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तो क्या उत्तराखंड की जगह हिलोरे लेती थी टेथिस सागर की लहरें? मिला 100 करोड़ साल पुराना अवशेष

Published: Thu, 27 Aug 2026 10:37 AM (IST)

अल्मोड़ा में चौखुटिया के तड़ागताल क्षेत्र में 100-120 करोड़ साल पुराने स्ट्रोमैटोलाइट्स के अवशेष मिले हैं, जो पृथ्वी पर जीवन के शुरुआती प्रमाणों में से एक हैं।

चौखुटिया के तडागताल में सर्वेक्षण के दौरान वैज्ञानिक टीम को मिला पुराने पत्थरों का अवशेष। जागरण

चौखुटिया के तडागताल में सर्वेक्षण के दौरान वैज्ञानिक टीम को मिला पुराने पत्थरों का अवशेष। जागरण

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संवाद सहयोगी, चौखुटिया। उत्तराखंड के अल्मोड़ा में चौखुटियाविकासखंड के तड़ागताल क्षेत्र में भूगर्भीय सर्वे के दौरान करीब 100 से 120 करोड़ वर्ष पुराने स्ट्रोमैटोलाइट्स के अवशेष मिलने के संकेत मिले हैं। शैवालों की गतिविधियों से बनी इन प्राचीन चट्टानी संरचनाओं को पृथ्वी पर जीवन के शुरुआती प्रमाणों में शामिल किया जाता है। अवशेष मिलने से तड़ागताल क्षेत्र का भूगर्भीय महत्व और बढ़ गया है। वैज्ञानिक अब इसके विस्तृत अध्ययन की जरूरत बता रहे हैं।

तड़ागताल चौखुटिया से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित बरसाती झील है। इसे स्थायी झील के रूप में विकसित करने के लिए लंबे समय से कवायद चल रही है। वर्ष 2019 में झील निर्माण के सर्वेक्षण, अनुसंधान और डीपीआर तैयार करने के लिए शासन से एक करोड़ 54 लाख रुपये की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति मिली थी। इसी क्रम में वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, देहरादून की टीम कई चरणों में क्षेत्र का भूगर्भीय सर्वे कर चुकी है। हाल में फाइनल सर्वे भी पूरा किया गया।

देहरादून में वाडियासंस्थान के वैज्ञानिक डॉ. मनीष मेहता ने बताया कि सर्वे में क्षेत्र में स्ट्रोमैटोलाइट्स के अवशेष मिलने के संकेत मिले हैं। प्राचीन जीवन के संकेत देता है। इसके विस्तृत अध्ययन की जरूरत है।

टेथिस सागर से जुड़ सकता है क्षेत्र का इतिहास

स्ट्रोमैटोलाइट्स की मौजूदगी इस क्षेत्र के प्राचीन भूगर्भीय इतिहास और यहां कभी समुद्री परिस्थितियां होने की संभावना की ओर संकेत करती है। माना जा रहा है कि क्षेत्र का संबंध प्राचीन टेथिस सागर से रहा हो सकता है। हालांकि इसकी पुष्टि के लिए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है।

तड़ागताल संघर्ष समिति के अध्यक्ष बीएस बिष्ट ने कहा कि तड़ागताल भूगर्भीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ताल परियोजना को जल्द पूरा कर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के साथ यहां शोध संस्थान स्थापित किया जाना चाहिए।

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