रालोद को बड़ा झटका: प्रदेश महासचिव मुकेश सैनी ने दिया इस्तीफा, अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद बढ़ा सियासी पारा
रालोद के प्रदेश महासचिव मुकेश सैनी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है, जिससे पश्चिमी यूपी में रालोद को बड़ा झटका लगा है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से उनकी ...और पढ़ें

लखनऊ में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात करते रालोद के महासचिव रहे मुकेश सैनी।
HighLights
मुकेश सैनी ने रालोद प्रदेश महासचिव पद से इस्तीफा दिया।
अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद सियासी पारा चढ़ा।
थानाभवन सीट पर सपा के लिए मजबूत दावेदारी।
अनुज सैनी, शामली। मिशन-2027 की सियासी बिसात बिछने से पहले ही पश्चिमी यूपी में राष्ट्रीय लोकदल को करारा झटका लगा है। थानाभवन विधानसभा सीट से टिकट का आश्वासन न मिलने और उपेक्षा से नाराज पार्टी के प्रदेश महासचिव मुकेश सैनी ने रालोद से इस्तीफा दे दिया है। लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से उनकी मुलाकात ने पश्चिमी यूपी के सियासी पारे को एक झटके में गर्मा दिया है।
जिले की राजनीति में जमीन से उठकर पहचान बनाने वाले मुकेश सैनी ने अपने सफर की शुरुआत रालोद से ही की थी। वे पार्टी के कद्दावर नेता एवं अध्यक्ष स्वर्गीय चौधरी अजित सिंह के भी नजदीक रहे।
वर्ष 2015 में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और पहली ही बार में शानदार जीत दर्ज की। इसी जीत के तुरंत बाद हीं उन्होंने औपचारिक रूप से रालोद का दामन थामा।
संगठन में उनके काम को देखते हुए 2016 में उन्हें अति पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, जिस पर वे 2020 तक रहे। साल 2021 में दूसरी बार रालोद से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़े, जिसमें महज 198 मतों से भाजपा के प्रत्याशी अरूण सिंह से चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
इसके बाद वर्ष 2021 में हीं उन्हें रालोद अध्यक्ष चौधरी जयन्त सिंह ने शामली जिलाध्यक्ष की कमान सौंपी, जिसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में जिलाध्यक्ष मुकेश के नेतृत्व में सपा-रालोद गठबंधन नेजिले की तीनों विधानसभा शामली, कैराना व थानाभवन सीटों पर क्लीन स्वीप करते हुए ऐतिहासिक जीत हासिल की थी।
चुनाव के बाद वाजिद अली को नया जिलाध्यक्ष बनाया गया और मुकेश सैनी को तरक्की देकर प्रदेश महासचिव की बड़ी जिम्मेदारी दी गई। प्रदेश महासचिव रहे मुकेश सैनी वर्ष 2017 और वर्ष 2022 के चुनावों में भी थानाभवन सीट से रालोद के मजबूत दावेदार थे।
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2027 के चुनाव के लिए भी वे लगातार क्षेत्र में पसीना बहा रहे थे, लेकिन हाईकमान की ओर से टिकट का रुख साफ न होने और लगातार हो रही अनदेखी से आहत होकर आखिरकार उन्होंने पार्टी छोड़ दी।
पश्चिमी यूपी में सैनी समाज के मोस्ट ओबीसी चेहरे के अलग होने से रालोद को बड़ा झटका माना जा रहा है। सपा जिस पीडीए फार्मूले को धार दे रही है, उसमें मुकेश सैनी का सपा की तरफ झुकाव थानाभवन के साथ आसपास की पड़ोसी सीटों के राजनीतिक गणित में भी अहम भूमिका निभाएंगा।
थानाभवन विधानसभा सीट पर समीकरण साधने के लिए समाजवादी पार्टी जाट या सैनी प्रत्याशी को मैदान में उतारने पर मंथन कर रही है। सीट पर दोनों बिरादरियों का मजबूत आधार है, जबकि एक लाख से अधिक मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं।
विधानसभा सीट थानाभवन में शुरू हुआ महामंथन
रालोद छोड़ चुके मुकेश सैनी की 17 जून को सपा के करीब आठ विधायकों व कई ओबीसी नेताओं के साथ पूर्व मुख्यमंत्रीअखिलेश यादव से पहली बैठक हुई थी। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद हाल ही में अखिलेश यादव से हुई एकांत मुलाकात के बाद उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।
हालांकि, यहां सपा से राहुल सैनी, वतन सैनी, एमएलसी किरणपाल कश्यप के पुत्र गौरव कश्यप और पूर्व ब्लाक प्रमुख शेर सिंह राणा भी मजबूती से दावेदारी ठोक रहे हैं। यदि सपा जाट कार्ड खेलती है तो 2017 के प्रत्याशी रहे डॉ. सुधीर पंवार की दावेदारी सबसे प्रबल है। पार्टी अब डैमेज कंट्रोल में जुट गई है और सूत्रों का दावा है कि रालोद नेतृत्व लगातार मुकेश सैनी से संपर्क साध रहा है।