वंदे भारत ट्रेनों में बड़ा बदलाव : 500 कोचों में बदलेंगे स्वचालित दरवाजे, बेहतर और GPS सिस्टम, सफर सुरक्षित व सुगम होगा
भारतीय रेलवे वंदे भारत एक्सप्रेस के 500 कोचों में स्वचालित दरवाजे, यात्री सूचना प्रणाली और ब्रेक सिस्टम को अपग्रेड कर रहा है। यह बदलाव यात्रियों के सफ ...और पढ़ें

वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन।
HighLights
सेंट्रल, ईस्टर्न, नार्दर्न व सदर्न साउथ कोस्ट तथा नार्थ सेंट्रल व नार्थ वेस्टर्न रेलवे करेंगे कार्य
232 विशेष कार्यों का आवंटन जोनों में हुआ, सुरक्षित व सुविधाजनक हो जाएगी वंदे भारत
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। देश की सबसे आधुनिक सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रा करने वाले यात्रियों के सफर को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। भारतीय रेलवे ने एक मेगा प्लान के तहत देश भर में दौड़ रही वंदे भारत ट्रेनों के 500 कोचों में लगे स्वचालित दरवाजे, जीपीएस आधारित यात्री सूचना प्रणाली और उत्कृष्ट ब्रेक सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों को बदलने और अपग्रेड करने का फैसला किया है।
यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधा मिलेगी
ट्रेनों में तकनीकी खराबी को पूरी तरह खत्म करने और यात्रियों को विश्वस्तरीय अनुभव देने के लिए यह कदम उठाया गया है। इस विशेष कार्य (रिहैबिलिटेशन/रिप्लेसमेंट) के लिए प्रति वंदे भारत कोच 30 लाख रुपये का बजट तय किया है।
सेंट्रल व ईस्टर्न रेलवे को अधिक जिम्मेदारी
शुरुआती चरण में विभिन्न जोनों की कार्यशालाओं में कुल 500 कोचों के उच्च मूल्य वाले कल-पुर्जों का कायाकल्प किया जाएगा। इस अभियान के तहत कुल 232 विशेष कार्यों का आवंटन जोनों में किया गया है। इसमें सबसे अधिक 48-48 कार्यों की जिम्मेदारी सेंट्रल रेलवे और ईस्टर्न रेलवे को सौंपी गई है। इसके अलावा नार्दर्न व सदर्न रेलवे को 40-40, साउथ कोस्ट रेलवे को 24, नार्थ सेंट्रल व नार्थ वेस्टर्न रेलवे को 16-16 कार्यों का कोटा आवंटित किया गया है।
सेंसर सिस्टम ब्लाक होने से ट्रेन खड़ी हो जाती है
रेलवे बोर्ड के निदेशक यांत्रिक कोचिंग ऐश्वर्या सचान ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में यदि यात्री द्वारा जबरन दरवाजा रोकने का प्रयास किया जाता है, तो पूरा सेंसर सिस्टम ब्लाक हो जाता है, जिससे ट्रेन खड़ी हो जाती है। अब जो नवीन परिवर्तन होने जा रहा है, उसके तहत दरवाजों में 'स्मार्ट सेंसर गाइडेंस' और 'एंटी-मैकेनिकल चोक' तकनीक वाले उन्नत कल-पुर्जे लगाए जाएंगे।
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ट्रेन का दरवाजा जाम नहीं होगा
उन्होंने बताया कि यह नया सिस्टम पहले के सापेक्ष इतना मजबूत होगा कि मामूली रुकावट से दरवाजा जाम नहीं होगा। इसी तरह, पहले के ब्रेक सिस्टम में व्हील स्लाइडिंग की समस्या रहती थी। अब इसमें 'माइक्रोप्रोसेसर कंट्रोल्ड इलेक्ट्रो-न्यूमैटिक'' ब्रेक पुर्जे लगाए जा रहे हैं, जो पहियों की गति और पटरी के घर्षण का लाइव डेटा पढ़कर बिना किसी झटके के ट्रेन रोकेंगे।
एसी में कम कूलिंग की शिकायत नहीं रहेगी
जीपीएस आधारित यात्री सूचना प्रणाली में भी बड़ा सुधार दिखेगा। नए बदलाव के तहत इसमें 'ड्यूल-बैंड सैटेलाइट कनेक्टिविटी' वाले पुर्जे लगाए जा रहे हैं, जो बिना इंटरनेट नेटवर्क के भी सीधे उपग्रह से जुड़कर यात्रियों को ट्रेन की रीयल-टाइम जानकारी देंगे। ट्रेन के एयर कंडीशनिंग सिस्टम के कंप्रेसर और ब्लोअर भी बदले जाएंगे, जिससे उमस और यात्रा के दौरान कूलिंग कम होने की शिकायतें हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी।
यात्रियों का सफर बेहतर, सुरक्षित होगा : सीपीआरओ
कुल मिलाकर, एक लाख रुपये से अधिक लागत या तीन वर्ष से अधिक उपयोगी जीवन वाले इन संवेदनशील उपकरणों के बदलने से वंदे भारत तकनीकी रूप से त्रुटिहीन हो जाएगी। सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि इससे यात्रियों का सफर पूरी तरह बेहतर और सुरक्षित होगा।