देहरादून में मूसलधार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, तापमान में भारी गिरावट
उत्तराखंड में मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के कारण देहरादून में 28 घंटे से अधिक समय तक लगातार भारी वर्षा हुई। इससे सड़कें जलमग्न हो गईं और तापमान में 10 डिग् ...और पढ़ें

देहरादून में बारिश के बीच छाता लेकर जाती महिलाएं।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, देहरादून। मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तराखंड में भारी वर्षा का दौर जारी है। देहरादून में करीब 28 घंटे तक लगातार हुई वर्षा के कारण जहां सड़कें जलमग्न हो गईं, वहीं पारे में भी भारी गिरावट दर्ज की गई।
दून का अधिकतम तापमान सामान्य से 10 डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच गया है। आज भी दून में आंशिक बादल छाये रहने और कहीं-कहीं हल्की वर्षा के असार हैं।
बीते गुरुवार दोपहर बाद से दून समेत आसपास के क्षेत्रों में बादलों का डेरा है और ज्यादातर इलाकों में हल्की से मध्यम बौछारें पड़ती रहीं। देर रात बारिश रिमझिम फुहारों में बदल गईं और शुक्रवार को दिनभर दून में वर्षा दर्ज की गई।
करीब डेढ़ दिन में दून में 30 मिमी से अधिक वर्षा हुई, जिससे नालियां ओवरफ्लो हो गईं और रिस्पना-बिंदाल समेत तमाम नदी-नालों का जल स्तर बढ़ गया। गली-मोहल्लों की सड़कें खस्ताहाल हो गईं और निर्माण कार्यों के चलते गलियों में कीचड़ पसर गया।
दूसरी ओर बारिश के कारण शुक्रवार को दून का तापमान सामान्य से काफी नीचे पहुंच गया। यहां तक कि अधिकतम और न्यूनतम तापमान लगभग बराबर हो गए।
मसूरी में भी दिनभर भारी बारिश हुई और 24 घंटे के भीतर 32 डिग्री सेल्सियस से अधिक वर्षा रिकार्ड की गई। जिससे पूरे क्षेत्र में कड़ाके की ठंड लौट आई और लोग घरों में दुबक गए। आज भी पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की वर्षा हो सकती है।
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तीन वर्ष बाद मार्च के दूसरे पखवाड़े में सर्वाधिक वर्षा
मार्च के दूसरे पखवाड़े में तीन वर्ष बाद एक ही दिन में सर्वाधिक वर्षा हुई है। देहरादून में देर रात तक 24 घंटे में 20 मिमी से अधिक वर्षा रिकार्ड की गई।
इससे पहले वर्ष 2023 में मार्च के दूसरे पखवाड़े में 18 तारीख को ही 25 मिमी वर्षा हुई थी। इसके अलावा अधिक वर्षा पहले पखवाड़े में ही रिकार्ड की जाती रही है। अधिकतम तापमान में भी वर्ष 2020 के बाद सर्वाधिक कमी रिकार्ड की गई है।
खेती-बागवानी पर पड़ सकती है मौसम की मार
उत्तराखंड में मार्च के तीसरे सप्ताह में हो रही लगातार बारिश, ओलावृष्टि और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी का रबी फसलों और बागवानी पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
ओलावृष्टि और तेज हवा से गेहूं, सरसों जैसी फसलें गिरने की आशंका है, जिससे उत्पादन घट सकता है।
अधिक बारिश से खेतों में जलभराव होकर जड़ों को नुकसान पहुंचने का भी खतरा है। कटाई के करीब पहुंच चुकी फसलों में दाना काला पड़ना या अंकुरण शुरू होने की भी शिकायत आ रही है। सरसों में फली टूटने का खतरा बढ़ गया है।
बागवानी को आंशिक लाभ
सेब, नाशपाती जैसे समशीतोष्ण फलों के लिए ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुई बर्फबारी चिलिंग आवर्स को पूरा करने में मदद करती है।
इससे फलदार पेड़ों में बेहतर फूल और फल सेटिंग की संभावना बढ़ती है। हालांकि, ओलावृष्टि से आम, लीची, आड़ू, प्लम आदि में फूल और छोटे फल गिर सकते हैं।
तेज बारिश और हवा से फूल झड़ना बढ़ जाता है। वहीं, अधिक नमी से फंगल रोग फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
- शहर, अधिकतम, न्यूनतम
- देहरादून, 17.4, 16.9
- ऊधमसिंह नगर, 22.0, 15.7
- मुक्तेश्वर, 6.9, 4.8
- नई टिहरी, 8.4, 5.2