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वाराणसी में धरातल पर दिखा पीएम का विजन, संसदीय क्षेत्र में 17533 बच्चे कुपोषित से सुपोषित

By Raghvendra ShuklaEdited By: Abhishek sharma
Published: Tue, 08 Sep 2026 06:34 PM (IST)

काशी में प्रधानमंत्री मोदी के सुपोषित भारत विजन का असर दिखा है, जहाँ पाँच सालों में 17533 बच्चे कुपोषण से ...और पढ़ें

वाराणसी में पीएम मोदी के विजन से कुपोषण में भारी कमी बच्चों का स्वास्थ्य सुधरा।

वाराणसी में पीएम मोदी के विजन से कुपोषण में भारी कमी बच्चों का स्वास्थ्य सुधरा।

HighLights

  1. काशी में 17533 बच्चे कुपोषण से सुपोषित हुए।

  2. अति कुपोषित बच्चों की संख्या में भारी गिरावट।

  3. आंगनबाड़ी केंद्रों की सक्रियता से स्वास्थ्य में सुधार।

राघवेन्द्र शुक्ल, जागरण, वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सुपोषित भारत विजन उनके संसदीय क्षेत्र काशी में दिख रहा है। उनके संसदीय क्षेत्र में पांच साल में 17533 बच्चे कुपोषित से सुपोषित की श्रेणी में आ गए। इसके पहले राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य के पांचवें सर्वेक्षण (एनएफएचएस) ने जो रिपोर्ट बनाई वह चौंकाने वाली थी। 2019-2020 के सर्वे में देश के मुकाबले में काशी में अति कुपोषित बच्चों आंकड़ा 7.7 तो मध्यम कुपोषित 10.13% था। जो पांच साल बाद घटा। तीव्र कुपोषित बच्चों की संख्या 7.7 से घटकर .09 प्रतिशत रह गई है।

काशी के 39 सौ से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र के अधीन जुलाई 2022 में कुल कुपोषित बच्चे 21,868 थे। इसमें भी 6250 बच्चे तीव्र कुपोषित जबकि 15618 मध्यम कुपोषित थे। मध्यम कुपोषित को संतुलित आहार व देखभाल से संभाला गया जबकि तीव्र कुपोषित 6250 बच्चे चुनौती के रूप के सामने आए थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2019 में जब वाराणसी से लोकसभा सदस्य चुुने गए तो उसी समय रिपोर्ट भी सामने आई थी।

2019-2020 के इस पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) की रिपोर्ट ने काशी में कुपोषण की चिंतनीय तस्वीर पेश की थी। अति कुपोषित बच्चों का आंकड़ा 7.7 प्रतिशत तो मध्यम कुपोषित का 10.13 प्रतिशत रहा। पीएम ने जब सुपोषित भारत विजन के जरिए अपनी प्राथमिकता तय की तो प्रशासन पर भी दबाव पड़ा। वर्ष 2022 से युद्धस्तर पर कार्य का असर दिखा। पांच साल बाद जुलाई 2026 में जब तस्वीर दिखी तो अति

कुपोषित बच्चे 7.7 प्रतिशत से घटकर .09 और मध्यम कुपोषित 10.13 प्रतिशत से घटकर 1.55 प्रतिशत हो गया। कुल 21868 कुपोषित बच्चों में से 17533 सुपोषित की श्रेणी में आ गए। वर्तमान में काशी में तीव्र कुपोषित बच्चों की संख्या 243 जबकि मध्यम कुपोषित 4092 है।

इससे दिखा अंतर

- मिलेट, दलहन, फल-सब्जी, दुग्ध उत्पाद बच्चों तक पहुंचाना।
- ताजा व पका भोजन साप्ताहिक मेन्यू रोटेशन के अनुसार देना।

- आंगनबाड़ी प्रबंधन समिति की सक्रियता।
- स्वच्छ व साफ आंगनबाड़ी केंद्र की पहल।

- अत्यधिक कमजोर बच्चों का विशेष ध्यान।

गंभीर तीव्र कुपोषित बच्चे (आंकड़ा जुलाई)
वर्ष - कुल संख्या - एनएफएचएस सर्वे प्रतिशत

2022 - 6250 - 4.05 %
2023 - 2777 - .89 %

2024 - 715 - .17 %
2025 - 394 - .14 %

जुलाई 2026 - 243 - .09 %
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मध्यम तीव्र कुपोषित बच्चे (आंकड़ा जुलाई)
वर्ष - कुल संख्या - एनएफएचएस सर्वे प्रतिशत

2022 - 15618 - 10.13 %
2023 - 10340 - 3.27 %

2024 - 6337 - 1.79 %
2025 - 6668 - 2.37 %

जुलाई 2026 - 4092 - 1.55 %
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स्वास्थ्य व कार्यक्रम विभाग के आपसी समन्वय के बाद बेहतर रिजल्ट सामने आया है। लगातार मानीटरिंग भी गई। सुपोषण जागरूता अभियान का भी असर भी दिखा। कुपोषित बच्चों को लेकर विभाग गंभीर है।


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प्रखर कुमार सिंह, सीडीओ