यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 09, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पंकज की हत्या से फिर खुले दस साल पुरानी गैंगवार के पन्ने Dehradun News
दून के चर्चित बब्बल और नरेश राव हत्याकांड में आरोपित हिस्ट्रीशीटर पंकज कुमार की यूपी के खतौली में हुई हत्या ने एक मर्तबा फिर गैंगवार के पन्ने पलट दिए हैं।

देहरादून, जेएनएन। दून के चर्चित बब्बल और नरेश राव हत्याकांड में आरोपित हिस्ट्रीशीटर पंकज कुमार की यूपी के खतौली में हुई हत्या ने एक मर्तबा फिर गैंगवार के पन्ने पलट दिए हैं। मार्च-2010 में मुनीर अहमद उर्फ बब्बल के हत्याकांड में आरोपित रहे पंकज पर जनवरी-2011 में बब्बल हत्याकांड के मुख्य गवाह नरेश रॉव की हत्या में शामिल होने के भी आरोप थे। पंकज आजकल जमानत पर था और प्रापर्टी डीलिंग का काम कर रहा था।
शुक्रवार की शाम तक वह दोस्तों के साथ दून में ही घूम रहा था। ऐसे में रात को घरवालों को बताए बिना उसका दोस्तों के साथ कार में बैठकर निकल जाना और फिर गोलियों से भूनी हुई लाश खतौली में मिलना, कई पहलुओं की ओर इशारा कर रहा है। पंकज हत्याकांड में दून के कुख्यात जितेंद्र रावत उर्फ जित्ती का नाम भी चर्चा में है, जो इन दिनों चमोली में जिला कारागार में बंद है।
2010-11 में बब्बल, जित्ती और पंकज के बीच शुरू हुई ये गैंगवार भले इतने साल थमी रही, लेकिन पंकज की हत्या से इनकी दुश्मनी की किताब फिर खुल गई है। पंकज हत्याकांड में पुलिस भी दस साल पीछे की फाइलें टटोल रहीं। दरअसल, एक जमाने में जिगरी दोस्त रहे बब्बल, जित्ती और पंकज के बीच दुश्मनी की खटास जनवरी-2010 में नत्थनपुर के पास एक जमीन के सौदे को लेकर पड़ी।
तीनों ही दबंग और हिस्ट्रीशीटर थे। प्रापर्टी डीलिंग के इस खेल में जित्ती व पंकज ने बब्बल को मात देने की ठानी और इसी बीच छह मार्च-2010 को बब्बल की घर के बाहर गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। गैंगवार के कारण हुए हत्याकांड में पुलिस ने मुख्य आरोपित जित्ती समेत कुल सात आरोपी दबोचे थे।
पुलिस का दावा था कि जित्ती ने दिल्ली के शूटरों को सुपारी दी थी। जित्ती तभी से जेल में है। हत्याकांड में यूपी व दिल्ली के चार शार्प शूटर प्रकाश में आए थे। हत्याकांड में पंकज और जित्ती के ड्राइवर जयदीप को भी गिरफ्तार किया गया था। कुछ ही माह बाद पंकज और जयदीप जमानत पर छूट गए, लेकिन पुलिस को यह अंदाजा ही नहीं था कि जेल से नई साजिश रची जा चुकी थी।
यह साजिश 30 जनवरी 2011 की मध्य रात्रि हरिद्वार बाइपास पर हुए नरेश रॉव की हत्या के रूप में सामने आई। नरेश, बब्बल का सहयोगी था और उसकी हत्या में मुख्य गवाह भी था। जांच में पता चला कि घटना के वक्त गोली चलाने वाले दो बदमाश नरेश के साथ कार में थे। इस दौरान कार पलटने से बदमाश भी जख्मी हो गए थे और थोड़ी ही देर बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया था।
