उत्तराखंड कैबिनेट के बड़े फैसले: अल्पसंख्यक आयोग कार्यकाल घटा, पूर्व सैनिकों को एक बार आरक्षण
उत्तराखंड कैबिनेट ने अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों का कार्यकाल पांच से घटाकर तीन वर्ष कर दिया है। पूर्व सैनिकों को सरकारी सेवाओं में अब केवल एक ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी. File Photo

समय कम है?
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राज्य ब्यूरो, देहरादून। अल्पसंख्यक आयोग में अब अध्यक्ष समेत सभी सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। अभी तक यह कार्यकाल पांच साल का था। कैबिनेट ने आयोग में अधिक से अधिक व्यक्तियों को मौका देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है।
सचिवालय में शुक्रवार को मुख्यमंत्री धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने आयोग की अध्यक्ष व सदस्यों के कार्यकाल में संशोधन संबंधी प्रस्ताव पेश किया।
आयोग में अभी एक अध्यक्ष, दो उपाध्यक्ष व पांच सदस्य हैं। सभी का कार्यकाल पांच वर्ष का है। आयोग में मुस्लिम, जैन, ईसाई, बौद्ध, पारसी एवं सिख धर्म व समुदायों का प्रतिनिधित्व होता है।
ऐसे में सभी धर्मों व समुदाय के व्यक्तियों को अधिक मौका देने के लिए कार्यकाल की सीमा कम करनी प्रस्तावित की गई है। यह संशोधन अब उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) अधिनियम के रूप में सदन में प्रस्तुत किया जाएगा।
पूर्व सैनिकों को अब एक बार ही मिलेगा आरक्षण
प्रदेश में पूर्व सैनिकों को अब सरकारी सेवाओं में एक बार ही आरक्षण दिया जाएगा। यह व्यवस्था पहले ही वर्ष 2022 में कार्मिक विभाग के शासनादेश के जरिये की जा चुकी है।
कुछ समय पहले हाईकोर्ट ने इसे कानूनी जामा पहनाने के निर्देश दिए थे। इस क्रम में अब कार्मिक विभाग इस शासनादेश के बिंदू को उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश लोक सेवा, शारीरिक रूप से विकलांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों और पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण अधिनियम में संशोधन को विधेयक के रूप में कैबिनेट के समक्ष लाया। कैबिनेट ने इस सदन में रखने को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
बनेंगे तीन निजी विश्वविद्यालय
प्रदेश में तीन नए निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएंगे। इनमें नैनीताल में माउंट वैली विश्वविद्यालय, देहरादून में तुलाज विश्वविद्यालय एवं शिवालिक विश्वविद्यालय शामिल हैं। इसके लिए कैबिनेट ने निजी विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
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भाषा संस्थान के दायरे में आएगी नेपाली अकादमी
अब नेपाली अकादमी भी भाषा संस्थान के दायरे में आएगी। इसके लिए उत्तराखंड भाषा संस्थान के अधिनियम में संशोधन किया जाएगा। भाषा विभाग ने इसे लिए भाषा संस्था संशोधन विधेयक, कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया। जिसे कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान कर दी है।