सात मोड़ प्रकरण: पेड़ों की कटाई पर अवमानना से डरा शासन, कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप
उत्तराखंड में ऋषिकेश-भानियावाला सड़क परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई का मामला अब न्यायालय की अवमानना तक पहुंच गया है।


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जागरण संवाददाता, देहरादून। ऋषिकेश से भानियावाला के बीच प्रस्तावित सड़क परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई का मामला अब सीधे न्यायालय की अवमानना तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। यह तलवार प्रमुख सचिव वन और वन विकास निगम पर लटक रही है।
इस स्थिति को देखते हुए शासन (वन विभाग) ने वन मुख्यालय/प्रमुख वन संरक्षक (हाफ) को पत्र लिखकर कानूनी बाध्यता और कार्यवाही से अवगत कराया है। साथ ही कोर्ट के आदेश के बाद भी पेड़ों पर आरी चलाने के मामले में अधीनस्थों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। इसका आशय यह हुआ कि आदेश के विपरीत पेड़ों का कटान न कराया जाए।
याचिकाकर्ता के नोटिस के बाद मची खलबली
इस मामले में याचिकाकर्ता रेणु पाल की ओर से अधिवक्ता अभिजय नेगी ने उत्तराखंड के वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव को कानूनी नोटिस भेजकर पेड़ों की मार्किंग और कुछ हिस्सों में कटाई किए जाने का आरोप लगाया है। नोटिस में इसे हाईकोर्ट के 9 जनवरी 2026 के अंतिम आदेश और सुप्रीम कोर्ट के संबंधित निर्णय की अवहेलना बताया गया है।
मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि जिस क्षेत्र में पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है, वह हाथियों के दो महत्वपूर्ण कारिडोर (कांसरो-बड़कोट और तीन पानी कारिडोर) से जुड़ा बताया गया है। अधिवक्ता के मुताबिक इसी को लेकर रेणु पाल ने उत्तराखंड में हाथी कारिडोर के संरक्षण के लिए जनहित याचिका दायर की थी। नोटिस में कहा गया है कि ऋषिकेश-भानियावाला के बीच हजारों पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव सामने आने पर हाईकोर्ट ने पहली ही सुनवाई में 12 मार्च 2025 को रोक (स्टे) लगा दी थी।
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फिर हाई कोर्ट बंद कर दिया था प्रकरण
नोटिस में हाईकोर्ट के 9 जनवरी 2026 के अंतिम आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि अदालत ने हाथी कारिडोर से संबंधित मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट के हास्पिटेलिटी एसोसिएशन आफ मुदुमलाई बनाम इन डिफेंस आफ एनवायरमेंट एंड एनिमल्स मामले में पहले ही तय माना था। हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि वह सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय कानूनी स्थिति से बंधा है।
वहीं, वन क्षेत्र/ग्रीन कवर को नष्ट किए जाने से जुड़ा मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में अनिता कंडवाल बनाम उत्तराखंड राज्य में विचाराधीन होने का उल्लेख करते हुए हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई से जुड़े अन्य मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की प्रतीक्षा करना उचित माना। अदालत ने याचिका बंद करते हुए याचिकाकर्ता को लंबित कार्यवाही में इस मुद्दे के क्रियान्वयन की मांग करने की स्वतंत्रता दी थी।
सुप्रीम कोर्ट में भी मामला लंबित
नोटिस के मुताबिक हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इम्प्लीमेंटेशन एप्लीकेशन दाखिल की गई। नोटिस में कहा गया है कि यह आवेदन अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। ऐसे में आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित रहने के दौरान पेड़ों की कटाई की कार्रवाई शुरू करना न्यायिक आदेशों की गंभीर अनदेखी हो सकती है। इसके लिए सीधे तौर पर प्रमुख सचिव वन और वन विकास निगम जिम्मेदार होंगे।
