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उत्तराखंड में हर्बल दंडिका से छुड़ाई जा रही बीड़ी-सिगरेट की लत, CTRI में दर्ज हुआ रिसर्च

Published: Sun, 06 Sep 2026 07:27 PM (IST)

ऋषिकुल राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेदिक कॉलेज, हरिद्वार ने धूम्रपान की लत छुड़ाने के लिए 15 आयुर्वेदिक औषधियों से बनी हर्बल दंडिका विकसित की है।

ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज के अंगद तंत्र विभाग की ओर से हर्बल दंडिका के बारे में दी गई जानकारी।

ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज के अंगद तंत्र विभाग की ओर से हर्बल दंडिका के बारे में दी गई जानकारी।

HighLights

  1. हरिद्वार में 15 आयुर्वेदिक औषधियों से बनी हर्बल दंडिका।

  2. धूम्रपान की मनोवैज्ञानिक तलब कम करने में सहायक।

  3. CTRI में पंजीकृत शोध, उत्साहजनक शुरुआती परिणाम।

शैलेंद्र गोदियाल, हरिद्वार। धूम्रपान की लत लग जाए तो उसे छोड़ना आसान नहीं होता, लेकिन अब इस लत को छुड़ाने के लिए ऋषिकुल राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेदिक कॉलेज हरिद्वार के अंगद तंत्र विभाग ने एक प्रयोग किया है। इसके लिए तंबाकू और निकोटीन से मुक्त ऐसी हर्बल दंडिका तैयार की गई है, जिसमें 15 आयुर्वेदिक औषधियों का मिश्रण भरा जाता है।

चिकित्सकीय निगरानी में इसके इस्तेमाल से धूम्रपान की मनोवैज्ञानिक तलब कम कर व्यक्ति को तंबाकू की लत से बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है। शुरुआती परिणाम उत्साहजनक बताए जा रहे हैं और अब तक 17 लोग धूम्रपान छोड़ने को पंजीकरण करा चुके हैं।

तंबाकू की जगह 15 आयुर्वेदिक औषधियां

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय से जुड़े विज्ञानी, आयुर्वेदाचार्य और शोधार्थियों ने प्राचीन आयुर्वेदिक सिद्धांतों के आधार पर यह हर्बल दंडिका तैयार की है। इसके लिए राजस्थान से तेंदू पत्ता मंगाकर उनमें तंबाकू व निकोटीन के बजाय शलकी, लाक्षा और मधुयष्टि (मुलेठी) सहित करीब 15 आयुर्वेदिक औषधियां भरी जाती हैं। एक हर्बल दंडिका तैयार करने में सात से आठ रुपये खर्च आ रहा है।

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फिलहाल धूम्रपान छोड़ने वाले लोगों को यह मुफ्त दी जा रही है। ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. भावना मित्तल ने बताया कि धूम्रपान छोड़ना कई लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। इसी को ध्यान में रख आयुर्वेदिक औषधियों से धूम्रपान दंडिका तैयार की गई है।

सीटीआरआई में पंजीकृत है अनुसंधान

शोधार्थी डॉ. प्रगति नेगी ने बताया कि हर्बल दंडिका ‘शमन धूम्रपान’ पर शोध के लिए तैयार की गई है। प्रयोग को वैज्ञानिक आधार देने के लिए इसे क्लिनिकल ट्रायल्स रजिस्ट्री इंडिया में पंजीकृत कराया गया है। डेढ़ महीने से ओपीडी में धूम्रपान छोड़ने के इच्छुक लोगों को चिकित्सकों की निगरानी में हर्बल स्मोक स्टिक का इस्तेमाल कराया जा रहा है। शुरुआती नतीजे काफी अच्छे रहे हैं।

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प्रगति बताती हैं कि कुछ वर्ष पहले वह पहाड़ के एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुईं। वहां अधिकांश लोग धूम्रपान कर रहे थे, जिससे अन्य लोगों को परेशानी हो रही थी। तभी उन्होंने धूम्रपान की लत छुड़ाने पर काम करने का संकल्प लिया।

40 साल की लत में आई कमी

करीब 40 वर्षों से धूम्रपान कर रहे रामकुमार बताते हैं, ‘हर्बल दंडिका के इस्तेमाल से मेरी धूम्रपान की लत कम हुई है। पहले मैं 16 से 20 बीड़ी रोजाना पीता था, लेकिन एक सप्ताह में प्रतिदिन चार से पांच बीड़ी पर आ गया। उम्मीद है कि जल्द तंबाकू की लत से पूरी तरह छुटकारा पा लूंगा।’

काउंसलिंग भी है महत्वपूर्ण

धूम्रपान छोड़ने के इच्छुक व्यक्ति को कॉलेज की ओपीडी में 10 रुपये की पर्ची कटवानी होती है। इसके बाद चिकित्सक काउंसलिंग करते हैं। परिवार की स्थिति, उम्र, धूम्रपान की अवधि, ब्रीथ टेस्ट, वजन, रक्तचाप, शुगर व अन्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां जुटाई जाती हैं। जांच के बाद चिकित्सक ही हर्बल दंडिका के इस्तेमाल की सलाह देते हैं। पूरी प्रक्रिया चिकित्सकीय निगरानी में होती है।

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