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वाराणसी में रासायनिक कचरे से मछलियों के डीएनए और मेटाबालिज्म पर गंभीर खतरा

By Vikas OjhaEdited By: Abhishek sharma
Published: Wed, 09 Sep 2026 11:43 AM (IST)

बीएचयू और आईआईटी बॉम्बे के शोध में खुलासा हुआ है कि वाराणसी की नदियों में बढ़ते रासायनिक कचरे (पीओपीएस) से ...और पढ़ें

वाराणसी में जहरीले रासायनिक कचरे से मछलियों के डीएनए और मेटाबॉलिज्म को नुकसान।

वाराणसी में जहरीले रासायनिक कचरे से मछलियों के डीएनए और मेटाबॉलिज्म को नुकसान।

HighLights

  1. नदियों में पीओपीएस से सिंगी मछली के लिवर, डीएनए को क्षति।

  2. बीएचयू-आईआईटी बॉम्बे शोध ने जलीय प्रदूषण का खुलासा किया।

  3. यह प्रदूषण खाद्य श्रृंखला से मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। नदियों और जलाशयों में बढ़ते जहरीले रासायनिक कचरे (पर्सीस्टेंट आर्गेनिक पोल्यूटेंट्स-पीओपीएस) को लेकर चौंकाने वाली शोध रिपोर्ट सामने आई है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) और आइआइटी बांबे के विज्ञानियों द्वारा किए गए एक संयुक्त अध्ययन के अनुसार, पानी में पीओपीएस की मौजूदगी स्थानीय मछली प्रजाति हेटेरोप्न्यूस्ट्सफासिलिस (एशियाई स्टिंगिंगकैटफिश या सिंगी मछली) के यकृत (लिवर), डीएनए और मेटाबालिज्म को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है।

यह शोध प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका प्रोसीडिंग्स आफ द इंडियन नेशनल साइंस अकादमी में प्रकाशित हुआ है। शोध टीम में डा. शुभेंदु शेखर राय, डा. प्रिया गुप्ता, डा. राहुल कुमार सिंह और डा. अर्चिष्मान महापात्र शामिल हैं। मछलियों को 21 दिनों तक पीओपीएस के मिश्रण (2.5 माइक्रोग्राम प्रति लीटर और चार माइक्रोग्राम प्रति लीटर) के संपर्क में रखा गया।

मछलियों की लाल रक्त कोशिकाओं में माइक्रोन्यूक्लियस का स्तर काफी बढ़ा हुआ पाया गया, जो यह दर्शाता है कि जहरीला पानी उनके डीएनए को क्षतिग्रस्त कर रहा है। चार माइक्रोग्राम प्रति लीटर के उच्च संपर्क स्तर पर सीरम ग्लूटामेट पाइरुवेट ट्रांसएमिनेस (एसजीपीटी), सीरम ग्लूटामिक-आक्सालोएसेटिक ट्रांसएमिनेज (एसजीओटी) और एएलपी जैसे लिवर एंजाइमों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो सीधे तौर पर यकृत की कोशिकाओं के क्षतिग्रस्त होने का संकेत है।

उच्च खुराक वाले समूह की मछलियों के सिरम ग्लूकोज स्तर में वृद्धि देखी गई, जिससे पता चलता है कि यह प्रदूषण उनके चयापचय (मेटाबालिज्म) का संतुलन बिगाड़ रहा है। साथ ही, इम्यूनोहिस्टोकेमिकल जांच में यकृत के ऊतकों में केआइ-67 प्रोटीन की तीव्र प्रतिक्रिया देखी गई। इसका मतलब है कि क्षतिग्रस्त लिवर की मरम्मत के लिए कोशिकाएं असामान्य दर से विभाजित (प्रोलिफरेशन) हो रही हैं।

खाद्य श्रृंखला के जरिए मानव स्वास्थ्य पर भी अप्रत्यक्ष खतरा

शोधकर्ताओं का कहना है कि जल स्रोतों में मौजूद जैविक प्रदूषक जलीय जीवों के लिए धीमा जहर साबित हो रहे हैं। यदि जल प्रदूषण पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो यह न केवल जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह करेगा बल्कि खाद्य श्रृंखला के जरिए मानव स्वास्थ्य पर भी अप्रत्यक्ष खतरा पैदा कर सकता है।