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    केदारनाथ धाम में VIP मेहमानों पर खर्च की जांच शुरू, BKTC ने बनाई 4 सदस्यीय समिति

    Updated: Thu, 28 May 2026 05:30 PM (IST)

    केदारनाथ धाम में वीआईपी मेहमानों के आवास और भोजन पर हुए खर्च को लेकर श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने विभागीय जांच शुरू कर दी है। ...और पढ़ें

    केदारनाथ धाम।

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    राज्य ब्यूरो, देहरादून। केदारनाथ धाम में वीआइपी एवं अतिविशिष्ट अतिथियों के आवास व भोजन व्यवस्था पर मंदिर समिति का बड़ा खर्च होने का मामला सामने आया है।

    श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने इस पूरे प्रकरण की विभागीय जांच शुरू कर दी है। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के निर्देश पर चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है, जो तीन सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

    दरअसल, हाल ही में इंटरनेट मीडिया पर एक पत्र सार्वजनिक हुआ था, जिसमें केदारनाथ धाम में वीआइपी मेहमानों, सुरक्षा ड्यूटी में तैनात पुलिस अधिकारियों व जवानों की आवास व्यवस्था पर हुए खर्च के भुगतान के लिए छह लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि स्वीकृत करने का मामला सामने आया था।

    पत्र के अनुसार 30 अप्रैल, 2025 से शुरू हुई यात्रा अवधि के दौरान विभिन्न अतिथियों को जीएमवीएन और स्थानीय गेस्ट हाउसों में ठहराया गया, जिसका भुगतान लंबित बताया गया।

    यह मामला सामने आने के बाद बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि मंदिरों के दान के पैसे का किसी स्तर पर दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा और यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच और तथ्य सामने लाने के उद्देश्य से विभागीय समिति गठित की गई है। गठित जांच समिति में वित्त नियंत्रक हेम कांडपाल, अधिशासी अभियंता विपिन तिवारी, विधि अधिकारी एसएस बर्त्वाल तथा मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी को शामिल किया गया है।

    समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह पूरे प्रकरण की जांच कर तीन सप्ताह में आख्या प्रस्तुत करे। बीकेटीसी ने कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों को सार्वजनिक किया जाएगा और जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। समिति के गठन संबंधी आदेश मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ द्वारा जारी कर दिए गए हैं।

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    फाइनेंस कंट्रोलर से राय क्यों नहीं ली गई

    केदारनाथ धाम में वीआइपी और अति विशिष्ट अतिथियों की आवास व्यवस्था पर हुए खर्च के भुगतान के लिए छह लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि स्वीकृत करने का प्रस्ताव रखा गया।

    व्यवस्थापक की ओर से छह लाख रुपये की अतिरिक्त वित्तीय स्वीकृति मांगी गई। इस पर तत्कालीन सीइओ ने इसे मंजूरी दे दी।

    बीकेटीसी का यह मानना है कि बगैर फाइनेंस कंट्रोलर की मंजूरी के यह स्वीकृति नहीं दी जा सकती। अब बीकेटीसी इस मामले में जांच कर रहा है, आखिर फाइनेंस कंट्रोलर के बिना कैसे बजट मंजूर किया गया।

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