UP परिषदीय स्कूल: विद्यार्थी अरुणाचल के सडकेन और उत्तर प्रदेश के होली की समानता समझेंगे विद्यार्थी
उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों की कक्षा पांच की हिंदी पुस्तक 'वीणा' में बदलाव किए जा रहे हैं, जिसमें छात्र ...और पढ़ें

UP परिषदीय स्कूलों में कक्षा पांच की हिंदी की किताब।
HighLights
बेसिक स्कूलों के कक्षा पांच की हिंदी की पुस्तक में हो रहा बदलाव
नए सत्र से परिवर्तित पुस्तकें सभी बच्चों के हाथ में पहुंच जाएंगी
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। परिषदीय स्कूलों में कक्षा पांच में पढ़ाई जाने वाली हिंदी की पुस्तक वीणा में कुछ बदलाव किए जा रहे हैं। छात्र-छात्राओं को अरुणाचल प्रदेश के पर्व साडकेन और उत्तर प्रदेश में मनाए जाने वाले रंगों के त्योहार के बीच की साम्यता से अवगत कराया जाएगा। भौगोलिक दृष्टि से दोनों राज्यों की समझ को विकसित करने के लिए पड़ोसी राज्यों के नाम, दोनों राज्यों की राजधानी, भाषा, परिधान, मुख्य फसल, त्योहार, नृत्य आदि के बारे में बताया जाएगा।
बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाई जा रही हैं। राज्य शिक्षण संस्थान इन पुस्तकों की पाठ्य सामग्री को उत्तर प्रदेश के संदर्भ में बदल रहा है। नए सत्र से परिवर्तित पुस्तकें बच्चों के हाथ में पहुंच जाएंगी। अभी पुस्तक के पाठ चार साडकेन की विषय वस्तु को विशेषज्ञों ने परिवर्तित किया है।
यह पाठ बच्चों को अरुणाचल प्रदेश के त्योहार (बौद्ध नववर्ष उत्सव) से परिचत कराने वाला है। इसमें बताया जाएगा कि साडकेन की तरह उत्तर प्रदेश में होली मनाई जाती है। साडकेन में बौद्ध बिहार से बुद्ध् व उनके शिष्यों की मूर्तियां लेकर गांव में बनाए गए अस्थाई मंदिर में रखी जाती हैं और सभी एक दूसरे पर पानी फेकते हैं। घर में अनेक प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं।
यह पर्व तीन दिन तक मनाया जाता है। इसी दिन से नए वर्ष की शुरुआत होती है। त्योहार के बाद मूर्तियों को पुन: बौद्ध विहार पहुंचा दिया जाता है। इस पाठ में उत्तर प्रदेश में मनाए जाने वाले होली और दिवाली का भी उल्लेख किया जा रहा है। विद्यार्थियों से अभ्यास कार्य कराते हुए उत्तर प्रदेश के बारे में जानकारी जुटाने का भी निर्देश दिया गया है।
राज्य शिक्षण संस्थान के प्राचार्य राजेंद्र प्रताप के अनुसार विरासत का महत्व अध्याय में विद्यार्थियों से उत्तर प्रदेश के दर्शनीय स्थलों के बारे में खोजबीन करने के लिए निर्देशित किया जा रहा है। यह पाठ अभी छात्र-छात्राओं को सिर्फ महाराष्ट्र के अजंता एवं एलोरा की गुफाओं, कला कृतियों से जोड़ता है।
