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    देहरादून के लेखक गांव में विरासत कला उत्सव का शानदार आगाज, कवियों ने बिखेरे साहित्यिक रंग

    Updated: Fri, 13 Mar 2026 09:43 PM (IST)

    देहरादून के डोईवाला स्थित लेखक गांव में सात दिवसीय विरासत कला उत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। ...और पढ़ें

    विरासत कला उत्सव में हुए कवि सम्मेलन में देशभक्ति कविता की प्रस्तुति देती डा. ऋतू सिंह जागरण

    विरासत कला उत्सव में हुए कवि सम्मेलन में देशभक्ति कविता की प्रस्तुति देती डा. ऋतू सिंह जागरण 

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    संवाद सहयोगी, डोईवाला (देहरादून)। लेखक गांव में विरासत कला उत्सव का शुभारंभ हो गया है। इस उत्सव के दौरान देशभर से आए कवियों की प्रस्तुतियों ने साहित्य और संवेदना का एक अद्भुत माहौल तैयार किया।

    यह उत्सव सात दिनों तक चलेगा, जिसका उद्घाटन मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया।

    जिसमें पारिस्थितिकी पर्यटन परिषद के उपाध्यक्ष ओमप्रकाश जमदग्नि, संस्कृत निष्पादन केंद्र विभाग के निदेशक गणेश खुगशाल, पर्यटन विभाग के कार्यक्रम अधिकारी डा. सर्वेश उनियाल, हेमवंती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के केंद्र निर्देशक सुदेश शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप जलाया।

    यह विरासत कला उत्सव उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं लेखक गांव के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

    पहले दिन कवि सम्मेलन की शुरुआत पौड़ी जनपद से आईं डा. ऋतु सिंह ने अपनी कविता से की, जिसमें उन्होंने कहा कि "अपनी आंखों में ख्वाबों की बारात है, सरहदों पर सिपाही जो तैनात है..."।

    दिल्ली से आए कवि डा. रसिक गुप्ता ने अपनी रचना में कहा कि "पथ प्रदर्शक बनी युगों से, है कलम की धार ही, सार्थक हो जिंदगी बेशक जिए दिन चार ही..."।

    उत्तर प्रदेश से आए डा. अर्जुन सिसोदिया ने समसामयिक व्यंग्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि "चिंगारी जहां-जहां दिखे, ले जाकर आंधी रखते हो..."।

    मध्य प्रदेश से आए राकेश दांगी ने अपनी रचना में कहा कि "संपूर्ण विश्व के सहायक आए हैं, सृष्टि के प्रथम गायक आए हैं..."।

    दिल्ली की सरला मिश्रा ने नारी शक्ति पर अपनी भावपूर्ण रचना प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने कहा कि "दो कुलतारी है, सृष्टि का आधार जगत में, होती नारी है"।

    इसके बाद देहरादून से आए श्रीकांतश्री ने अपनी हास्य-व्यंग्य रचना भले ही दीप से पूजा तू आठों याम मत करना, ले कोई मोहल्ले में तो राधेश्याम मत करना सुनाकर श्रोताओं से खूब तालियां बटोरी।

    वहीं, हरियाणा के कवि राजेश चेतन ने कहा कि ये मंदिर नहीं जागरण देश का है, ये मंदिर नहीं व्याकरण देश का है... सुनाकर तालियां बटोरी।

    कार्यक्रम का संचालन शिवम ढौंडियाल ने किया। इस अवसर पर केंद्र के प्रतिनिधि राजकुमार स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के सचिव बालकृष्ण चमोली, डा. प्रदीप कोठियाल आदि मौजूद रहे।

    शनिवार को शास्त्रीय गायन की होगी प्रस्तुति

    लेखक गांव में विरासत कला उत्सव में आज दूसरे दिन शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति होगी। जिसमें शास्त्रीय गायन डा. अवधेश प्रताप सिंह तोमर व वादन में प्रो. लवली शर्मा की प्रस्तुति होगी।