देवरिया ताल के रहस्य: 5200 साल पुराने मानसून और हिमालयी कृषि के चौंकाने वाले खुलासे
देवरिया ताल की तलछट से 5200 साल पुराने मानसून और वनस्पति इतिहास का पता चला है। अध्ययन से खुलासा हुआ ...और पढ़ें

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सुमन सेमवाल, देहरादून: गढ़वाल हिमालय की देवरिया ताल केवल खूबसूरत झील नहीं, बल्कि हजारों साल पुराने जलवायु और मानव गतिविधियों का प्राकृतिक अभिलेख है।
झील की तलछट में सुरक्षित परागकणों की मदद से विज्ञानियों ने करीब 5200 वर्षों के भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून और आसपास की वनस्पति का इतिहास पढ़ा है।
अध्ययन का सबसे दिलचस्प निष्कर्ष है कि करीब 800 साल पहले यानी लगभग 1150 ईस्वी में उच्च हिमालयी क्षेत्र में मानव ने कृषि को मजबूत आधार बना लिया था।
यह अध्ययन जार्जिया विश्वविद्यालय अमेरिका, बीरबल साहनी पादप विज्ञान लखनऊ और बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ के शोधार्थियों ने कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के शोधार्थी बहादुर एस कोटल्या के सहयोग से किया।
इसे पैलियोग्राफी, पैलियोक्लाइमेटोलाजी एंड पैलियोइकोलाजी जर्नल में हाल में प्रकाशित किया गया। शोधकर्ताओं ने 2393 मीटर ऊंचाई पर स्थित देवरिया ताल से निकाले करीब 3.80 मीटर लंबे तलछट (सेडीमेंट कोर) में 55 परागकण नमूनों (पोलन सैंपल्स) का अध्ययन किया।
अलग-अलग पौधों के परागकण झील की तलछट में जमा होते रहे। इन परतों में परागकणों की मात्रा से वैज्ञानिक उस समय की वनस्पति और जलवायु परिस्थितियों का अनुमान लगाते हैं।
करीब 1000 से 600 साल पहले यानी लगभग 950-1350 ईस्वी में मिश्रित चौड़ी पत्ती वाले और शंकुधारी जंगलों में बदलाव दिखा, जिसे शुरुआती चरण में अपेक्षाकृत मजबूत मानसून से जोड़ा गया।
लेकिन करीब 800 साल पहले, लगभग 1150 ईस्वी, अनाज वाली फसलों से जुड़े परागकण बढ़ने लगे। बांज/चीड़ अनुपात और कुछ प्राकृतिक वनस्पति संकेत मानसून की अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं दिखा रहे थे।
निष्कर्ष है कि वनस्पति और जलवायु का संबंध कमजोर पड़ा, क्योंकि मानवीय भूमि उपयोग, विशेषकर कृषि, का प्रभाव बढ़ गया।
5200 सालों में कई बार बदला मानसून का मिजाज
5200-4,000 साल पहले: ठंडा, अपेक्षाकृत सूखा वातावरण और कमजोर भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून।
4,400-4,000 साल पहले: नमी और सूखे के उतार-चढ़ाव।
4,200-4,050 साल पहले: बहु-दशकीय सूखे के संकेत।
3,500 साल पहले: बांज/चीड़ अनुपात घटा, जो मजबूत मानसून का संकेत माना गया।
3,200 साल पहले: घास बढ़ी, बांज/चीड़ घटे, जो कमजोर मानसून और कम नमी का संकेत है।
3,100 साल पहले: गंभीर सूखे के संकेत।
2,600-1,000 साल पहले: मानसून फिर मजबूत हुआ।
1,000-600 साल पहले: मजबूत से कमजोर मानसून
इसी दौरान 800 साल पहले मानव गतिविधि का प्रभाव बढ़ा और प्राकृतिक जलवायु व मानव भूमि-उपयोग संकेत मिलने लगे।
600-300 साल पहले: कमजोर मानसून और व्यापक लघु हिमयुग से समान संबंध मिला।
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