विजिलेंस से आरटीआई में क्या मांग सकते हैं? सूचना आयोग ने खींची लक्ष्मण रेखा
उत्तराखंड राज्य सूचना आयोग ने विजिलेंस से आरटीआई के तहत मांगी जा सकने वाली सूचनाओं की सीमा स्पष्ट की है। ...और पढ़ें

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, देहरादून। उत्तराखंड राज्य सूचना आयोग ने सूचना के अधिकार (आरटीआइ) के तहत सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) से मांगी जा सकने वाली सूचनाओं की सीमा स्पष्ट कर दी है।
आयोग ने कहा कि विजिलेंस धारा 24 के तहत अधिसूचित आसूचना (इंटेलिजेंस) संगठन है, इसलिए उसकी सभी सूचनाएं सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं। हालांकि, यदि मामला भ्रष्टाचार या मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ा हो तो ऐसी सूचनाओं पर धारा 24 की पूर्ण छूट लागू नहीं होगी।
धारा 24 का संरक्षण लागू रहेगा
राज्य सूचना आयुक्त कुशाल नन्द ने यह फैसला ऊधमसिंह नगर निवासी मंसूर आलम की द्वितीय अपील पर सुनाया। अपीलकर्ता ने विजिलेंस को भेजी गई अपनी शिकायत के संबंध में सात बिंदुओं पर सूचना मांगी थी।
इसमें शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि, डायरी या रजिस्टर संख्या, शिकायत किस अधिकारी को भेजी गई, उस पर क्या कार्रवाई हुई, जांच स्वीकृत हुई या नहीं, कार्रवाई की समय-सीमा तथा यदि शिकायत किसी अन्य विभाग को भेजी गई हो तो उसका विवरण मांगा गया था।
लोक सूचना अधिकारी ने सूचना देने से इन्कार करते हुए कहा कि उत्तराखंड शासन की अधिसूचना के तहत सतर्कता अधिष्ठान को सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 24 के अंतर्गत आसूचना संगठन घोषित किया गया है। इसलिए मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। प्रथम अपीलीय अधिकारी ने भी इसी निर्णय को सही माना।,
खबरें और भी
द्वितीय अपील की सुनवाई में अपीलकर्ता ने दलील दी कि उसने किसी गुप्त जांच, राष्ट्रीय सुरक्षा या संवेदनशील खुफिया जानकारी की मांग नहीं की, बल्कि अपनी शिकायत की प्रशासनिक प्रगति से जुड़ी सूचना चाही है।
आयोग ने इस तर्क पर विचार किया, लेकिन अपने आदेश में स्पष्ट किया कि धारा 24 के तहत अधिसूचित संगठन होने के कारण विजिलेंस को मिली वैधानिक छूट समाप्त नहीं की जा सकती। साथ ही आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिनियम में भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन से संबंधित सूचनाओं को छोड़कर अन्य मामलों में धारा 24 का संरक्षण लागू रहेगा।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि यदि किसी सूचना का संबंध आसूचना संगठन के किसी अधिकारी या कर्मचारी के भ्रष्टाचार अथवा मानवाधिकार उल्लंघन से है, तो उसे धारा 24(4) के तहत सार्वजनिक किया जा सकता है, लेकिन इससे यह नहीं माना जा सकता कि आसूचना संगठन से जुड़ी हर प्रकार की सूचना सार्वजनिक करने का अधिकार मिल गया है। इसी आधार पर आयोग ने लोक सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी के निर्णय में हस्तक्षेप से इन्कार करते हुए द्वितीय अपील का निस्तारण कर दिया।