाहर इंतजार करते दिखे।

सुबह आठ बजे से आए मरीजों को चार-चार घंटे इंतजार के बाद भी उपचार नहीं मिल सका। कई विभागों में जूनियर रेजीडेंट (जेआर) और सीनियर रेजीडेंट (एसआर) मरीज देखते मिले। एकमात्र न्यूरोफिजिशियन के तबादले से ओपीडी में ताला लटक गया। गैस्ट्रोएंटेरोलाजिस्ट डा. सुभाष चंद्र जोशी के जाने से एसटीएच में एंडोस्कोपी बंद हो गई है।

एसटीएच में एंडोस्कोपी बंद

डा. सुशीला तिवारी अस्पताल में शुक्रवार को दैनिक जागरण की टीम ने चिकित्सकों की कमी से मरीजों को हो रही समस्या की पड़ताल की। सबसे व्यस्त जनरल मेडिसिन की ओपीडी के बाहर आम दिनों की तरह मरीजों की भीड़ रही, लेकिन ओपीडी में मुख्य डाक्टर नहीं दिखे।

दरअसल, विभागाध्यक्ष डा. एससी जोशी के स्थानांतरण से डा. परमजीत सिंह पर यह भार आ गया है। शुक्रवार को उनका ओपीडी दिवस होने के बावजूद उन्हें वार्ड में राउंड लेने जाना पड़ा। इसके कारण सुबह आठ बजे से आए मरीजों का चार घंटे बाद भी नंबर नहीं आ पाया।

इधर, हड्डी रोग विभाग में विभागाध्यक्ष डा. पंकज सिंह का ओपीडी डे था, लेकिन रिलीव होने से यहां केवल एसआर डाक्टर ही दिखे। यहां मरीजों की भीड़ सामान्य दिनों की अपेक्षा कम रही। यहीं स्थिति बाल रोग विभाग में देखने को मिली। डा. ऋतु रखोलिया के जाने से मरीजों की संख्या कम रही। एकमात्र न्यूरोफिजिशियन डा. नितिन जोशी के स्थानांतरण से ओपीडी बंद हो गई है। यहां आए मरीज निराश होकर लौटते दिखे।

एंडोस्कोपी बंद होने से बाहर जाने को मजबूर मरीज

एसटीएच में एकमात्र गैस्ट्रोएंटेरोलाजिस्ट डा.सुभाष चंद्र जोशी का स्थानांतरण पिथौरागढ़ मेडिकल कालेज के लिए हुआ है। डा. जोशी के जाने से अस्पताल में एंडोस्कोपी सेवा ठप हो गई है। रोजाना यहां 15 से 20 मरीजों की एंडोस्कोपी होती है। यहां कार्यरत एक कर्मचारी ने बताया कि आज आठ से 10 लोगों की एंडोस्कोपी होनी थी, लेकिन डाक्टर के न होने से उन्हें लौटना पड़ा।

सुबह साढ़े आठ बजे से अस्पताल आया हूं। फिजिशियन डा. परमजीत सिंह को दिखाना है, लेकिन डाक्टर ओपीडी में नहीं है। अटेंडेंट ने बताया कि डाक्टर साहब राउंड पर गए हैं। तीन घंटे से नंबर के इंतजार में बैठा ही हूं। - विष्णु, हल्द्वानी

हाथ में कोहनी की तरफ काफी दर्द हो रहा है। न्यूरोफिजिशियन डा. नितिन जोशी को दिखाना आया हूं। यहां पता चला कि डाक्टर का स्थानांतरण हो गया है। अब किसी निजी अस्पताल के डाक्टर को दिखाना पड़ेगा। - भरत पांडे, कालाढूंगी

चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के आदेश अनुसार स्थानांतरण किए गए डाक्टरों को रिलीव किया है। कुछ विभागों में डाक्टरों की कमी से समस्या हो रही है। यह कमी पूरी करने के लिए उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी। - डा. अरुण जोशी, चिकित्सा अधीक्षक