विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

शामली में धमकियों के बीच 12 साल तक न्याय के लिए लड़ाई लड़ता रहा परिवार, अब चार आरोपियों को हुई फांसी की सजा

Updated: Fri, 14 Aug 2026 12:53 AM (IST)

शामली के चर्चित पवन हत्याकांड में 12 साल एक महीने के संघर्ष के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिला है। अदालत ने चार आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई, जिससे परिवार में खुशी और संतोष का माहौल है।

धमकियों के बीच 12 साल तक न्याय के लिए लड़ाई लड़ता रहा परिवार।

धमकियों के बीच 12 साल तक न्याय के लिए लड़ाई लड़ता रहा परिवार।

HighLights

  1. 12 साल बाद पवन हत्याकांड में परिवार को मिला न्याय।

  2. अदालत ने चार आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई।

  3. धमकियों और संघर्षों के बावजूद परिवार ने नहीं मानी हार।

संवाद सूत्र, कांधला। भभीसा के चर्चित पवन हत्याकांड में न्याय पाने का सफर पीड़ित परिवार के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। पूरे 12 साल एक महीने तक स्वजन खौफ और डर के साए में जीने को मजबूर रहे।

इस लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान उन्हें लगातार धमकियां मिलती रहीं, रंगदारी मांगी गई और कई बार तो जान के डर से कोर्ट की तारीखें तक छोड़नी पड़ीं, लेकिन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद परिवार पीछे नहीं हटा और आखिरकार अदालत के फैसले ने उनके न्याय के विश्वास को मजबूत कर दिया। फैसला आते ही मृतक के बेटे ने फोन कर परिवार को सूचना दी। तब से परिवार खुश है।

कांधला क्षेत्र के गांव भभीसा में पवन कुमार की हत्या के बाद से ही पीड़ित परिवार पर मुकदमे में फैसले का दबाव बनाया जाने लगा था। कुख्यात विपुल खूनी की ओर लगातार परिवार पर फैसला करने का दबाव बनाया गया। उन्हें कुख्यात के डर से पुलिस सुरक्षा का सहारा लेना पड़ा।

डर का आलम यह था कि कई मौकों पर सुरक्षा के बावजूद स्वजन तारीख पर अदालत नहीं पहुंच पाते थे। अप्रैल 2026 में कुख्यात बदमाश विपुल खूनी ने बेखौफ होकर वादी अशोक कुमार से मुकदमा लड़ने का खर्च (रंगदारी) मांग लिया और न देने पर पूरे परिवार को खत्म करने की धमकी दी।

कांधला पुलिस ने इस मामले में सात अप्रैल को कुख्यात के खिलाफ रंगदारी का मुकदमा दर्ज किया और फरारी के चलते उसके खिलाफ 50 हजार रुपये का ईनाम भी घोषित किया गया था। जुलाई 2026 में जब कुख्यात विपुल खूनी पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुआ, तब जाकर पीड़ित परिवार ने पहली बार राहत की सांस ली थी।

अब अदालत द्वारा चार आरोपितों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद परिवार में खुशी और संतोष का माहौल है। गुरुवार को जैसे ही अदालत का फैसला आया, कोर्ट में मौजूद मृतक के बीएसएफ जवान बेटे आदित्य ने तुरंत अपने घर फोन लगाया।

आदित्य ने फोन पर भावुक होकर कहा मां, चाचा और पूरे परिवार को बता दो, पिता के सभी आरोपितों को फांसी की सजा हो गई है। यह सुनते ही घर में मौजूद मृतक की पत्नी सोहनबीरी, भाई अशोक कुमार और अन्य स्वजन की आंखें खुशी और भावुकता से भर आईं।

परिवार का कहना है कि 12 साल के लंबे संघर्ष और यातनाओं के बाद आज उनके न्याय की जीत हुई है। मृतक के भाई और मुकदमे के वादी अशोक कुमार ने बताया कि मुकदमा की पैरवी न हो इसके लिए आरोपितों ने कई बार दबाव बनाया था।

बीएसएफ में है मृतक का पुत्र, कश्मीर में चल रही तैनाती

भभीसा निवासी मृतक पवन कुमार का बेटा आदित्य एक महीने की छुट्टी पर घर आया हुआ है। आदित्य बीएसएफ में तैनात है। आदित्य अपने पिता की मौत से एक साल पहले भर्ती हुआ था। आदित्य की तैनाती कश्मीर में चल रही है। गुरुवार को आदित्य कोर्ट में ही मौजूद था।

फैसला आने के बाद ने अपनी माता और स्वजन को फोन कर आरोपितों को फांसी की सजा होने की जानकारी दी है। मृतक पवन कुमार के नाम 16 बीघा जमीन थी। जिसकी देखभाल उसका छोटा बेटा अनिरुद्ध करता है।

मृतक के भाई अशोक कुमार ने बताया कि भाई की हत्या के मुकदमे की पैरवी करने में लाखों रुपये खर्च हुए। हत्या के बाद उनकी सुरक्षा के लिए पीएसी तैनात कर दी गई थी। तारीख पर जाने के लिए पीएसी को साथ लेकर जाना पडता था, जिसमें हर तारीख पर दो-तीन हजार रुपए खर्च हो जाते थे।

इस दौरान आरोपित विपुल ने अपने साथियों के साथ उन पर फैसला करने का दबाव बनाने के लिए फायरिंग भी की थी, और कई बार हत्या की धमकी दी थी, लेकिन बदमाशों की धमकी से डरे नही, और मुकदमे की पैरवी करते रहे। आखिर कार 12 साल एक महीने बाद पीडित स्वजन को न्याय मिला है।