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    1995 का इतिहास दोहराएगा रमजान 2026! 33 साल के चक्र ने बनाया अद्भुत संयोग, 11 दिन पहले शुरू होंगे रोजे

    Updated: Thu, 05 Feb 2026 06:42 AM (IST)

    संभल में रमजान 2026 फरवरी में 17 या 18 तारीख से शुरू होने की संभावना है, जो लगभग 30 साल बाद हो रहा है। फरवरी में रमजान आने से रोजेदारों को छोटे दिन और ...और पढ़ें

    प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

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    HighLights

    1. चांद दिखने पर 17 या 18 फरवरी से शुरू होंगे रोजे

    संवाद सहयोगी, जागरण, संभल। इस्लाम धर्म में रमजान माह का विशेष महत्व है। अल्लाह की इबादत, रोजा, तरावीह और कुरआन की तिलावत के इस पवित्र महीने की शुरुआत इस वर्ष फरवरी के तीसरे सप्ताह में होने की संभावना है। चांद दिखाई देने पर 17 या 18 फरवरी से मुस्लिम समाज के लोग एक माह तक रोजे रखना शुरू करेंगे। खास बात यह है कि करीब 30 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब रमजान फरवरी महीने में आएगा।

    इस्लामी कैलेंडर के अनुसार रमजान नौवां महीना होता है, जिसकी शुरुआत चांद देखने पर निर्भर करती है। जानकारों के अनुसार इस बार रमजान का आगाज फरवरी में होने से रोजेदारों को खास राहत मिलेगी। वर्ष 1995 में एक फरवरी को रमजान का पहला रोजा रखा गया था और अब लगभग तीन दशक बाद फिर से फरवरी में रोजों का संयोग बन रहा है।

    सरायतरीन शाही जामा मस्जिद के पेश इमाम रियाज उल हक कासमी ने बताया कि रमजान लगभग 33 वर्षों में सभी ऋतुओं का एक चक्र पूरा करता है। इस वर्ष रमजान के फरवरी में आने से दिन अपेक्षाकृत छोटे होंगे और तापमान भी कम रहेगा। इससे रोजेदारों को लंबे उपवास के दौरान प्यास और थकान कम महसूस होगी। साथ ही तरावीह, नफ्ल नमाज और अन्य इबादतें भी आसानी से अदा की जा सकेंगी।

    शहर के मौलवियों और धार्मिक विद्वानों का कहना है कि सर्द के मौसम में रोजे रखना सेहत के लिहाज से भी अपेक्षाकृत आसान होता है। इस दौरान शरीर में पानी की कमी कम होती है और ऊर्जा भी बनी रहती है। यही कारण है कि लोग इस रमजान को सहूलियत और बरकतों वाला मान रहे हैं। रमजान के मद्देनजर मस्जिदों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। साफ-सफाई, लाइटिंग और तरावीह की व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

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    मुस्लिम समाज में रमजान को लेकर उत्साह का माहौल है और लोग इस पाक महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत कर अल्लाह की रहमत पाने की तैयारी में जुट गए हैं। उधर, शहर की मस्जिदों में कमेटियों के जिम्मेदार तरावीह पढ़ाने के इच्छुक हाफिजों के साथ बैठक कर तरावीह की नमाज की तैयारियां कर रहे हैं।

    11 दिन पहले पूरा हो जाता है इस्लामी साल

    पिछले साल रमजान का महीना एक मार्च 2025 से शुरू हुआ था। चूंकि हिजरी साल 354 या 355 दिनों का होता है, जबकि ईस्वी कैलेंडर 365 दिनों का होता है। इसी वजह से दोनों कैलेंडरों के बीच हर साल 10 से 11 दिनों का अंतर आ जाता है। ऐसे में रमजान सहित अन्य इस्लामी महीने हर साल ईस्वी कैलेंडर में करीब 11 दिन पहले आ जाते हैं।


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