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    शाहजहांपुर में फेल हुआ पुलिस का खुफिया तंत्र; 15 दिन में बैक टू बैक बड़ी चूकों से बैकफुट पर अफसर

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 05:39 PM (GMT+05:30)

    शाहजहांपुर में पुलिस का खुफिया तंत्र लगातार कमजोर साबित हो रहा है, जिससे कानून व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। पिछले 15 दिनों में कई बड़ी घटनाओं जैसे सोल ...और पढ़ें

    तिलहर में उमेश की हत्या के विरोध में जाम लगाए स्वजन की पुलिस से होती धक्का-मुक्की। जागरण

    तिलहर में उमेश की हत्या के विरोध में जाम लगाए स्वजन की पुलिस से होती धक्का-मुक्की। जागरण

    HighLights

    1. नवियापुर सतनुआ गांव में विवाद की जड़ सोलर प्लेट अब तक नहीं बरामद, ग्रामीणों का भी नहीं लगा सके अंदाजा

    अजयवीर सिंह, शाहजहांपुर। कानून व्यवस्था को बेहतर करने के लिए पुलिस महकमे में खुफियातंत्र (एलआइयू) और चौकीदारों के अलावा एक और ऐसा गुप्त तंत्र होता है जो समय रहते सटीक सूचनाएं देकर मुश्किलें दूर करने में मददगार होते हैं। कुछ समय से जिले में यह तंत्र हर मोर्चे पर कमजोर साबित हो रहा है।

    तिलहर के नवियापुर सतनुआ गांव में भी यही देखने को मिला। जिस विवाद का हल आसानी से निकल सकता था वह सड़क जाम करने तक पहुंच गया। गांव से करीब तीन किमी दूर लाठी-डंडे लेकर महिलाओं समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंच गए। निगोही-तिलहर मार्ग पर जाम लगने की वजह से बड़ी संख्या में लोगों को मुसीबत उठानी पड़ी।

    कोई खेतों से होकर निकला तो कोई जाम में फंसा रहा, जिससे भीड़ भी बढ़ती गई। खुफिया तंत्र पहले से न तो यह पता लगा पाया कि कितने लोग वहां पहुंचेंगे और न ही उनके आक्रोश के बारे में अंदाजा लगा पाए कि अब वे करेंगे क्या? यही वजह रही कि महिलाएं लाठी-डंडे व चप्पले तक लेकर पुलिसकर्मियों पर सीधे हो गईं।

    जबकि पोस्टमार्टम हाउस पर ही उमेश के स्वजन का पुलिस के प्रति आक्रोश सामने आ चुका था लेकिन उसके बाद भी मामले को न गंभीरता से लिया गया और न ही पुलिस के अधिकारियों को वास्तविक स्थिति के बारे में बताया गया।

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    इस विवाद की असल जड़ सोलर प्लेट कई दिन बाद भी पुलिस बरामद नहीं कर सकी। जो पुलिस की कमजोर कड़ी को बेपर्दा कर रहा है। इसी तरह गत सप्ताह कांट में गौतम माैर्य हत्याकांड में भी करीब नौ घंटे तक कांट-जलालाबाद मार्ग पर जाम लगा रहा था। आखिर में हंगामा शांत कराने के लिए एसपी सौरभ दीक्षित को स्वयं मौके पर जाना पड़ा था।

    जंतर-मंतर पहुंच गए थे बड़ी संख्या में लोग

    गत माह जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन चल रहा था तो बड़ी संख्या में युवा व नेता भी वहां पहुंच गए थे। वहां स्थिति बिगड़ने के बाद यहां लोगों को नजरबंद करना पड़ा था। इसके अलावा जलालाबाद में जब उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक पहुंचे तो उनके काफिले को तमाम युवा काले झंडे दिखाने सड़क पर पहुंच गए थे। जो सुरक्षा में बड़ी चूक भी थी।

    घटनाओं के राजफाश भी नहीं हो पा रहे

    तिलहर में सराफा व्यापारी की दुकान से नकदी समेत करीब 17 लाख की चोरी हो गई। इसके अलावा बंडा व कांट में भी सराफा दुकानों को चोरों ने निशाना बना लिया लेकिन किसी भी घटना के राजफाश में मुखबिर तंत्र से कोई मदद नहीं मिली। इसी तरह कई अन्य ऐसे प्रकरण है जो खुफिया व मुखबिर तंत्र की कमजोरी को उजागर कर रहा है।

    अफसरों में बढ़ रहा तनाव

    जिले में बीते कुछ समय में जिस तरह से हंगामे बढ़ गए हैं उससे पुलिस के अधिकारी भी चिंतित है। क्योंकि अधिकांश मामलों का इंस्पेक्टर से लेकर सीओ तक निस्तारण नहीं करा पाए। जिस वजह से एएसपी को मौके पर जाना पड़ा।

    जिले में चोरी की भी कई बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं जिनके राजफाश करने तक में हाईटेक पुलिस के पसीने छूट गए। इसी तरह कई अन्य ऐसे प्रकरण है जो खुफिया व मुखबिर तंत्र की कमजोरी को उजागर कर रहा है।

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