Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    काशी में कजरी कार्यशाला का समापन, मालिनी अवस्थी ने परखी संगीत साधकों की प्रतिभा

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 11:17 PM (GMT+05:30)

    रविदास घाट पर क्रूज पर गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पांच दिवसीय कजरी कार्यशाला 'रिमझिम बरसे बदरिया' का समापन हुआ। ...और पढ़ें

    रविदास घाट पर गंगोत्री क्रूज में आयोजित ' रिमझिम बरसे बदरिया ' कार्यशाला के समापन पर शिष्याओं के साथ पद्मश्री मालिनी अवस्थी

    रविदास घाट पर गंगोत्री क्रूज में आयोजित ' रिमझिम बरसे बदरिया ' कार्यशाला के समापन पर शिष्याओं के साथ पद्मश्री मालिनी अवस्थी

    HighLights

    1. गुरु पूर्णिमा पर रविदास घाट क्रूज पर संगीत कार्यक्रम।

    2. पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने कजरी कार्यशाला का समापन किया।

    3. शिष्यों ने गुरु मालिनी अवस्थी का पांव पखार कर सम्मान किया।

    जागरण संवाददाता, वाराणसी। मां गंगा की गोद में रविदास घाट पर क्रूज पर बुधवार को गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर संगीत साधकों ने गुरु- शिष्य परंपरा को यादगार बनाते हुए स्वरांजलि अर्पित की। पांच दिवसीय कजरी कार्यशाला रिमझिम बरसे बदरिया का सधे सुर, लय, तान से समापन हुआ।

    प्रख्यात लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने संगीत साधकों को सिखाई गई ठुमरी, चैती और कजरी की बारीकियों को परखा। देश के कई राज्यों और सिंगापुर से लोक परंपरा को बढ़ाने के लिए जुटे हर आयु वर्ग के प्रतिभागियों की प्रस्तुतियाें की उन्होंने उन्मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

    कार्यशाला के समापन पर पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने ठुमरी गीत पर अलाप लगाया तो प्रतिभागियों ने झूला धीरे से झूआ ओ बनवारी, अरे सांवरिया... पर बेहतरीन प्रस्तुति की। इसके बाद कजरी अब बरखा बहार के आई गईले ना...ने पूरे वातावरण को सावन की फुहारों और लोक-छटा से सराबोर कर दिया।

    प्रतिभागियों ने माई विंध्याचल के महिमा अपार बा, ऊंचा दरबार बा ना...गाया तो क्रूज पर मौजूद कई प्रतिभागी खुद को रोक न सकें और थिरकने लगे। इसके बाद अवधी लोकगीत हे री सखी, निमिया तले डोली रख दे मुसाफिर, आई सावन की बहार रे... ने मंत्रमुग्ध कर दिया।

    खबरें और भी

    पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने कलाकारों को सुरों की उठान, शब्दों के शुद्ध उच्चारण, भाव-भंगिमा और शास्त्रीय गायन की सूक्ष्मताओं को बताया। हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्र, सितार पर नीरज मिश्र, तबला पर रत्नेश मिश्र व ढोलक पर राजेश मिश्र ने बखूबी साथ निभाया। कार्यक्रम में राहुल चौधरी, मुकुंद मौजूद रहे।

    यह भी पढ़ें- वाराणसी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बड़ी घोषणा, भदोही जिले का नाम फिर होगा संत रविदास नगर

    पुष्प बिछा और पांव पखार किया गुरु सत्कार

    समापन समारोह पर संगीत की बारीकियां सीख रहे प्रतिभागियों ने पद्मश्री मालिनी अवस्थी का पांव पखारा और मस्तक पर तिलक लगाकर आशीर्वाद लिया। क्रूज पर पहुंचने पर पुष्प बिछाकर और गुरु भक्ति के भजन गाकर स्वागत किया गया।


    यह कार्यशाला पारंपरिक गायन के अभ्यास तक सीमित नहीं रही। लोक संगीत के इतिहास, संस्कृति और पारंपरिक आत्मा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास हुआ। प्रकृति के संगीत को महसूस कर इसे अपने अंदर उतारना अद्भुत रहा।- पद्मश्री मालिनी अवस्थी

    प्रकृति की गोद में बैठकर कजरी, चैती और ठुमरी सीखने का अनुभव लाजवाब रहा। गंगा की कलकल करती लहरें, मंदिरों से घंटी की आवाज के बीच रियाज करना वाकई अद्भुत लगा।- स्वतंत्र पांडेय, लखनऊ

    पारंपरिक लोकगीतों की बारीकियां सीखने के लिए उसके भाव को समझना जरूरी था। कार्यशाला ने यह अवसर दिया। इस पांच दिन में बहुत कुछ सीखने को मिला।- ऐश्वर्या, लखनऊ

    ठुमरी, कजरी मौसम के अनुसार दिल में उतरते है। सावन में कजरी की धूम रहती है। कार्यशाला में उसी मौसम में इसकी बारीकियों को सीखना सपने सच होने जैसा रहा।- पलक शर्मा

    कार्यशाला को लेकर काफी उत्साहित थी। गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु को उनकी सिखाई गई विधा से नमन करना किसी सौभाग्य से कम नहीं है। मन प्रफुल्लित है।- नैना श्रीवास्तव, लखनऊ

    क्रूज पर हुई कार्यशाला में सिर्फ संगीत की ही शिक्षा नहीं मिली, बल्कि जीवन को अच्छे से जीने की प्रेरणा और प्रोत्साहन भी मिला। यह यादगर अनुभव है।- अस्मिता सिन्हा, कोलकाता

    कार्यशाला के लिए सिंगापुर से चली आयी। शास्त्रीय संगीत में रूचि है इसकी बारीकियां सीखना चाहती थी, लेकिन यहां बाबा, गंगा आरती सब कुछ मिल गया।- गौरी श्रीवास्तव, सिंगापुर

    पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होने के बावजूद मुझे पूर्वी उत्तर प्रदेश के पारंपरिक लोकगीत काफी पसंद है। यहां पर उसी को दिल में उतारने का अवसर मिला। यह कभी न भूलने वाला पल बन गया।- रूचिका सिंह, मेरठ