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बीएचयू में हुआ हंगामा, पर‍िसर में फ‍िर से बढ़ने लगी गहमागहमी, व‍िश्‍वव‍िद्यालय प्रशासन सतर्क

By Vns Shailesh Asthana Edited By: Abhishek sharma
Published: Wed, 02 Sep 2026 10:52 AM (IST)

काशी हिंदू विश्वविद्यालय में छात्र प्रतिनिधिमंडल ने अवैध पेड़ कटाई पर एनजीटी के जुर्माने और छात्र फंड की सुरक्षा को ...और पढ़ें

बीएचयू में छात्रों का हंगामा, एनजीटी जुर्माने और फंड सुरक्षा पर कुलपति कार्यालय पर धरना।

बीएचयू में छात्रों का हंगामा, एनजीटी जुर्माने और फंड सुरक्षा पर कुलपति कार्यालय पर धरना।

HighLights

  1. छात्रों ने एनजीटी जुर्माने और फंड सुरक्षा पर कुलपति कार्यालय घेरा।

  2. कुलपति के अनुपस्थित होने पर छात्रों ने धरना प्रदर्शन किया।

  3. सुरक्षाकर्मियों पर छात्रों से धक्का-मुक्की का आरोप लगा।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में अवैध पेड़ कटाई के मामले में एनजीटी द्वारा लगाए गए 2.65 करोड़ के जुर्माने और छात्र फंड की सुरक्षा को लेकर मंगलवार को छात्र प्रतिनिधिमंडल कुलपति कार्यालय पहुंचा। वहां कुलपति के आउट ऑफ स्टेशन होने की जानकारी मिलने पर छात्र धरने पर बैठ गए। छात्रों का आरोप है कि सुरक्षाकर्मियों ने उनसे धक्का-मुक्की की।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल छात्रों में सत्यम सिंह, अमन मौर्य, नितेश राय, विवर्त सिंह, निशांत अश्विनी और अन्य शामिल थे। छात्रों ने बताया कि जब वे कुलपति कार्यालय पहुंचे और 12 दिन पूर्व दिए गए ज्ञापन की स्थिति पूछी, तो कर्मचारियों ने बताया कि ज्ञापन कुलपति तक पहुंच चुका है, लेकिन उन्होंने इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।

छात्रों का कहना है कि कुलपति के पीए ने बीएचयू डोमेन से भेजे गए ईमेल और स्क्रीनशॉट देखने के बावजूद मिलने से साफ इनकार कर दिया और "सर आउट ऑफ स्टेशन हैं" कहकर टाल दिया।

इस पर छात्रों ने कुलपति कार्यालय में धरना शुरू कर दिया। धरने के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने छात्रों के साथ धक्का-मुक्की की। विरोध बढ़ने पर प्रशासन ने रजिस्ट्रार से बात करवाई। रजिस्ट्रार ने छात्रों को पांच सितंबर तक का मौखिक आश्वासन दिया, लेकिन कैमरे पर बोलने से मना कर दिया। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने छात्रों को धक्के मारकर बाहर निकाल दिया। छात्रों का कहना है कि यदि पांच सितंबर तक उनके ज्ञापन पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन को तेज करेंगे।

इस घटना ने विश्वविद्यालय परिसर में तनाव बढ़ा दिया है। छात्रों का यह प्रदर्शन न केवल उनकी मांगों के प्रति प्रशासन की अनदेखी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि छात्र समुदाय अपनी आवाज उठाने के लिए तैयार है। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगों को लेकर चुप नहीं बैठेंगे और यदि आवश्यक हुआ, तो वे और भी कठोर कदम उठाने के लिए तैयार हैं।

इस प्रकार की घटनाएं विश्वविद्यालयों में छात्रों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के मुद्दों को फिर से उजागर करती हैं। छात्रों का यह धरना एक महत्वपूर्ण संकेत है कि वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

बीएचयू में छात्रों का यह आंदोलन न केवल उनके अधिकारों की रक्षा के लिए है, बल्कि यह एक व्यापक संदेश भी है कि छात्र समुदाय किसी भी प्रकार की अन्याय के खिलाफ खड़ा होगा। प्रशासन को चाहिए कि वह छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करे और उचित कार्रवाई करे, ताकि विश्वविद्यालय का माहौल शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक बना रहे।