उन्नाव के अकोहरी में 23 साल बाद भी 724 पट्टाधारकों को नहीं मिला जमीन का हक, सीएम से लगाई गुहार
उन्नाव के अकोहरी गांव में 2003 में आवंटित कृषि भूमि के 724 पट्टाधारकों को 23 साल बाद भी जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला है क्योंकि उनके नाम खतौनी में दर ...और पढ़ें

तस्वीर- फाइल।
HighLights
अकोहरी के 724 पट्टाधारकों को 23 साल से नहीं मिला हक।
पट्टे की जमीन खतौनी में दर्ज न होने से ग्रामीण परेशान।
मुख्यमंत्री से गुहार के बाद एसडीएम ने जांच टीम बनाई।
जागरण संवाददाता, उन्नाव। तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत अकोहरी में वर्ष 2003 में कृषि भूमि के पट्टे पाने वाले 724 लोगों को 23 साल बाद भी जमीन का हक नहीं मिल सका है। पट्टाधारकों ने मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजकर सरकारी अभिलेखों में नाम दर्ज कराकर खतौनी जारी किए जाने की मांग की है।
तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत अकोहरी में प्रशासन की लापरवाही इस कदर देखने को मिल रही कि 23 वर्ष पूर्व हुए 724 ग्रामीणों के पट्टे की भूमि को आज तक खतौनी में दर्ज नहीं किया गया है। इसके चलते पट्टा धारक परेशान है।
ग्राम पंचायत के पंकज, प्रताप सिंह, पंचीलाल, मुन्ना, सलोचनी, लक्ष्मी आदि ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत अकोहरी में कृषि भूमि के पट्टों की जांच कर पात्रता के आधार पर वर्ष 2003 में 724 लोगों को पट्टे आवंटित किए गए थे। आरोप है कि इतने वर्षों बाद भी कई पट्टाधारकों के नाम खतौनी में दर्ज नहीं किए गए।
इससे पट्टा धारक अपनी ही जमीन पर मालिकाना हक के लिए तहसील से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय तक चक्कर काट रहे है। पट्टाधारकों का कहना है कि कुछ लोगो ने पट्टे की जमीन पर कब्जा भी कर रखा है, जो जमीन छोड़ नही रहें है।
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गरीब भूमिहीन परिवारों की जमीन पर कब्जे के कारण उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। बताया कि पट्टा आवंटन के बावजूद खतौनी में नाम दर्ज न होने से जमीन का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। पट्टाधारकों ने मुख्यमंत्री से पट्टे की जमीन को कब्जा मुक्त कराने और अकोहरी गांव में वर्ष 2003 में आवंटित 724 पट्टों के लाभार्थियों के नाम सरकारी अभिलेखों में दर्ज कराकर खतौनी जारी किए जाने की मांग की है।
एसडीएम दिग्विजयसिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। नायब तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व टीम गठित करके जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।