गिरफ्तार आरोपियों में बब्बल की हत्या में नामजद जमानत पर छूटा आरोपित जयदीप शामिल था। हत्याकांड की साजिश में पंकज भी पकड़ा गया। तब यह खुलासा हुआ था कि नरेश रॉव की हत्या जेल से ही रची साजिश के तहत हुई थी। इसमें पुलिस ने जित्ती को भी आरोपित बनाया था। इसमें भी कुछ माह बाद पंकज जमानत पर बाहर आ गया था। बब्बल की हत्या व जित्ती के जेल में होने से प्रापर्टी डीलिंग के इस खेल में अब पंकज का ही 'राज' चल रहा था।
पंकज की हत्या के पीछे पुरानी गैंगवार ही असल जड़ मानी जा रही। पुलिस सूत्रों की मानें तो पिछले दस साल से जेल में रह रहा जित्ती भी हत्याकांड की साजिश में शामिल हो सकता है। जैसे उसने जेल से ही नरेश रॉव की हत्या ऑपरेट की थी, वैसे ही कहीं पंकज के लिए भी तो साजिश नहीं रची गई, पुलिस इसकी पड़ताल कर रही।
जांच में ये भी मालूम चला है कि पंकज का प्रापर्टी को लेकर कुछ अन्य लोगों से भी विवाद चल रहा था। पंकज शुक्रवार की शाम तक कुछ दोस्तों के साथ घूम रहा था। स्थानीय लोगों ने उसे दोस्तों के साथ देखा था। इसके बाद उसने छह नंबर पुलिया के समीप एटीएम से पैसे भी निकाले और कार में दोस्तों के साथ कहीं निकल गया।
पुलिस बब्बल और नरेश रॉव हत्याकांड में शामिल जयदीप का सुराग भी लगा रही है। उसके दिल्ली के नजफगढ़ में रहने की सूचना मिली है। इधर, शनिवार को दून की नेहरू कालोनी पुलिस ने पंकज के घर पहुंचकर पूछताछ भी की। डीआइजी अरुण मोहन जोशी ने बताया कि पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है। खतौली पुलिस से जो इनपुट मिले हैं उन पर काम चल रहा है।
वारदात की जगह पर भी सवाल
पंकज की हत्या कहां हुई, इस पर संदेह कायम है। जिस गाड़ी में उसकी लाश मिली क्या उसी गाड़ी में वह देहरादून से गया था या नहीं। पुलिस इसका भी जवाब ढूंढ रही। अचानक से उसका बिना बताए घर से चले जाना और सहारनपुर नंबर की गाड़ी में सीधे उसकी लाश मिलना, कई सवालों पर इशारा कर रहा। उसे खतौली बुलाया गया या फिर कहीं और मारकर लाश वहां छोड़ी गई, यह भी अभी तक साफ नहीं हुआ है।
सुधरना चाहता था पंकज
पंकज की हत्या की सूचना के बाद से ही उसके घर के आसपास के लोगों में चर्चाएं शुरू हो गईं। इस दौरान उसके घर में पहुंचे लोग पंकज के इतिहास व वर्तमान के बारे में बात करते दिखे। कुछ लोग कहते दिखाई दिए कि भले ही पंकज पहले दबंग रहा हो, लेकिन वह अब सुधरना चाहता था। उसने घरवालों को शुक्रवार को यह भी बताया था कि अब वह सुधर गया है। उसने सारे गलत काम छोड़ दिए हैं। घरवाले इसे लेकर कुछ सुकून में थे कि अचानक कुछ घंटे बाद ही उन्हें पंकज की हत्या की खबर मिल गई।
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सदमे में है परिवार
पंकज की हत्या से उसके घरवालों का बुरा हाल है। अपर नत्थनपुर में उनकी पत्नी और दो बेटे रहते हैं। पंकज अपने मकान में निर्माण कार्य भी करा रहा था व रविवार को उसका लिंटर पडऩा था। उसकी पत्नी बेसुध नजर आईं, जबकि बेटे मां को संभालते में लगे रहे। वहीं, सूचना के बाद उसके पिता खतौली के लिए निकल गए।
