उत्तराखंड के बागेश्वर में सुमगढ़ त्रासदी की 16वीं बरसी, 11 साल पहले गई थी 18 मासूमों की जान; नम आंखों से श्रद्धांजलि
बागेश्वर में सुमगढ़ त्रासदी की 16वीं बरसी पर 18 मासूम बच्चों को श्रद्धांजलि दी गई। जिला पत्रकार संघ और नेशनलिस्ट ...और पढ़ें


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जागरण संवाददाता, बागेश्वर । सुमगढ़ घटना की 16वीं बरसी पर मंगलवार को तहसील परिसर में गमगीन माहौल बना रहा। 18 अगस्त 2010 को कपकोट के सुमगढ़ में काल-कवलित हुए 18 मासूम बच्चों की स्मृति में जिला पत्रकार संघ तथा नेशनलिस्ट यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स ने श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया।
पत्रकारों और स्थानीय लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत बच्चों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
उत्तराखंड के लिए काला दिन
वक्ताओं ने कहा कि 18 अगस्त 2010 का दिन बागेश्वर और पूरे उत्तराखंड के लिए एक काला दिन है। सुमगढ़ के विद्यालय में अचानक आए मलबे ने 18 मासूम जिंदगियों को लील लिया। इस हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं और 16 साल बाद भी उस खालीपन को नहीं भरा जा सका है।
जिला पत्रकार संघ के जिलाध्यक्ष दीपक पाठक ने कहा कि ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आपदा संभावित क्षेत्रों में विद्यालयों और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद पौधारोपण किया गया, जिससे दिवंगत बच्चों की स्मृति में जीवन और उम्मीद का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर घनश्याम जोशी, रमेश पर्वतीय, एनयूजे के प्रदेश सचिव जगदीश उपाध्याय, कमल कांडपाल, खष्टी कोरंगा, महीप पांडे, वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा, संजय साह जगाती समेत अन्य लोग उपस्थित थे।
