सीएम धामी ने उत्तराखंड के लिए मांगा ऊर्जा पैकेज, 7800 करोड़ और अतिरिक्त बिजली
मुख्यमंत्री धामी ने दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री खट्टर से मुलाकात कर उत्तराखंड के लिए 7,800 करोड़ रुपये के ऊर्जा पैकेज और अतिरिक्त बिजली की मांग की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर ऊर्जा जरूरतों से जुड़े प्रस्ताव दिए।
HighLights
मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री से की मुलाकात
उत्तराखंड के लिए 7,800 करोड़ रुपये के ऊर्जा पैकेज की मांग
अतिरिक्त बिजली, बैटरी स्टोरेज क्षमता बढ़ाने का अनुरोध
राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में धामी सरकार गंभीरता से कदम बढ़ा रही है।
इसी कड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को नई दिल्ली में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर राज्य की ऊर्जा जरूरतों से जुड़े कई प्रस्ताव दिए।
उन्होंने 7,800 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता, जुलाई-अगस्त के लिए 350 मेगावाट अतिरिक्त बिजली, बैटरी एनर्जी स्टोरेज क्षमता बढ़ाने, 3,638.26 करोड़ की एडीबी सहायतित पिटकुल पारेषण परियोजना को मूल 80:20 वित्तीय ढांचे में मंजूरी व जलविद्युत परियोजनाओं के लिए पूर्वोत्तर राज्यों जैसी विशेष वित्तीय सहायता का अनुरोध किया।
केंद्रीय मंत्री ने सभी प्रस्तावों पर सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अल नीनो, कम वर्षा व जलाशयों में कम जलागम के कारण आगामी माह में जल विद्युत उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
इसे देखते हुए उन्होंने जुलाई 2026 की शेष अवधि के लिए 150 मेगावाट और अगस्त के लिए 200 मेगावाट अतिरिक्त बिजली केंद्रीय पूल से उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
उन्होंने राज्य में प्रस्तावित करीब 10 गीगावाट क्षमता की पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं के विकास के लिए अगले पांच वर्षों में 7,800 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता अथवा वायबिलिटी गैप फंडिंग उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
साथ ही बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की स्वीकृत क्षमता 500 मेगावाट आवर से बढ़ाकर 665 मेगावाट आवर किए जाने तथा वायबिलिटी गैप फंडिग का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से बातचीत के दौरान 3,638.26 करोड़ रुपये लागत वाली पिटकुल की एडीबी सहायतित पारेषण परियोजना पर चर्चा करते हुए 2,910.61 करोड़ रुपये के एडीबी ऋण के लिए प्रस्तावित अनुपात 80:20 (एडीबी ऋण : राज्यांश) वित्तीय व्यवस्था को यथावत रखने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि इसका अनुपात 60:40 करने से विशेष श्रेणी राज्य के रूप में मिलने वाले वित्तीय लाभ प्रभावित होंगे।
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