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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 26, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Shardiya Navratri 2022: भक्तों की इच्छा पूर्ण करती है मां मनसा देवी, यहां वृक्ष पर डोरी बांधने की है परंपरा

    By JagranEdited By: Sunil Negi
    Updated: Mon, 26 Sep 2022 07:50 PM (IST)

    Shardiya Navratri 2022 उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र मां मनसा देवी मंदिर स्थित है। यहां मंदिर में मां की दो मू ...और पढ़ें

    Shardiya Navratri 2022 उत्तराखंड के हरिद्वार शहर में शिवालिक पर्वत श्रृंखला के मुखशिखर पर स्थित मां मनसा देवी मंदिर।
    Shardiya Navratri 2022 उत्तराखंड के हरिद्वार शहर में शिवालिक पर्वत श्रृंखला के मुखशिखर पर स्थित मां मनसा देवी मंदिर।

    जागरण संवाददाता, हरिद्वार : Shardiya Navratri 2022 उत्तराखंड के हरिद्वार शहर में शिवालिक पर्वत श्रृंखला के मुखशिखर पर स्थित मां मनसा देवी मंदिर (Mansa Devi Temple) करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मनसा का शाब्दिक अर्थ है ‘इच्छा पूर्ण करने वाली’। वर्षभर देवी के दर्शन के लिए मंदिर में भीड़ जुटी रहती है।

    स्नोही वृक्ष पर डोरी बांधने की भी परंपरा

    नवरात्र (Shardiya Navratri ) में मंदिर की रौनक देखते ही बनती है। परिसर में मौजूद स्नोही वृक्ष पर डोरी बांधने की भी परंपरा चली आ रही है। जो व्यक्ति माता के मंदिर में आता है, वह अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए मंदिर परिसर स्थित पेड़ की शाखाओं में धागा बांधता है। एक बार जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है तो लोग पेड़ से धागा खोलने के लिए दोबारा इस मंदिर में आते हैं।

    वर्ष 1811 से 1815 के बीच हुआ था मंदिर का निर्माण

    मनसा देवी मंदिर (Mansa Devi Temple) का निर्माण राजा गोला सिंह ने वर्ष 1811 से 1815 के बीच किया था। यह मंदिर उन चार स्थानों में से एक है, जहां समुद्र मंथन के बाद निकली अमृत की कुछ बूंदें गिरी थी। बाद में इस स्थान पर माता के मंदिर का निर्माण किया गया था।

    • मंदिर में मां की दो मूर्तियां स्थापित की गई हैं। एक प्रतिमा में उनके तीन मुख और पांच भुजाएं हैं। दूसरी प्रतिमा में आठ भुजाएं हैं। मां कमल और सर्प पर विराजित हैं।

    धार्मिक महत्व

    • मंदिर का उल्लेख स्कंदपुराण में भी आता है। इसमें मनसा देवी (Mansa Devi Temple) को 10वीं देवी माना गया है। मान्यता है कि एक बार जब महिषासुर नामक राक्षस ने देवताओं को पराजित कर दिया। इसके बाद देवताओं ने देवी का स्मरण किया। देवी ने प्रकट होकर महिषासुर का वध कर दिया।
    • इस पर देवताओं ने देवी की पूजा-अर्चना की और देवी से कहा कि, हे देवी जिस प्रकार आपने हमारी मनसा को पूरा किया, इसी प्रकार कलियुग में भी भक्तों की मनसा को पूरा करें।
    • मान्यता है कि इस पर देवी ने हरिद्वार के शिवालिक मालाओं के मुख्य शिखर के पास विश्राम किया और इसी कारण यहां मनसा देवी मंदिर की स्थापना हुई।
    • मान्यता है कि इसी जगह पर मनसा देवी की मूर्ति प्रतिष्ठित हुई। कालांतर में यहां मंदिर बनाया गया और मंदिर में आज भी मां मनसा देवी की मूर्ति विराजमान है।

    इस तरह पहुंचें मंदिर तक

    हरिद्वार शहर के अपर रोड के समीप स्थित मां मनसा देवी मंदिर ((How to reach Mansa Devi Temple)) हवाई, रेल और सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है।

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    • हवाई मार्ग : जौलीग्रांट हवाई अड्डे से टैक्सी या बस के माध्यम से यहां पहुंच सकते हैं। हवाई अड्डे से मंदिर की दूरी करीब 41 किमी है।
    • रेल मार्ग : रेलमार्ग से आने वाले श्रद्धालु हरिद्वार रेलवे स्टेशन से रिक्शा, तांगा, आटो, टैक्सी आदि से यहां पहुंच सकते हैं। रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी करीब तीन किमी है।
    • सड़क मार्ग : सड़क मार्ग से पहुंचने के लिए किसी भी शहर से परिवहन निगम की बस, टैक्सी या खुद के वाहन से पहुंचा जा सकता है। मां के दरबार तक सीढ़ियों के अलावा उड़न खटोले से भी पहुंच सकते हैं।

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    नवरात्र में रहती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़

    श्रीमहंत रविंद्र पुरी (अध्यक्ष, अखाड़ा परिषद (निरंजनी) एवं मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट, हरिद्वार) ने बताया कि शारदीय नवरात्र को लेकर मंदिर को फूलों से सजाया गया है। माता के भक्त वर्षभर देवी के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचते हैं। लेकिन, नवरात्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है।

    मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा को विशेष इंतजाम किए गए हैं। मां मनसा इच्छा पूर्ण करने वाली देवी है। जो भी भक्त सच्चे मन से मां के दरबार में आता है मां उसकी समस्त इच्छा पूरी करती हैं।

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