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इंतजार करते-करते दुनिया से चली गईं चंद्रा देवी, घोषणा के एक दशक बाद भी सापुली तक नहीं पहुंची सड़क

Published: Mon, 24 Aug 2026 07:30 PM (IST)

बागेश्वर के सापुली गांव में चंद्रा देवी का निधन सड़क के इंतजार में हुआ, जिनकी अंतिम यात्रा भी सड़क के अभाव की पीड़ा दर्शाती है।

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HighLights

  1. चंद्रा देवी का निधन सड़क के इंतजार में हुआ।

  2. अंतिम यात्रा में शव को 2 किमी कंधों पर उठाया।

  3. सापुली गांव में 2016 की सड़क घोषणा अधूरी।

जागरण संवाददाता, बागेश्वर। कर्मी ग्राम पंचायत के सापुली तोक निवासी चंद्रा देवी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। चंद्रा देवी ने जीवनभर गांव तक सड़क पहुंचने का इंतजार किया, लेकिन उनकी अंतिम यात्रा भी सड़क के अभाव की पीड़ा को दर्शाती है।

उनके निधन के बाद ग्रामीणों ने पहले पैदल रास्ता तैयार किया और फिर करीब दो किमी तक कंधों पर शव को सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद अंतिम यात्रा सड़क से एक किमी दूर स्थित श्मशान घाट तक गई।

चंद्रा देवी के भतीजे नरेंद्र दानू ने बताया कि चंद्रा देवी अविवाहित रहीं और अपने भाइयों के साथ रहती थीं। बीमारी के दौरान जब भी उन्हें अस्पताल ले जाने की आवश्यकता होती, ग्रामीण डोली के सहारे उन्हें सड़क तक पहुंचाते थे। उन्होंने जीवनभर सड़क पहुंचने का सपना देखा, जो अधूरा रह गया। गांव में पैदल आवाजाही के रास्ते भी बदहाल हैं।

हाल ही में महिलाओं और युवाओं ने श्रमदान कर रास्ते बनाए और झाड़ियों की सफाई की। गांव भूस्खलन की चपेट में आ चुका है, जिससे कई मकानों में दरारें पड़ गई हैं। सड़क की अनुपस्थिति के कारण गांव से पलायन भी हुआ है और जूनियर हाईस्कूल बंद हो गया है।

सापुली गांव की आबादी लगभग 500 है। 2016 में मुख्यमंत्री द्वारा सड़क जोड़ने की घोषणा की गई थी, लेकिन एक दशक बीतने के बाद भी सड़क नहीं बन सकी। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने का सबसे अधिक खामियाजा बीमार, बुजुर्ग और महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है।

सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि गांव के अस्तित्व और भविष्य से जुड़ी आवश्यकता है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से सापुली को जल्द सड़क सुविधा से जोड़ने की मांग की है। विधायक सुरेश गढ़िया ने कहा कि प्रत्येक गांव तक सड़क पहुंचाना सरकार का संकल्प है।