इस्लाम छोड़ शहजाद बन गए शंकर और रजिया सावित्री... शिवरात्रि पर करेंगे भगवान आशुतोष का जलाभिषेक
इस्लाम से सनातन धर्म अपनाने वाले शहजाद और रजिया (अब शंकर और सावित्री) ने हरिद्वार से सहारनपुर के लिए दूसरी कांवड़ यात्रा शुरू की है। वे शिवरात्रि पर अ ...और पढ़ें

धर्मनगरी हरिद्वार के चंडीघाट स्थित ब्रह्मकुंड पर गंगाजल पूजन करते शंकर और सावित्री। जागरण
HighLights
शहजाद और रजिया ने इस्लाम छोड़ सनातन धर्म अपनाया।
शंकर-सावित्री ने हरिद्वार से दूसरी कांवड़ यात्रा शुरू की।
सहारनपुर में शिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे।
जागरण संवाददाता, हरिद्वार/सहारनपुर। धर्मनगरी हरिद्वार के चंडीघाट स्थित ब्रह्मकुंड से शहजाद से शंकर और रजिया से सावित्री बने दंपती ने शनिवार को विधि-विधान के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दूसरी बार कांवड़ उठाई। पति-पत्नी अपने गांव सहारनपुर के बहेड़ी गुर्जर में शिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए हरिद्वार रवाना हुए। कांवड़ यात्रा प्रारंभ करने से पहले दोनों ने तीर्थाचार्य संत रामविशाल दास महाराज से आशीर्वाद लिया।
महाराज के मार्गदर्शन में पंडितों ने वैदिक रीति से जल पूजन कराया। इस अवसर पर हितेश दास महाराज, महातार शास्त्री सहित श्रद्धालु उपस्थित रहे। इसके बाद पति-पत्नी ने बाबा हठयोगी महाराज का भी आशीर्वाद लिया। इसी सावन माह में पति-पत्नी दूसरी बार कांवड़ लेकर निकले हैं। इससे पहले एक अगस्त को एक्स मुस्लिम कांवड़ यात्रा में सम्मिलित होकर इन्होंने हरिद्वार से गंगाजल लिया था और तीन अगस्त को गाजियाबाद पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया था।
रामविशाल दास महाराज ने कहा कि सनातन धर्म किसी पर बलपूर्वक मतांतरण का समर्थन नहीं करता। जो व्यक्ति श्रद्धा, स्वतंत्र इच्छा और अपने पूर्वजों की संस्कृति के प्रति आस्था के आधार पर सनातन मार्ग अपनाता है, उसका सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाता है। सावन माह में शिवभक्ति के साथ यह दंपती अपने गांव में जलाभिषेक करने जा रहे हैं, यह उनके धार्मिक संकल्प और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है। शंकर (पूर्व नाम शहजाद) ने कहा कि सनातन धर्म में हमें पूजा, परंपरा और जीवन जीने की स्वतंत्रता व संस्कारों का अनुभव हुआ है।
श्रावण मास में दूसरी बार कांवड़ जल उठाना हमारे लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव है। हम अपने गांव बहेड़ी गुर्जर जाकर शिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। हमारा मानना है कि हम सबके पूर्वज इस भूमि और इसकी सनातन परंपराओं से जुड़े हुए थे, इसलिए लोगों को अपनी जड़ों को समझने और सत्य को जानने का प्रयास करना चाहिए।