दिल्ली के सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में जान गंवाने वाले अभिषेक का मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार
दिल्ली के सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में जान गंवाने वाले चंदौली निवासी छात्र अभिषेक कुमार का अंतिम संस्कार वाराणसी के ...और पढ़ें
HighLights
अभिषेक कुमार का अंतिम संस्कार वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर।
दिल्ली के सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में छात्र की मौत।
परिवार ने बिल्डिंग मालिक को दोषी ठहराया, जांच की मांग की।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। दिल्ली के सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में जान गंवाने वाले अभिषेक कुमार का अंतिम संस्कार वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर किया गया। अभिषेक, जो उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले का निवासी था, दिल्ली में बी.कॉम सेकंड ईयर की पढ़ाई कर रहा था। वह 2025 से दिल्ली में रह रहा था और अपने परिवार के सपनों को पूरा करने के लिए वहां गया था।
हादसे के समय अभिषेक उस इमारत में मौजूद था, जहां यह दुर्घटना हुई। इस हादसे में कुल सात लोगों की मौत हुई, जिनमें से पांच छात्र थे। अभिषेक की मौत से उसके गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। बीते मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को, उसके पार्थिव शरीर को मणिकर्णिका घाट लाया गया, जहां उसके पिता संतोष कुमार खरवार ने विधिपूर्वक उसे मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में परिवार, रिश्तेदार और गांव के लोग शामिल हुए।
अभिषेक के पिता ने बताया कि उनका बेटा पढ़ाई में बहुत होनहार था और वह एमबीए की तैयारी भी कर रहा था। उन्होंने कहा कि 5 सितंबर को अभिषेक से उनकी बात हुई थी और उन्होंने उसके हॉस्टल की फीस भी भरी थी। लेकिन 6 सितंबर को उनसे बात नहीं हो पाई। उन्होंने बताया कि पीजी में रहने वाले छात्रों को 11 महीने का एडवांस फीस जमा करना पड़ता है, जिससे छात्रों को मजबूरी में रहना पड़ता है।
अभिषेक के पिता ने बिल्डिंग के मालिक को दोषी ठहराया और कहा कि यदि वहां मरम्मत का काम चल रहा था, तो सभी छात्रों को वहां से हटा देना चाहिए था। उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री से मांग की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उचित व्यवस्था की जानी चाहिए।
अभिषेक की मां इस दुखद घटना के बाद कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं थीं और लगातार रोती रहीं। परिवार के सदस्यों का हाल देखकर यह स्पष्ट था कि उनका जीवन इस त्रासदी से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। परिजनों ने हादसे की निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जा सके। यह घटना न केवल अभिषेक के परिवार के लिए बल्कि पूरे गांव के लिए एक बड़ा सदमा है।
अभिषेक की आकस्मिक मृत्यु ने सभी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि छात्रों की सुरक्षा को लेकर कितनी लापरवाही बरती जा रही है। इस हादसे ने यह भी उजागर किया है कि छात्रों को सुरक्षित आवास की आवश्यकता है, जहां वे बिना किसी चिंता के अपनी पढ़ाई कर सकें। अभिषेक की कहानी एक चेतावनी है कि हमें अपने छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
