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देहरादून में मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड का भारी विरोध, योजना में बदलाव से टूटने की कगार पर हजारों मकान!

Published: Wed, 14 Oct 2026 12:33 PM (IST)

देहरादून में मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड के निर्माण का विरोध तेज हो गया है। संघर्ष समिति का आरोप है कि योजना ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, देहरादून। मोहकमपुर से आशारोड़ी तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के निर्माण को लेकर क्षेत्र में विरोध शुरू हो गया है। मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड संघर्ष समिति ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की सात अगस्त 2026 की अधिसूचना के तहत प्रस्तावित निर्माण पर आपत्ति जताई है।

समिति का आरोप है कि योजना में बदलाव के कारण अब कई आवासीय भवनों और बस्तियों के प्रभावित होने की आशंका है। प्रभावित क्षेत्रवासियों ने धरना-प्रदर्शन कर योजना पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

विधानसभा के पास धरने पर बैठे क्षेत्रवासियों ने कहा कि भारत सरकार के राजपत्र (गजट) संख्या-4205 और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की सात अगस्त 2026 की अधिसूचना के अनुसार, देहरादून जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-07 के किमी 0 से किमी 12.7 तक, यानी मोहकमपुर से आशारोड़ी के बीच, कुछ हिस्से में एलिवेटेड रोड और शेष हिस्से में हाईवे चौड़ा करने की योजना स्वीकृत की गई है।

रेलवे फाटक से बस्तियों तक प्रभावित होने की आशंका

समिति के अनुसार, अधिसूचना में मोहकमपुर से भारतीय रेलवे संस्थान (आइआरआइपीओ) के पीछे होते हुए मोहकमपुर रेलवे फाटक के पास से एलिवेटेड रोड निकालने की योजना है। इसमें रेलवे की जमीन छोड़कर मोहकमपुर की बस्ती, कंपनी बाग, योगीवाला फाटक, बीरपुर-पंजाबला, फ्रेंड्स एन्क्लेव कॉलोनी, फ्रेंड्स कॉलोनी और रिस्पना नदी के बाद बाईं ओर स्थित रेलवे कॉलोनी व आगे की बस्तियों से होते हुए सॉलिटेयर होटल के पास अजाबपुर फ्लाईओवर से जोड़ने का प्रस्ताव बताया गया है।

समिति का दावा है कि इस मार्ग के कारण हजारों मकान, जमीन और परिवार प्रभावित हो सकते हैं। एनएचएआइ की ओर से संबंधित भवनों पर निशान भी लगाए गए हैं। इससे क्षेत्रवासियों में चिंता बढ़ गई है।

पहले की योजना में बदलाव का आरोप

संघर्ष समिति ने पत्र में कहा है कि गजट के अनुसार सॉलिटेयर होटल के बाद आशारोड़ी तक पुराने हाईवे को चौड़ा करने का प्रावधान है। समिति का कहना है कि एलिवेटेड रोड के कारण केवल उन्हीं लोगों पर असर नहीं पड़ेगा, जिनके घर सीधे इसकी जद में आ रहे हैं, बल्कि आसपास के मकानों में रहने वाले परिवार भी प्रभावित होंगे।

समिति के अनुसार, वर्ष 2004-05 में भी सड़क निर्माण के लिए इसी क्षेत्र के मकानों पर लाल निशान लगाए गए थे। हालांकि, जनता के विरोध के बाद उस समय परियोजना सरकार को वापस लेनी पड़ी थी। समिति ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में एनएच-07 के मेन रोड के ऊपर से ही एलिवेटेड रोड बनाने की योजना थी, लेकिन बाद में उसमें बदलाव कर इसे आवासीय क्षेत्र की ओर मोड़ दिया गया।

बिना सूचना मकानों पर निशान लगाने का आरोप

समिति का कहना है कि एलिवेटेड रोड की जानकारी क्षेत्रवासियों को लगभग एक सप्ताह पहले ही हुई, जब एनएचएआइ की ओर से चिन्हित मकानों पर निशान लगाए जाने लगे। आरोप है कि इससे पहले किसी माध्यम, समाचार पत्र या नोटिस के जरिए लोगों को जानकारी नहीं दी गई थी। समिति ने यह भी कहा कि एनएचएआइ की ओर से सीधे आवासीय भवनों पर लाल निशान लगाए गए हैं।

प्रभावित लोगों का कहना है कि कई परिवारों ने जीवनभर की कमाई लगाकर मकान बनाए हैं। यदि घर टूटते हैं तो उनके सामने दोबारा आशियाना बनाने का संकट खड़ा हो जाएगा। समिति ने इसे लोगों के आवास और जीवन की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताते हुए संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत मिले जीवन के अधिकार का भी उल्लेख किया है।

संघर्ष समिति ने की योजना पर पुनर्विचार की मांग

मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड संघर्ष समिति के मुख्य संयोजक सुशील कुमार ने मांग की है कि परियोजना से प्रभावित परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और एलिवेटेड रोड की योजना पर पुनर्विचार किया जाए। समिति ने समाचार पत्रों से भी इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित करने का अनुरोध किया है।

समिति की ओर से जारी पत्र के अनुसार, धरना स्थल पर सुशील कुमार, टीएस नेगी, धीरज सिंह रावत, पीके भटनागर, मुकेश कुमार शर्मा, पीओ राकेश पुरोहित, संतराम जायसवाल, एसएन चौहान, ऊषा पडवाल, प्रशांत कुमार, महेंद्र, सुरेश बहुगुणा, त्रिभुवन सिंह, पूनम कुकरेती, राजेंद्र प्रसाद, अर्जुन सिंह और बलराम प्रजापति सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। समिति के पदाधिकारियों में मुख्य संयोजक सुशील कुमार, कोषाध्यक्ष प्रदीप कुमार भटनागर और सह-संयोजक मुकेश कुमार शर्मा आदि शामिल रहे।

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