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मौत के बाद भी जिंदा रहेगा दिल्ली विश्वविद्यालय के अभिषेक का सपना, किसी को रोशनी देंगी उसकी आंखें

By Prashant Kumar Shukla Edited By: Abhishek sharma
Published: Mon, 07 Sep 2026 07:47 PM (IST)

दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी इमारत ढहने से सोनभद्र के अभिषेक कुमार की मौत हो गई, जो दिल्ली विश्वविद्यालय ...और पढ़ें

दिल्ली पीजी हादसे में सोनभद्र के छात्र अभिषेक की मौत आंखें दान कर गए रोशनी।

दिल्ली पीजी हादसे में सोनभद्र के छात्र अभिषेक की मौत आंखें दान कर गए रोशनी।

HighLights

  1. दिल्ली पीजी हादसे में सोनभद्र के छात्र अभिषेक की मौत।

  2. मृतक अभिषेक ने अपनी आंखें दान करने का संकल्प लिया था।

  3. उनकी आंखों से अब किसी और को दुनिया देखने को मिलेगी।

जागरण संवाददाता, सोनभद्र। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को पांच मंजिला पीजी की इमारत ढहने से मृत तीन छात्रों में से एक अभिषेक कुमार सोनभद्र के पिपरी थाना क्षेत्र के रेणुकूट का निवासी था। मूल रूप से चंदौली जनपद के झांसी गांव निवासी उनके पिता हिंडाल्को में आपरेटर पद पर तैनात हैं और कंपनी के आवास में रहते हैं। इस घटना से हिंडाल्कों परिसर के साथ ही चंदौली के झांसी गांव में शोक की लहर है।

दो भाइयों में छोटा अभिषेक एमबीए करने का स्वप्न लेकर दिल्ली गया था और दिल्ली यूनिवर्सिटी में बीकाम द्वितीय सेमेस्टर का छात्र था। उसकी मौत से परिवार में चींख पुकार मची है। रविवार की शाम ही दिल्ली रवाना हुए पिता संतोष कुमार अपने ममेरे, चचेरे भाइयों व दामाद के साथ एंबुलेंस से सोमवार की सुबह शव लेकर वाराणसी के लिए चल दिए हैं। उन्होंने मोबाइल पर वार्ता में जानकारी दी है कि देर रात वाराणसी में ही बेटे का दाह संस्कार होगा। उससे जुड़े अन्य संस्कार पैतृक गांव चंदौली के झांसी में होंगे।

पिता संतोष ने बताया कि उसके दो बेटे और एक बेटी हैं। बड़ा बेटा ओम कोटा से बीटेक कर घर लौटा है। सबसे बड़ी बेटी है जिसकी पिछले वर्ष ही नवंबर में शादी की थी। अभिषेक सबसे छोटा बेटा था। रेणुकूट के निर्मला कांवेंट स्कूल से उसने इंटरमीडिएट पास करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकाम करने का निर्णय लिया था। इस वर्ष उसका दूसरा सेमेस्टर था।

पिता ने बताया कि अभिषेक एमबीए करना चाहता था। रेणुकूट नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन रहे स्व. शिव प्रताप सिंह बबलू के पुत्र शौर्य प्रताप सिंह ने रविवार की शाम करीब पौने पांच बजे मोबाइल पर अभिषेक के मौत की सूचना दी थी। शौर्य भी दिल्ली में रहकर किसी दूसरे कालेज में पढ़ाई करता है। उसकी मदद से वह दिल्ली से शव लेकर एंबुलेंस से लौट रहे हैं।

मौत के बाद भी जिंदा रहेगा अभिषेक का सपना, किसी को रोशनी देंगी उसकी आंखें
दिल्ली में हुए हादसे ने रेणुकूट के हिंडाल्को कालोनी निवासी अभिषेक कुमार के परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। दिल्ली विश्वविद्यालय में बीकाम द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहे अभिषेक की हादसे में मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। बेटे की मौत की सूचना मिलते ही उसके पिता दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

हालांकि, इस असहनीय दुख के बीच अभिषेक का एक ऐसा संकल्प पूरा हुआ, जो अब किसी दूसरे के जीवन में रोशनी भर सकता है। अभिषेक ने पहले से ही अपनी आंखें दान करने के लिए पंजीकरण करा रखा था। हादसे के बाद उसकी आंखों का दान कराया गया। यानी अभिषेक भले ही इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन उसकी आंखों से कोई और दुनिया देख सकेगा।

अभिषेक अपने परिवार में सबसे छोटा था। उसका एक बड़ा भाई राजस्थान में बीटेक की पढ़ाई कर रहा है, जबकि बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। अभिषेक अपने माता-पिता के साथ हिंडाल्को कालोनी में रहता था। उसके पिता हिंडाल्को में कार्यरत हैं। इन दिनों उसकी मां गांव गई हुई हैं। बेटे की मौत की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है।

अभिषेक के पिता ने बताया कि उनके बेटे ने पहले ही अपनी आंखें दान करने का संकल्प लिया था और इसके लिए पंजीकरण भी कराया था। उन्होंने कहा कि बेटे को खोने का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता, लेकिन इस बात का संतोष है कि अभिषेक की आंखों से किसी दूसरे व्यक्ति की जिंदगी में रोशनी लौट सकेगी। बेटे की आंखें किसी और के लिए दुनिया देखने का माध्यम बनेंगी, यही परिवार के लिए इस गहरे दुख के बीच सबसे बड़ी सांत्वना है।