'किराया पूरा, सफर अधूरा', सिद्धार्थनगर में डग्गामार बसों का बोलबाला; क्षमता से अधिक सवारी ढो रहे वाहन
सिद्धार्थनगर में 42 सीटों वाली बसों में 70 यात्री भरकर डग्गामार बसें चल रही हैं, जिससे यात्रियों को उमस भरी ...और पढ़ें
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प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
सिद्धार्थनगर में 42 सीटों पर 70 यात्री ढो रही बसें।
यात्रियों को उमस भरी गर्मी में खड़े होकर करना पड़ता सफर।
आरटीओ विभाग की निष्क्रियता से स्थानीय नागरिक परेशान।
संवाद सूत्र, बिस्कोहर (सिद्धार्थनगर)। प्राइवेट वाहनों में सवारी भरने का कोई नियम नहीं है। स्थिति ये है कि 42 सीट वाली बस में 70 यात्री भर दिए जाते हैं। ऐसे में बहुतों को खड़े होकर सफर करना पड़ता है। उमस भरी गर्मी में यात्री बेहाल रहते हैं, पर कहीं कोई सुनवाई नहीं होती है और न ही आरटीओ विभाग द्वारा कोई जांच ही की जाती है।
बिस्कोहर-इटवा, इटवा से बांसी और बढ़नी, डुमरियागंज मार्ग पर जो बसें चलती हैं, अधिकांश डग्गामारी की तर्ज पर चल रही हैं। बसों में क्षमता से करीब दोगुनी सवारियां भरी जाती हैं। कभी-कभी तो सवार को नीचे उतरने में बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है, क्योंकि बस के अंदर जगह ही नहीं रहती है कि बाहर निकला जा सके।
बस के अंदर पैर रखने तक की जगह नहीं बचती है। हवा पास न होने के कारण यात्रियों को कभी-कभी दम घुटने का एहसास होता है। मनमाना किराया देने के बाद भी सुकून की यात्रा नसीब नहीं होती है। महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे सभी खराब व्यवस्था से त्रस्त रहते हैं।
क्षेत्रवासियों में मनोज, अनारुल्लाह, बाबूलाल, मनीष का कहना है कि अधिकतर बसें ओवरलोडिंग चलती हैं, मगर कोई जांच नहीं की जाती है। आरटीओ विभाग हो या पुलिस, कार्रवाई की बात कौन कहे, कोई चेकिंग तक नहीं की जाती है। नागरिकों ने उच्चाधिकारियों से इस दिशा में उचित कदम उठाने की मांग की है।
