प्रो. लाहिड़ी प्रकरण की जांच के लिए गठित टीम का विस्तार कर सकता है बीएचयू
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के सर सुंदर लाल चिकित्सालय में पद्मश्री प्रो. तपन कुमार लाहिड़ी के साथ कथित मारपीट मामले ...और पढ़ें

प्रो. लाहिड़ी मारपीट प्रकरण: BHU जांच टीम में हो सकता है विस्तार
HighLights
पद्मश्री प्रो. लाहिड़ी के साथ कथित मारपीट की घटना।
BHU जांच टीम में एसीपी व अन्य सदस्य जुड़ेंगे।
मौजूदा मल्टीस्पेशियलिटी टीम पहले से कर रही जांच।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदर लाल चिकित्सालय में भर्ती, वहीं के एमेरिटस प्रोफेसर पद्मश्री डा. तपन कुमार लाहिड़ी के साथ हुई मारपीट की कथित घटना की जांच के लिए गठित कमेटी का विश्वविद्यालय प्रशासन विस्तार कर सकता है। इसमें एसीपी व विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ अन्य सदस्यों को भी जोड़ा जा सकता है।
फिलहाल घटना की जांच के लिए हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. विकास अग्रवाल के नेतृत्व में सात विशेषज्ञ चिकित्सकों की मल्टीस्पेशियलिटी टीम गठित की गई है, जिनमें प्रो. अग्रवाल के अतिरिक्त न्यूरोलाजिस्ट प्रो. अभिषेक पाठक, साइक्रिएटिक प्रो. अच्युत पांडेय, मेडिसिन विभाग के प्रो. एलसी मीना, क्रिटिकल केयर विभाग के प्रो. विक्रम गुप्ता, टीबी एंड चेस्ट रोग विभाग के प्रो. अतुल तिवारी और जिरियाट्रिक मेडिसिन के प्रो. एसएस चक्रवर्ती को शामिल किया गया है।
इस टीम ने प्रो. लाहिड़ी के स्वास्थ्य की देखभाल व उपचार करना शुरू कर दिया है। साथ ही कथित मारपीट की घटना की जांच करने की भी जिम्मेदारी इसी टीम को सौंपी गई है। टीम को घटना की जांच कर रिपोर्ट यथाशीघ्र प्रेषित करने का निर्देश दिया गया है। इसके पूर्व पिछले छह माह से प्रो. लाहिड़ी की सेवा व उपचार में डा. अरविंद पांडेय को कथित रूप से प्रो. लाहिड़ी के साथ दुर्व्यवहार व मारपीट करने के आरोप के चलते वहां से हटा दिया गया है।
घटना की जानकारी होने पर रविवार की रात में प्रो. लाहिड़ी का हाल पूछने गए स्टांप शुल्क एवं न्यायालय पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने मामले की जांच के लिए सर सुंदर लाल चिकित्सालय के एमएस प्रो. पुनीत, बीएचयू के चीफ प्राक्टर प्रो. संदीप पोखरिया व एसीपी की संयुक्त टीम बनाने की बात चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. एसएन संखवार को दिया था।
इस संबंध में मंगलवार को पूछे जाने पर प्रो. संखवार ने बताया कि प्रो. लाहिड़ी की सेवा व घटना की जांच के लिए पहले ही मल्टीस्पेशियलिटी विशेषज्ञों की टीम का गठन किया जा चुका है। ऐसे में एक ही प्रकरण के लिए दूसरी टीम का गठन तर्कसंगत नहीं है। हां, कुलपति सर के आने के बाद इसी जांच टीम के विस्तार का विकल्प रखा जा सकता है। इसमें एसीपी व कुछ अन्य सदस्यों को जोड़ा जा सकता है लेकिन अंतिम निर्णय कुलपति को ही लेना है।
