संतकबीर नगर: 37 साल में 18 क्षेत्रीय प्रबंधक बदले, फिर भी नहीं दूर हुई औद्योगिक क्षेत्रों की वीरानी
पूर्वांचल के औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन की कमी न होने के बावजूद विभागीय लापरवाही से विकास रुका है। यूपीसीडा ने संतकबीरनगर, बस्ती, देवरिया और मऊ में 2 ...और पढ़ें

यूपीसीडा के औद्योगिक क्षेत्रों में भूखंड तो भरपूर, लेकिन कृषि आधारित उद्योगों की रफ्तार सुस्त। जागरण
HighLights
पूर्वांचल में औद्योगिक विकास में विभागीय लापरवाही बड़ी बाधा।
संतकबीरनगर, बस्ती, देवरिया में 226 भूखंडों का आवंटन रद्द।
औद्योगिक भूखंडों पर स्कूल, आवास जैसी गतिविधियां संचालित।
एसके सिंह, संतकबीरनगर। पूर्वांचल में औद्योगिक विकास के लिए जमीन की कमी नहीं है, लेकिन उद्योगों की रफ्तार बढ़ाने में विभागीय लापरवाही और निष्क्रियता बड़ी बाधा बनी हुई है। सरकारें निवेश और रोजगार बढ़ाने की कोशिश करती रहीं, लेकिन यूपीसीडा के औद्योगिक क्षेत्रों में रिक्त भूखंड और बीमार इकाइयां अपनी जगह कायम रहीं।
गोरखपुर क्षेत्र में वर्ष 1989 में क्षेत्रीय प्रबंधक की तैनाती शुरू होने के बाद अब तक 18 अधिकारी यह जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। पहले क्षेत्रीय प्रबंधक एके अस्थाना करीब पांच वर्ष तक पद पर रहे। इसके बाद कोई एक-दो वर्ष तो कोई तीन वर्ष तक जिम्मेदारी संभालकर चला गया।
अधिकारियों के लगातार बदलने के बावजूद निष्क्रिय भूखंडों को सक्रिय करने और बीमार इकाइयों को पुनर्जीवित करने की दिशा में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई। नतीजा यह रहा कि औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आने के बजाय वीरानी बढ़ती गई। संतकबीरनगर, बस्ती और देवरिया के औद्योगिक क्षेत्रों की तस्वीर कमोवेश यही कहानी बयां करती है।
अब सरकार की सख्ती के बाद यूपीसीडा ने औद्योगिक क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति की पड़ताल शुरू की है। खलीलाबाद से लेकर बस्ती, देवरिया, मऊ और बलिया तक भूखंडों के आवंटन, रजिस्ट्री और वास्तविक उपयोग की स्थिति खंगाली जा रही है। संतकबीरनगर, बस्ती, देवरिया और मऊ में 226 भूखंडों का आवंटन निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कार्रवाई की जद में वे आवंटी हैं, जिन्होंने भूखंड लेने के बाद उद्योग नहीं लगाया या स्वीकृत परियोजना से अलग गतिविधियां शुरू कर दीं।
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खलीलाबाद में औद्योगिक प्लाट पर स्कूल और आवास
खलीलाबाद में उद्योग लगाने के लिए विकसित जमीन का इस्तेमाल अब औद्योगिक गतिविधियों से इतर हो रहा है। वर्ष 1973-74 में स्थापित औद्योगिक क्षेत्र 231.34 एकड़ में फैला है। यहां 363 प्लाट विकसित किए गए हैं, जिनमें 353 भूखंड 272 इकाइयों को आवंटित हैं। 126 इकाइयों को बीमार घोषित किया गया है।
इनमें 80 भूखंडों पर नियम विरुद्ध गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आई है। कहीं औद्योगिक प्लाट पर स्कूल चल रहा है तो कहीं आवास बना दिए गए हैं। बस्ती में वर्ष 1982 में स्थापित प्लास्टिक कांप्लेक्स करीब 83 एकड़ में फैला है। यहां 210 प्लाट विकसित किए गए हैं और 180 भूखंड उद्यमियों को आवंटित हैं।
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इनमें 50 प्लाट पर स्वीकृत परियोजना से इतर कार्य हो रहे हैं। देवरिया का औद्योगिक क्षेत्र वर्ष 1990-91 में करीब 147.89 एकड़ में विकसित किया गया था। यहां 68.91 एकड़ भूमि के भूखंड उद्यमियों को आवंटित किए गए हैं और कुल 117 औद्योगिक प्लाट विकसित हैं। तीन दशक से अधिक समय बाद भी भूखंडों और औद्योगिक गतिविधियों के बीच अपेक्षित तालमेल नहीं बन सका है।