विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 11, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पदोन्नति में आरक्षण पर कांग्रेस का नया सियासी पैंतरा

By Sunil NegiEdited By:
Updated: Tue, 11 Feb 2020 07:25 AM (IST)

उत्तराखंड में जिस कांग्रेस की सरकार ने कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था समाप्त करने का फैसला लिया वही कांग्रेस अपना स्टैंड बदल कर इसके पक्ष में खड़ी नजर आ रही है।

पदोन्नति में आरक्षण पर कांग्रेस का नया सियासी पैंतरा
पदोन्नति में आरक्षण पर कांग्रेस का नया सियासी पैंतरा

देहरादून, राज्य ब्यूरो। लगभग आठ साल पहले उत्तराखंड में जिस कांग्रेस की सरकार ने कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था समाप्त करने का फैसला लिया, अब वही कांग्रेस अपना स्टैंड बदल कर इसके पक्ष में खड़ी नजर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद सोमवार को संसद में कांग्रेस ने जिस तरह इस मसले पर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की, उससे साफ है कि पार्टी का मकसद आरक्षण के नाम पर सियासत को नया रंग देने का है।

पदोन्नति में आरक्षण को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की भाजपानीत एनडीए सरकार को निशाने पर तो ले लिया लेकिन शायद पार्टी नेतृत्व इस बात को भूल गया कि पदोन्नति में आरक्षण खत्म करने का फैसला उसी का था। दरअसल, वर्ष 2012 में प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश पर पदोन्नति में आरक्षण खत्म करने का आदेश जारी किया था। पदोन्नति में आरक्षण के खिलाफ प्रदेश के कर्मचारी नैनीताल हाईकोर्ट गए थे। हाईकोर्ट ने 10 जुलाई, 2012 को पदोन्नति में आरक्षण खत्म करने का आदेश दिया। साथ में यह भी कहा कि भविष्य में इस आधार पर प्रदेश में पदोन्नति नहीं की जाएगी। इसके बाद सरकार ने पांच सितंबर 2012 को इस संबंध में आदेश जारी किया। 

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड के सीएम रावत बोले, लगता है फिर नशा कर संसद गए थे राहुल गांधी

प्रदेश सरकार नैनीताल हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की शरण में पहुंची। सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति को मूल अधिकार नहीं मानने के साथ नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया। इससे पदोन्नति में आरक्षण खत्म करने का पांच सितंबर 2012 के शासनादेश के लागू होने का रास्ता साफ हो गया। गौरतलब है कि प्रदेश में जब यह आदेश कांग्रेस सरकार ने जारी किया था, उस वक्त मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा थे। अब जबकि इन दिनों कांग्रेस खासी कमजोर स्थिति में नजर आ रही है, उसने इस मामले में नया पैंतरा चलकर केंद्र सरकार पर हमला बोलने की रणनीति को अंजाम दिया। 

यह भी पढ़ें: संघर्षकारी ताकतों को एक मंच पर लाएगा उत्तराखंड क्रांति दल Dehradun News