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चमोली टनल हादसा: सुरंग के ऊपर 3 नाले, टीएचडीसी ने नजरअंदाज किए खतरे के संकेत

Updated: Sat, 15 Aug 2026 08:20 AM (IST)

चमोली में टीएचडीसी की विष्णुगाड़-पीपलकोटी परियोजना टनल हादसे में तकनीकी खामियां और चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज करने की बात सामने आई है। दुर्घटनास्थल प ...और पढ़ें

फाइल फोटो।

फाइल फोटो।

HighLights

  1. टनल में दलदल और पानी निकलने के संकेत थे

  2. भूगर्भीय अध्ययन में चूक और अधूरा पक्काकरण

  3. दुर्गापुर गांव भूस्खलन की समस्या से जूझ रहा

देवेंद्र रावत, गोपेश्वर। चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारर्पोरेशन (टीएचडीसी) की निर्माणाधीन विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के टनल में हुए हादसे के बाद तकनीकी खामियों को लेकर भी चर्चा हो रही है। बताया गया कि टनल में जिस स्थान पर भूस्खलन हुआ वहां कुछ समय से मिट्ठी दलदल व पानी निकलकर खतरे का संकेत दे रहा था।

सवाल उठ रहा है क्या टीएचडीसी ने इस टेल रेस टनल के निर्माण से पूर्व पहाड़ी का भूगर्भीय अध्ययन करने में कहीं चूक तो नहीं की है। जिस स्थान पर यह टनल के अंदर यह दुर्घटना हुई है ठीक उसके ऊपर मोना नाला सहित तीन से अधिक नाले हैं। ऐसे में टनल के अंदर आया भारी मात्रा में पानी इन्हीं नालों से जमीन में रिसे पानी का मुहाना बताया गया है।

बताया गया कि टेल रेस टनल को टीएचडीसी ने ड्रील ब्लास्ट सिस्टम से बनाया था जबकि इस परियोजना की मुख्य टनल टीवीएम तकनीकी से बनाई जा रही है।

मोना नाला सहित तीन से अधिक अन्य नाले भी हैं

टीवीएम तकनीकी टनल बनाने की सबसे एडवांस वैज्ञानिक तकनीकी मानी जाती है। बताया गया कि ड्रील ब्लास्ट से बनाई गई तीन किमी टनल के ठीक ऊपर सियासैंण से दुर्गापुर  के बीच मोना नाला सहित तीन से अधिक अन्य नाले भी हैं। जो बरसात में पूरी पहाड़ी के पानी को अलकनंदा नदी तक ले जाते हैं। इन नालों के नीचे से टेल रेस टनल का निर्माण ड्रील ब्लास्ट सिस्टम से मशीनों द्वारा खोद खोद कर किया गया है।

पूरी पहाड़ी में कार्य के दौरान कंपन होती थी

बताया गया कि इससे पूरी पहाड़ी में कार्य के दौरान कंपन होती थी। यहां यह भी बताया गया कि इस टनल को बनाने के बाद आरसीसी आईएसएमबी तकनीकी से दो लियर में पक्काकरण का कार्य किया जाता है। तकनीकी विशेषज्ञों की मानें तो 30 से 50 सेमी के बीच दो मोटी परत में आरसीसी तकनीकी से टनल को पैक किया जाता है। इस टनल में 2600 मीटर कांट्रेक्ट लाइन आरसीसी पैकिंग का द्वितीय चरण का कार्य भी हो चुका था सिर्फ जिस स्थान पर यह दुर्घटना हुई वहां चार सौ मीटर आरसीसी आईएसएमबी रिप तकनीकी का द्वितीय चरण का कार्य होना था, जिसमें कंक्रीट से लाइनिंग पैकिंग कर टनल को फाइनल रुप से मजबूती दी जाती है।

वैसे भी टनल के अंदर भूस्खलन नई बात नहीं है

जानकारों का कहना है कि वैसे भी टनल के अंदर भूस्खलन नई बात नहीं है लेकिन इसके उपचार को लेकर तकनीकी रुप से कदम उठाए जाने चाहिए थे अगर इस पर मानसनू से पहले आरसीसी आईएसएमबी रिप का फाइनल कार्य कर दिया जाता तो पानी या भूस्खलन के रिसाव की उम्मीद न के बराबर थी। टनल में कार्य करने वाले लोगों की मानें तो परियोजना की कंपनी टीएचडीसी ने दुर्घटना स्थल पर मिले संकेतों को नजर अंदाज करते आ रही थी।

जेसीबी ऑपरेटर ने दी थी जानकारी

दरअसल इस स्थान पर के्रकिंग आने व मलबा गिरने की शुरुआत कई महीने पहले से हो रही थी। बताया गया कि यहां पर टनल निर्माण के दौरान आरसीसी पैकिंग के बाद भी भूस्खलन हुआ था। जिसे घायल जेसीबी ऑपरेटर ने ही साफ किया था। बताया कि पांच माह पूर्व दलदली मिट्टी इस स्थान पर टनल के ऊपरी हिस्से से आई थी लेकिन तब यहां पर लोहे की प्लेटें लगाकर बंद किया गया था।

जेसीबी ऑपरेटर चंदन कुमार का कहना है कि मिट्टी मलबे को साफ करने का कार्य उसने ही पूर्व में किया था। बताया गया कि घटना के कुछ दिनों पूर्व भी मिट्टी व पानी की शिकायतें मिली थी बावजूद इसके इसे नजर अंदाज किया गया अब यह इतनी बड़ी दुर्घटना का कारण बना है।

टनल के ऊपर बसा दुगापुर भूस्खलन की चपेट में

जिस स्थान पर टेल रेस टनल से पानी को अलकनंदा नदी में छोडा जाना है उसके मुहाने के ऊपर दुगाZपुर गांव बसा है। बताया कि टनल बनने के बाद से ही दुर्गापुर गांव भूस्खलन की समस्या से जूझ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस भूंधसाव के पीछे टीएचडीसी की टनल जिम्मेदार है लेकिन टीएचडीसी के अधिकारियों ने ग्रामीणों को तकनीकी तर्कों का ज्ञान बताकर उनकी आवाज को हमेशा अनसुनी की थी। दुर्गापुर की विंडबना यह है कि वह पास के ही गांव से विस्थापन होकर यहां आए थे। उनका पुराना गांव आपदा की चपेट में आ गया था।

जिला प्रशासन ने उन्हें इस स्थान पर स्थापित किया था। अब इस परियोजना के चलते वे भूस्खलन की मार झेल रहे हैं। बताया कि टीएचडीसी की टेल रेस टनल के मुहाने पर ही भारी भूस्खलन हुआ था जिसका टीएचडीसी ने ट्रीटमेंट किया था।

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