भर्तियों को पटरी पर लाने में जुटा उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग, नई शिक्षक भर्ती के लिए भी तैयार; अभ्यर्थियों में जगाई भरोसे की लौ
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अपनी कार्यशैली में बदलाव लाते हुए चार साल से लंबित शिक्षक भर्ती परीक्षाओं को तय समय पर करा रहा है। नए अध्यक्ष के नेत ...और पढ़ें

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयगाराज।
HighLights
पूरी होने की ओर चार साल पुरानी शिक्षक भर्तियां, दो हो चुकीं
आयोग अब अपनी नई कार्यशैली से अपनी पहचान बदल रहा
अवधेश पाण्डेय, जागरण, प्रयागराज। परीक्षा तिथियां घोषित कर बार-बार स्थगन का पर्याय बन चुका उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अब अपनी नई कार्यशैली से पहचान बदल रहा है। चार वर्ष से लंबित शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के बोझ तले दबे आयोग ने पहली बार तय समय पर परीक्षाएं कराकर अभ्यर्थियों में भरोसे की लौ जगाई है।
लाखों अभ्यर्थियों का इंतजार खत्म होगा
नई तकनीक, सख्त निगरानी और समयबद्ध रणनीति के सहारे आयोग न केवल पुरानी भर्तियों का बैकलाग खत्म करने में जुटा है, बल्कि नई शिक्षक भर्ती का अधियाचन लेने के लिए भी तैयार हो गया है। ई-अधियाचन पोर्टल लाइव हो जाने के बाद आयोग को अब नए अधियाचन की प्रतीक्षा है, जिससे भर्ती विज्ञापन जारी कर लाखों अभ्यर्थियों का इंतजार खत्म किया जा सके।
खास-खास
- 21 अगस्त 2023 को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग विधेयक-2023 का प्रकाशन
- 19 दिसंबर 2025 को दूसरे पूर्णकालिक अध्यक्ष बने पूर्व डीजीपी डा. प्रशांत कुमार
- 910 पदों की रद की गई असिस्टेंट प्रोफेसर पुनर्परीक्षा 18-19 अप्रैल को हुई
- 624 पदों की पीजीटी परीक्षा नौ व 10 मई को कराई गई
- 3539 पदों की टीजीटी परीक्षा अब तीन व चार जून को होनी है
तय समय पर नहीं हो सकी थीं ये परीक्षाएं
उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से अव्यवस्था, अनिश्चितता और विवादों से घिरी रही है। आयोग के गठन के बाद भी शुरुआती डेढ़ वर्ष तक हालात बहुत नहीं बदले। वर्ष 2022 की असिस्टेंट प्रोफेसर, पीजीटी और टीजीटी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं की तिथियां कई बार घोषित हुईं, लेकिन आयोजन तय समय पर नहीं हो सका। इससे प्रतियोगी युवाओं के भीतर निराशा और असंतोष गहराता गया। असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में धांधली ने आयोग की साख को और झटका दिया।
खबरें और भी
जुलाई तक पुरानी भर्तियों का बैकलाग खत्म का लक्ष्य
ऐसे माहौल में नए अध्यक्ष डाॅ. प्रशांत कुमार के कार्यभार संभालने के बाद आयोग ने परीक्षा प्रबंधन की पूरी कार्यप्रणाली बदलने की कोशिश की। एआइ इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम, वीओआइपी आधारित निगरानी, विजिलेंस मैकेनिज्म और नो रिलेशन सर्टिफिकेट जैसी व्यवस्थाओं के जरिए परीक्षा की शुचिता सुनिश्चित करने का खाका तैयार किया गया। सबसे बड़ा बदलाव यह रहा कि वर्षों से लंबित परीक्षाओं को केवल घोषित ही नहीं किया गया, बल्कि निर्धारित समय पर संपन्न भी कराया गया। अब जुलाई तक पुरानी भर्तियों का बैकलाग खत्म करने का लक्ष्य तय किया गया है।
पहली पूर्णकालिक अध्यक्ष परीक्षाओं में शून्य प्रगति
21 अगस्त 2023 को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग विधेयक-2023 प्रकाशित हुआ। पहली पूर्णकालिक अध्यक्ष के रूप में प्रो. कीर्ति पाण्डेय के करीब एक वर्ष के कार्यकाल में भर्ती परीक्षाओं के नाम पर प्रगति शून्य रही। उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग तथा माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के स्थान पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन किया गया।
परीक्षाओं का आयोजन नहीं करा सकीं
