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    सिस्टम से हारा… बेटी को इंसाफ दिलाने को फफक-फफककर रोया था पिता, आखिर में दे दी जान

    Updated: Mon, 10 Aug 2026 01:12 AM (IST)

    रामपुर में बेटी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई लड़ रहे एक पिता ने आत्महत्या कर ली, जिसने पहले अपनी हत्या की आशंका भी जताई थी। ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

    प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

    HighLights

    1. बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई में पिता ने आत्महत्या की।

    2. पुलिस की कथित निष्क्रियता और समझौते के दबाव से आहत।

    3. मृतक पिता ने पहले ही अपनी हत्या की आशंका जताई थी।


    जागरण संवाददाता, रामपुर। सिस्टम से हारकर शाहबाद में आखिरकार एक पिता की जान चली गई। भले ही हत्या के बजाय उसने आत्मघाती कदम उठाया हो मगर कहीं न कहीं इसके लिए पुलिस भी जिम्मेदार है। बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए वह अधिकारियों की दहलीज पर फफक-फफककर रोया था।

    एसपी के आदेश पर उसके मुकदमें की विवेचना भी 10 जुलाई को क्राइम ब्रांच स्थानांतरित कर दी गई थी। उसके भाई समेत अभियुक्त पक्ष के लोग उस पर मुकदमा वापस लेने का लगातार दबाव बना रहे थे।

    दो दिन पहले उसके खिलाफ थाने में झूठा मुकदमा दर्ज कराने को तहरीर भी दी गई थी। तब भी अगर पुलिस सक्रिय होकर साजिश रचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की होती तो शायद उसकी जान बच जाती।

    यह है पूरा मामला

    22 मई को आरोपित निगम ने घर में घुसकर किशोरी के साथ छेड़छाड़ की थी। पीड़िता के पिता की तहरीर पर पुलिस ने जो प्राथमिकी दर्ज की थी उसमें पाक्सो एक्ट की धारा नहीं लगी थी। विवेचना में पीड़िता के नाबालिग होने के साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने घर में घुसकर छेड़छाड़ व मारपीट करने के आरोप में पाक्सो की धारा बढ़ा दी थी।

    पीड़ित किशोरी का पिता इस बात से आहत था कि आरोपित जेल नहीं गया। उसके खिलाफ कार्रवाई न होने से अभियुक्त पक्ष उसके बड़े भाई से हमसाज होकर उस पर लगातार समझौते का दबाव बना रहा था। थाने पर सुनवाई न होने का आरोप लगाकर उसने 10 जुलाई को तत्कालीन एसपी सोमेंद्र मीना से शिकायत की थी।

    पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट होने व विवेचना कहीं और कराने की मांग पर एसपी ने प्रकरण की विवेचना क्राइम ब्रांच भेज दी थी। एसपी कार्यालय के बाहर आकर पीड़ित पिता मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए फफक कर रोया था। उसने आरोप लगाया था कि उसकी बेटी के साथ दुष्कर्म हुआ है। आरोपित और उसका बड़ा भाई समझौते का दबाव बना रहे हैं।

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    यह भी कहा था कि ये लोग उसकी हत्या करा देंगे। इसके लिए उसने पांच लोगों का नाम लेकर यह भी कहा था कि उसकी हत्या के लिए वही लोग जिम्मेदार होंगे। हालांकि, पुलिस का दावा है कि पीड़ित बेटी के बयानों और मिले साक्ष्यों के आधार पर ही चार्जशीट तैयार की गई थी।

    एएसपी अनुराग सिंह ने बताया कि पाक्सो एक्ट की जिन धाराओं में चार्जशीट बनी थी, वह सात वर्ष से कम सजा से संबंधित हैं, इसलिए आरोपित की गिरफ्तारी नहीं की गई। बताया कि आरोपित भी नाबालिग है, पीड़ित पिता की मांग पर ही प्रकरण की दोबारा विवेचना भी कराई जा रही थी।

    भाई के विपक्षियों से मिलने से था आहत

    मृतक की पत्नी-बच्चों का आरोप है कि बड़ा भाई दूसरे पक्ष से मिल गया था और मुकदमे में समझौते का दबाव बना रहा था। मृतक इसका विरोध कर रहा था। इसी बात को लेकर दोनों भाइयों के बीच तनातनी और बढ़ती जा रही थी। परिवार भी बड़े भाई के रवैये से नाराज था।

    मुकदमे में समझौते को लेकर मृतक पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था, जिससे वह काफी दिनों से परेशान था। मृतक एमटेक (बायोलॉजी) था। स्वजन के मुताबिक पढ़ा-लिखा होने के बावजूद पिछले कुछ समय से वह पारिवारिक विवाद और मुकदमे को लेकर मानसिक दबाव में था।

    दो दिन पहले हुई शिकायत से बढ़ गया अवसाद

    पुलिस के अनुसार दो रोज पहले 7 अगस्त को अभियुक्त पक्ष की ओर से राजेश के खिलाफ छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी गई थी। इसकी जांच में राजेश ने पुलिस को अपनी ओर से दर्ज एफआईआर की कापी मुहैया करा दी थी। जिसके बाद पुलिस ने दूसरे पक्ष की शिकायत को रंजिशन मानकर प्रकरण को क्लोज करने की तैयारी कर ली थी। स्वजन का कहना है कि पहले से चल रहे विवाद के बीच इस शिकायत ने राजेश की परेशानी और बढ़ा दी थी। राजेश को फंसाने का प्रयास करने वालों के खिलाफ पुलिस अगर सख्त हो जाती तो शायद राजेश की जान बच जाती।

    इन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई हत्या की प्राथमिकी

    मृतक के बेटे की तहरीर पर नौ लोगों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई है। इनमें संजीव, राजेंद्र, राजेंद्र के बेटे शिवा और आकाश, ऋषिपाल, संजय, सतवीर, आदित्य और एक नाबालिग शामिल हैं।

    तीन बार बदली कहानी

    22 मई को मृतक ने पुलिस हेल्पलाइन 112 पर काल कर मारपीट की सूचना दी थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने छानबीन की तो दो पक्षों में मारपीट का मामला सामने आया। अगले दिन मृतक ने थाने में तहरीर देकर बेटी से छेड़छाड़ व मारपी करने का मुकदमा दर्ज कराया।

    इसके पांच दिन बाद न्यायालय में 164 के बयान में पीड़िता ने आरोपित समेत दो अज्ञात पर दुष्कर्म करने के बयान दे दिए। मगर 112 की सूचना और तहरीर में भिन्नता के साथ मेडिकल रिपोर्ट में इस तरह की पुष्टि न होने पर पुलिस ने उसके बयानों को खारिज करते हुए आरोपित के खिलाफ छेड़छाड़ की धाराओं में चार्जशीट लगाई थी।

    तमंचा बरामदगी को लेकर चला ड्रामा

    मृतक के पास पहले तो तमंचा और सुसाइड नोट नहीं मिला। इससे प्रकरण हत्या से जुड़ा माना जाने लगा। मगर पुलिस को मृतक के स्वजन पर शक हुआ तो गहराई से पूछताछ शुरू हो गई। इस पर घटनास्थल से थोड़ी दूरी पर तमंचा बरामद हो गया। वहीं मृतक की जेब से सुसाइड नोट भी बरामद करा दिया गया।

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