आजम खान से अखिलेश यादव की मुलाकात: इत्तेफाक नहीं, 2027 विधानसभा चुनाव की बड़ी राजनीतिक बिसात
अखिलेश यादव की आजम खान से रामपुर में मुलाकात 2027 विधानसभा चुनाव के लिए एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा ...और पढ़ें

HighLights
अखिलेश-आजम मुलाकात 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीतिक तैयारी।
मुस्लिम वोट बैंक पर आजम खान का गहरा प्रभाव।
सपा के लिए पश्चिमी यूपी में टिकट वितरण में अहम भूमिका।
अनिल अवस्थी, रामपुर। आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के दौरे के महज चार दिन बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव का आजम आजम खान से मिलने आना महज इत्तेफाक नहीं था। न ही अखिलेश का आजम के बड़े बेटे अदीब के कंधे पर हाथ रखना, 'आजम थे, हैं और रहेंगे' कहना और गठबंधन व टिकटों पर चर्चा की बात मीडिया के सामने रखना सामान्य बात थी।
यह सब एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति के तहत हुआ। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद मंडल के पांच जिलों की 27 विधानसभा सीटों में से सपा को 17 और भाजपा को 10 सीटें मिली थीं। इन सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं का औसत 45 से 50 प्रतिशत के करीब है, और इनका एक बड़ा तबका आज भी आजम आजम खान को अपना रहनुमा मानता है।
इन सीटों पर सपा से किसे टिकट मिलेगा, यह आजम की सिफारिश के बिना तय नहीं होता। यही नहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के टिकटों की गुणा-गणित में भी उनकी राय बेहद अहम रहती है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आजम सपा के लिए सिर्फ एक वरिष्ठ नेता नहीं, बल्कि मुस्लिम मतदाताओं के भरोसे, रामपुर की सियासत और पार्टी की पुरानी राजनीतिक पहचान हैं।
समर्थकों की नाराजगी आती रही है सामने
लंबे समय से कानूनी दांव-पेच में उलझने और सजायाफ्ता होने के कारण मुस्लिमों के एक बड़े वर्ग में उनके प्रति गहरी हमदर्दी है। भले ही वे खुद चुनाव लड़ने की स्थिति में न हों, लेकिन उनके संदेश का असर चुनावी नतीजों पर जरूर पड़ेगा। ऐसे में पिछले चुनाव से बेहतर प्रदर्शन के लिए सपा को आजम का साथ बेहद जरूरी है। दूसरी ओर, लगभग एक साल बाद चुनावी समय में अखिलेश यादव के रामपुर आकर आजम से मुलाकात करने से समर्थकों की नाराजगी गाहे-बगाहे इंटरनेट मीडिया पर सामने आती रही है।
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18 अक्टूबर को रामपुर पहुंचे ओवैसी आजम के प्रति हमदर्दी जताते हुए अखिलेश यादव को सिर्फ मुसलमानों का इस्तेमाल करने वाला बता गए थे। इसके अलावा, आजम की पत्नी तजीन फातिमा भी लखनऊ में अखिलेश से मुलाकात के बाद पांच अक्टूबर को प्रेस वार्ता कर अखिलेश के जल्द रामपुर आने की बात कह चुकी थीं। ऐसे में, इस समय रामपुर का दौरा टालना सपा प्रमुख के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकता था।
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सूत्रों के मुताबिक, जेल में आजम आजम खान ने सपा मुखिया से अपनी सख्त नाराजगी जताई और एक साल बाद मिलने आने पर ‘आखिर याद आ गई’ कहकर तंज भी कसा। हालांकि, अखिलेश ने पार्टी और हर परिस्थिति में उनका साथ निभाने का वादा दोहराया। जेल से बाहर आते ही अखिलेश ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि सपा के सहयोगी दलों के प्रत्याशियों की सूची को अंतिम रूप देने के लिए उन्होंने आजम आजम खान से विशेष रूप से राय-मशविरा किया है।
