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    सोनभद्र में वज्रपात से होती हैं सबसे अध‍िक मौतें, जान बचाने के ल‍िए लगे अलार्म सिस्टम में बजट की कमी से मेंटेनेंस में समस्‍या

    By Ashok KannaujiaEdited By: Abhishek sharma
    Updated: Sat, 08 Aug 2026 06:38 PM (IST)

    सोनभद्र के दुद्धी ब्लॉक में वज्रपात से होने वाली मौतों को रोकने के लिए 'आदित्य लाइटनिंग डिटेक्शन एंड वार्निंग सिस्टम' स्थापित किया गया है, जिससे जानमा ...और पढ़ें

    सोनभद्र में वज्रपात अलार्म सिस्टम ने बचाई हजारों जानें, अब रखरखाव के लिए बजट की दरकार।

    सोनभद्र में वज्रपात अलार्म सिस्टम ने बचाई हजारों जानें, अब रखरखाव के लिए बजट की दरकार।

    HighLights

    1. दुद्धी में वज्रपात से मौतें रोकने को अलार्म सिस्टम।

    2. सिस्टम ने 70% सटीकता से हजारों जानें बचाईं।

    3. रखरखाव के लिए सरकारी बजट की स्थायी मांग।

    जागरण संवाददाता, दुद्धी (सोनभद्र)। दुद्धी ब्लॉक क्षेत्र की पहाड़ी और वनाच्छादित भौगोलिक स्थिति के कारण हर साल आकाशीय बिजली (वज्रपात) की चपेट में आने से कई ग्रामीणों और पशुओं की जान चली जाती थी।

    इस समस्या के समाधान के लिए अप्रैल 2023 में राज्य आपदा विभाग द्वारा क्षेत्र के 31 चिन्हित गांवों में 'आदित्य लाइटनिंग डिटेक्शन एंड वार्निंग सिस्टम' (वज्रपात अलार्म सिस्टम) स्थापित किया गया था, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

    इस अलार्म सिस्टम और आपदा विभाग के जन-जागरूकता अभियानों के चलते पिछले कुछ वर्षों में आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों के आंकड़ों में उल्लेखनीय कमी आई है। ग्रामीणों के अनुसार, यह आधुनिक अलार्म सिस्टम लगभग 70 प्रतिशत सटीकता के साथ कार्य करता है।

    वज्रपात होने से पहले ही इस मशीन का सायरन तेज आवाज में बजने लगता है, जिसकी ध्वनि 2 से 3 किलोमीटर के दायरे तक सुनाई देती है। सायरन सुनते ही खेतों और खुले स्थानों में काम कर रहे ग्रामीण तुरंत सुरक्षित स्थानों की ओर लौट जाते हैं।

    सिस्टम के प्रभावी परिणामों को देखते हुए कार्यदाई संस्था 'टेक फॉर टुमारो' द्वारा इसके अनुबंध को आगे बढ़ाया गया है। मशीन को सोलर पैनल से जोड़कर और अधिक आधुनिक बनाया गया है, ताकि बिजली कटने की स्थिति में भी यह निर्बाध रूप से कार्य कर सके।

    जिन प्रमुख गांवों में यह अलार्म सिस्टम सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है, उनमें बीड़र, मझौली, दुमहान, बघाड़ू, महुली, अमवार, रजखड़, जोरूखाड़, फुलवार, खजूरी, केवाल, करहीया, गडदरवा और आसपास के अन्य ग्राम शामिल हैं।

    हालांकि, इस तकनीक से हजारों ग्रामीणों की जान बच रही है, लेकिन शासन स्तर से मेंटेनेंस (रखरखाव) के लिए कोई अलग फंड या बजट जारी न होना चिंता का विषय है। संस्था के प्रतिनिधि राघव शर्मा के अनुसार, "प्रशासनिक स्तर पर यदि समय-समय पर मेंटेनेंस के लिए फंड उपलब्ध कराया जाए, तो मशीनों की देखभाल और सुचारू संचालन में काफी आसानी होगी।"

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    वर्तमान में संस्था अपने स्तर पर ही इन अलार्म प्रणालियों की देखभाल और मरम्मत का कार्य कर रही है। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग है कि शासन इस जनहितकारी प्रणाली के रखरखाव के लिए स्थायी बजट का आवंटन करे, ताकि भविष्य में बजट के अभाव में यह सुरक्षा चक्र प्रभावित न हो।