महाशिवरात्रि पर 25 सालों बाद एक साथ बन रहे 8 योग, भोलेनाथ देंगे लक्ष्मी का वरदान, ये है शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
महाशिवरात्रि पर 25 साल बाद आठ शुभ योग बन रहे हैं, जिनमें बुधादित्य और लक्ष्मी नारायण योग प्रमुख हैं। इस दिन भगवान शिव लक्ष्मी का वरदान देंगे। पं. आशीष ...और पढ़ें


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संवाद सूत्र, सीतापुर। महाशिवरात्रि पर 25 वर्षों बाद कई शुभ योग एक साथ बन रहे हैं। इस दिन कुंभ राशि में बुधादित्य, शुक्रादित्य, लक्ष्मी नारायण और चतुर्ग्रही योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति, ध्रुव व व्यतिपात योग भी रहेंगे। यह दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल की दृष्टि से भी विशेष रहेगा। ग्रह-नक्षत्रों की इस चाल में भोलेनाथ लक्ष्मी का वरदान देते हैं।
नगर के सीताराम मंदिर के पुजारी पं. आशीष शास्त्री ने बताया कि भगवान शिव की त्रिगुणी सृष्टि हैं। इसमें तीन ही प्रकार से शिव की पूजा बताई गई है। इसमें सात्विक, राजसिक, तामसिक जो जिस भाव से शिव की पूजा करता है, उसे उसी प्रकार से शिव फल प्रदान करते हैं। गृहस्थ लोग सात्विक पूजन और राजसिक पूजा करते हैं।
सात्विक पूजा में दूध दही, घी, शहद, बेल पत्र फूल मिठाई, फल और राजसिक में भांग धतूरा रुद्राक्ष कमल पुष्प से तामसिक पूजा करते हैं। अघोर साधना में भस्म की आरती, भस्म शृंगार से शिव को प्रसन्न किया जाता है। महाशिवरात्रि में सभी पूजन विशेष फल प्रदान करते हैं।
शिव की कृपा प्राप्त करने का संयोग है शिवरात्रि
महाशिवरात्रि की यह रात्रि सिर्फ व्रत और पूजन का अवसर नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना और शिव कृपा पाने का दुर्लभ संयोग है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी, रविवार को शाम पांच बजकर चार मिनट से शुरू होगी, जोकि 16 फरवरी, सोमवार को शाम पांच बजकर 34 मिनट तक रहेगी।
चतुर्दशी तिथि रात में पड़ने के कारण 15 फरवरी को ही महाशिवरात्रि का व्रत और पूजन किया जाएगा। महाशिवरात्रि की रात को चार भागों में बांटकर शिव पूजन का विशेष महत्व शास्त्रों में है।
इन पहर में करें पूजा
पं. आशीष शास्त्री ने बताया कि प्रथम पहर शाम 6:11 बजे से रात 9:22 बजे तक, द्वितीय प्रहर रात 9:23 बजे से रात 12:34 बजे तक, तृतीय प्रहर रात 12:35 बजे से सुबह 3:46 बजे तक और चतुर्थ प्रहर 16 फरवरी सुबह 3:46 बजे से सुबह 6:59 बजे तक रहेगा। इसके अलावा निशीथ काल पूजा 16 फरवरी की रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक की जा सकती है, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है।