पांच सितंबर 2024 को पहली पूर्णकालिक अध्यक्ष के रूप में प्रो. पाण्डेय ने पदभार संभाला। आयोग को वर्ष 2022 की तीन प्रमुख लंबित शिक्षक भर्तियों (विज्ञापन संख्या 51 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर, माध्यमिक शिक्षा की प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) एवं प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक भर्ती (टीजीटी) परीक्षा के आयोजन का दायित्व मिला था। अध्यक्ष अपने लगभग एक वर्ष के कार्यकाल में परीक्षाओं की तिथियां तो घोषित करती रहीं, लेकिन आयोजन नहीं करा सकीं।
धांधली का शिकार हुई परीक्षा
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा रद कर दी गई। परीक्षा जैसे-तैसे हुई तो धांधली का शिकार हो गई, जिसके चलते अध्यक्ष को सितंबर 2025 में पद गंवाना पड़ा। परीक्षा रद कर दी गई। 19 दिसंबर 2025 को दूसरे पूर्णकालिक अध्यक्ष के रूप में पद संभालने वाले डाॅ. प्रशांत कुमार एक महीने में बैठकें कर योजना बनाने के बाद परीक्षा आयोजन को पटरी पर ले आए। दो प्रमुख परीक्षाएं कराने के साथ अब आयोग नई शिक्षक भर्ती के लिए भी तैयार है।
तय समय में परीक्षा की व्यूह रचना
आयोग में अध्यक्ष/सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष निर्धारित है, लेकिन उसका डेढ़ से अधिक वर्ष बिना किसी उपलब्धि के बीत जाने के बाद नियमावली में संशोधन कर डा. प्रशांत कुमार को नया अध्यक्ष बनाया गया। पद संभालने के बाद एक महीने में उन्होंने बैठकें कर परीक्षा योजना, तैयारी, नकल पर नियंत्रण, तय समय में परीक्षा आयोजन आदि बिंदुओं पर व्यूहरचना तैयार की।
जून में 3539 पदों की टीजीटी परीक्षा
ठोस योजना के बाद 20 जनवरी 2026 की आयोग की बैठक में सभी लंबित परीक्षाओं के लिए तिथियां घोषित कीं। वर्ष 2022 की विज्ञापन संख्या 51 के तहत 910 पदों की रद की गई असिस्टेंट प्रोफेसर पुनर्परीक्षा 18-19 अप्रैल को सफलतापूर्वक कराने के बाद नौ व 10 मई को 624 पदों की पीजीटी परीक्षा कराई। अब तीन व चार जून को 3539 पदों की टीजीटी परीक्षा है।
जुलाई में निर्धारित तिथि पर टीईटी परीक्षा की तैयारी
पूर्व डीजीपी रहे आयोग के अध्यक्ष ने नई परीक्षा के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कराई। इस बीच शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) आयोजन की तिथि घोषित कर आवेदन लेने, शुल्क जमा कराने का कार्य सुगमता से कराने के लिए बैंकों से समझौता पत्र (एमओयू) किया। इसके बाद टीईटी के लिए विज्ञापन जारी कर आवेदन लिए। अब दो, तीन चार जुलाई को निर्धारित तिथि पर परीक्षा की तैयारी है।
नकलविहीन परीक्षा का खींचा खाका
परीक्षा केंद्रों एवं परीक्षार्थियों की आनलाइन निगरानी करने के लिए आयोग कार्यालय में एआइ इंडीग्रेटेड कमांड एवं कंट्रोल रूम तैयार कराया। केंद्रों पर एजेंसी के माध्यम से वायस ओवर इंटरनेट फोन (वीओआइपी) लगाने की व्यवस्था भी की। इससे हर केंद्र पर परीक्षा के दौरान गतिविधि आनलाइन देखने के साथ आवाज भी सुनी जाती है। विजिलेंस मैकेनिज्म खड़ा किया। इससे नकल माफिया पर नियंत्रण हुआ। परीक्षा की शुचिता के लिए परीक्षा कार्य से जुड़े सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, केंद्र व्यवस्थापकों, परीक्षकों से नो रिलेशन सर्टिफिकेट लिया गया। इससे ऐसे लोगों को परीक्षा कार्य से हटाया गया, जिनके कोई नजदीकी परीक्षा में सम्मिलित हो रहे थे।
जुलाई तक लंबित भर्ती परीक्षाओं का आयोजन कर भर्तियों का बैकलाग खत्म कर दिया जाएगा। नई भर्ती के लिए आयोग का ई-अधियाचन पोर्टल क्रियाशील हो गया है, जिस पर संबंधित विभाग अधियाचन भेज सकते हैं। जैसे-जैसे अधियाचन मिलता जाएगा, वैसे-वैसे विज्ञापन जारी कर आवेदन लेते हुए आयोग परीक्षा कराने के लिए तैयार है। पुलिस भर्ती बोर्ड की परीक्षाओं के आयोजन का अनुभव उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग में काम आ रहा है।
- डाॅ. प्रशांत कुमार, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग प्रयागराज।