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उत्तराखंड के बागेश्वर में मजबूरी का सफर… हादसे का खतरा! गधेरे को पार करने में टूट चुके हैं महिला के दांत

Published: Wed, 19 Aug 2026 12:39 PM (IST)

बागेश्वर के बिलेख गांव में सड़क के अभाव में ग्रामीण जान जोखिम में डालकर यात्रा कर रहे हैं, जहां एक महिला गधेरे को पार करते समय गिरकर घायल हो गई।

HighLights

  1. बिलेख गांव में सड़क न होने से जानलेवा यात्रा

  2. गधेरा पार करते समय महिला के चार दांत टूटे

  3. ग्रामीण सड़क निर्माण में देरी पर चुनाव बहिष्कार की धमकी

जागरण संवाददाता, बागेश्वर । पहाड़ के गांवों में सड़क केवल सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की आवश्यकता है। बागेश्वर विधानसभा के बिलेख गांव के निवासी आज भी सड़क के अभाव में जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को मजबूर हैं। यह गांव जिला मुख्यालय से लगभग 16 किमी और रवांईखाल से 8 किमी पैदल दूरी पर स्थित है। ग्रामीणों को एक गधेरे को रोजाना करीब 15-16 बार पार करना पड़ता है।

गधेरे पर कोई सुरक्षित पुल या रास्ता न होने के कारण ग्रामीण पेड़ गिराकर किसी तरह आवाजाही का रास्ता बनाते हैं। इसी खतरनाक रास्ते से गुजरते समय एक महिला गिर गई, जिससे उसके चार दांत टूट गए। गांव के लगभग 15-20 स्कूली बच्चे भी प्रतिदिन इसी रास्ते से स्कूल आते-जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में गधेरे का जलस्तर बढ़ने पर खतरा और भी बढ़ जाता है।

2016 में हो चुका है गांव की सड़क का जिओ

ग्रामीणों के अनुसार, गांव की सड़क का जिओ वर्ष 2016 में हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है। ग्रामीणों ने पूर्व कैबिनेट मंत्री स्व. चंदन राम दास और वर्तमान विधायक पर सड़क निर्माण में आवश्यक सहयोग न करने का आरोप लगाया है।

ग्रामीण संजय चन्याल ने कहा कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि पहाड़ के गांवों की दयनीय स्थिति का प्रतीक है। यदि प्रशासन जल्द ठोस कदम नहीं उठाता है, तो ग्रामीण चुनाव बहिष्कार का निर्णय लेने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि किसी बड़ी अनहोनी की स्थिति में शासन-प्रशासन के साथ जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। विधायक पार्वती दास ने कहा कि सड़क का प्रस्ताव बनाया जाएगा।

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