उत्तराखंड के बर्फ से ढके क्षेत्रों में जनगणना का पहला चरण पूरा, शत प्रतिशत कवरेज
उत्तराखंड के दुर्गम और हिमाच्छादित क्षेत्रों में जनगणना का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है, जिसमें 100% कवरेज हासिल ...और पढ़ें

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समय कम है?
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राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। उत्तराखंड के दुर्गम और हिमाच्छादित क्षेत्रों में जनगणना के तहत घर-घर जाकर आंकड़े जुटाने का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ के 131 हिमाच्छादित गांवों के साथ ही बदरीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री के तीन शहरी स्थानीय निकायों में निर्धारित सभी प्रगणना क्षेत्रों में शत प्रतिशत कार्य पूरा किया गया।
अब एक से पांच अक्टूबर तक पुनरीक्षण चरण चलाया जाएगा, जिसमें जुटाए गए आंकड़ों की दोबारा जांच कर आवश्यक संशोधन और सुधार किए जाएंगे। यद्यपि, शुरुआती आकलन से यह माना जा रहा है कि हिमाच्छादित क्षेत्रों में अनुमानित जनसंख्या से कम व्यक्ति रह रहे हैं।
उत्तराखंड में जनगणना-2027 के पहले चरण में हिमाच्छादित क्षेत्रों में जनगणना का कार्य शुरू किया गया। 17 सितंबर से स्वगणना का कार्य शुरू हुआ। नागरिकों ने स्व-गणना प्रक्रिया में भी उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
लोगों ने स्वयं अपनी जानकारी उपलब्ध कराने के साथ ही घरों तक पहुंचे अधिकृत प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को आवश्यक जानकारी देने में सहयोग किया। इस विशेष अभियान के लिए 139 प्रगणक और 43 पर्यवेक्षक समेत कुल 182 प्रशिक्षित कार्मिकों को तैनात किया गया था।
इन कार्मिकों ने दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, कठिन मार्गों और प्रतिकूल मौसम के बीच घर-घर पहुंचकर जनगणना संबंधी आंकड़े एकत्र किए। विशेष रूप से 31 ब्लाकों में शामिल स्पेशल चार्ज में भी जनगणना कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
निदेशक जनगणना ईवा आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि राज्य सरकार, जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों के सहयोग से दुर्गम क्षेत्रों में अभियान को समयबद्ध तरीके से पूरा किया गया। उन्होंने जनगणना कार्य में सहयोग करने वाले नागरिकों, प्रशासनिक अधिकारियों, स्थानीय निकायों, प्रगणकों और पर्यवेक्षकों के प्रति आभार जताया।
एक ब्लाक का नजर नहीं आ रहा डाटा
हिमाच्छादित क्षेत्रों में अभी कितने व्यक्ति रह रहे हैं इसका पूरा डाटा सामने नहीं आया है। इसका कारण उत्तरकाशी के एक क्षेत्र में प्रगणक द्वारा 19 व्यक्तियों का भरा गया डाटा नजर नहीं आ रहा है। निदेशालय ने इसकी सूचना भारत सरकार को दे दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द यह परेशानी दूर हो जाएगी।
