वाराणसी में लंका रामलीला मैदान के पास सड़क चौड़ीकरण अभियान में निकला प्राचीन कुआं, गोस्वामी तुलसीदास से है संबंध
वाराणसी में सड़क चौड़ीकरण के दौरान लंका रामलीला मैदान के पास एक प्राचीन कुआं मिला है, जिसका संबंध गोस्वामी तुलसीदास की रामलीला से है। यह कुआं रामलीला ...और पढ़ें

वाराणसी में सड़क चौड़ीकरण में मिला प्राचीन कुआं, गोस्वामी तुलसीदास की रामलीला से जुड़ा।
HighLights
वाराणसी में सड़क चौड़ीकरण के दौरान प्राचीन कुआं मिला।
कुएं का संबंध गोस्वामी तुलसीदास की रामलीला से है।
स्थानीय लोग कुएं के संरक्षण की मांग कर रहे हैं।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। कुंडों तालाबों और कुओं (जल कूप) की नगरी काशी जिसे कभी आनंद कानन वन के नाम से भी जाना जाता था। काशी नगरी में कभी कुओं तालाबों की भरमार थी। आज उसी काशी नगरी में कुओ की स्थिति दयनीय होती जा रही है।
महापौर एवं नगर आयुक्त के पहल से कुओं को संरक्षित करने का अभियान चलाया जा रहा है जो काफी सराहनीय है। वही दूसरी तरफ बीएचयू लंका गेट रविंद्रपुरी कॉलोनी होते हुए कीनाराम स्थली तक हो रहे सड़क चौड़ीकरण योजना में लंका रामलीला मैदान के पास एक प्राचीन प्राचीन कुआं निकाला गया है।
यह कुआं बहुत ही प्राचीन काल का है। इस कुएं का संबंध गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा स्थापित रामलीला से भी है। गोस्वामी जी द्वारा स्थापित रामलीला के तहत लंका पर भगवान राम- रावण के युद्ध की लीला का मंचन होता है और रामलीला में बनने वाले स्वरूप यहीं पर विश्राम करते हैं और इसी कुएं का पानी भी पीते हैं।
बताया गया कि इस कुएं का पानी बहुत ही शीतल एवं निर्मल है। नगर के कुंडो और तालाबों क़ो बचाने के लिए आह्वान क्षेत्रीय लोगों ने करते हुए कहा कि जिस तरह से वह नगर को संरक्षित कर रहे हैं, उसी तरह इस कुएं को भी संरक्षित करें। पौराणिक महत्व का माना जा रहा यह कुआं संरक्षण की अब बाट जोह रहा है।